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जैसे-तैसे तैयारियां पूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sun, 04 Jan 2015 11:58 PM IST
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बारिश के बाद माघ मेला फिर संभला और प्रशासन ने भी जैसे-तैसे पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व की तैयारियां पूरी कर लीं। पौष पूर्णिमा का पहला स्नान पर्व सोमवार को है। प्रशासन का अनुमान है कि कम से कम 25 लाख श्रद्धालु गंगा स्नान करनेे पहुुंचेंगे। कहीं कमी न रह जाए, सो रविवार को डीएम भवनाथ सहित पूरा अमला मेला क्षेत्र के निरीक्षण में जुटा रहा और जहां भी कमियां दिखीं, उन्हें तत्काल दूर कराया गया।
हालांकि स्नान पर्व पर सबसे महत्वपूर्ण होते हैं स्नानघाट, क्योंकि मेला क्षेत्र में सोमवार को पहुंचने वाले लाखों लोगों का उद्देश्य सिर्फ गंगा स्नान करना होगा। स्नानार्थियों की सहूलियत के लिए प्रशासन ने 12 स्नान घाट बनाने का निर्णय लिया था। रविवार को दिनभर घाटों के निर्माण का काम होता रहा। इसके बावजूद नौ घाट ही तैयार किए जा सके। अफसरों का दावा है कि गंगा का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है, सो तीन घाटों का निर्माण कराना उचित नहीं था। सोमवार को जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में घाट डूब सकते हैं। जिन नौ घाटों का निर्माण कराया गया है, वह जलस्तर बढ़ने पर भी सुरक्षित रहेंगे और उनकी क्षमता इतनी है, जितने में 25 लाख श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं। उधर, सूत्रों का कहना है कि काम की गति धीमी थी, इसलिए तीन घाट तैयार नहीं कराए जा सके। सिंचाई विभाग के अफसरों ने इस बात की पुष्टि की कि जलस्तर नहीं बढ़ रहा है। जो घाट बनवाए गए हैं, उनमें संगम स्नान घाट, अरैल स्नान घाट, रामघाट, दंडीबाड़ा घाट, आचार्य बाड़ा घाट, दशाश्वमेघ घाट, काली सड़क से महावीर मार्ग तक का घाट, महावीर मार्ग से अक्षयवट तक का घाट और खाक चौक घाट शामिल हैं जबकि गंगोली शिवाला, जीटी रोड और मोरी रोड घाट का निर्माण नहीं कराया जा सका है। नौ घाटों पर रविवार को साफ-सफाई कराकर कांसा-पुआल बिछा दिया गया। इसके अलावा भूले-भटके शिविर की स्थापना भी कर दी गई है।
मेले की तैयारियां का रविवार को निरीक्षण किया। बातचीत में श्रद्धालुओं ने बताया कि गत वर्षों की तुलना में इस बार व्यवस्था बेेहतर है। श्रद्धालु तैयारियों से संतुष्ट नजर आए। मेला क्षेत्र में अफसर नियमित रूप से निरीक्षण भी कर रहे हैं। थोड़ी सी भी कमी होगी तो तुरंत सुधार होगा। सोमवार को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भवनाथ सिंह, जिलाधिकारी
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हालांकि स्नान पर्व पर सबसे महत्वपूर्ण होते हैं स्नानघाट, क्योंकि मेला क्षेत्र में सोमवार को पहुंचने वाले लाखों लोगों का उद्देश्य सिर्फ गंगा स्नान करना होगा। स्नानार्थियों की सहूलियत के लिए प्रशासन ने 12 स्नान घाट बनाने का निर्णय लिया था। रविवार को दिनभर घाटों के निर्माण का काम होता रहा। इसके बावजूद नौ घाट ही तैयार किए जा सके। अफसरों का दावा है कि गंगा का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है, सो तीन घाटों का निर्माण कराना उचित नहीं था। सोमवार को जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में घाट डूब सकते हैं। जिन नौ घाटों का निर्माण कराया गया है, वह जलस्तर बढ़ने पर भी सुरक्षित रहेंगे और उनकी क्षमता इतनी है, जितने में 25 लाख श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं। उधर, सूत्रों का कहना है कि काम की गति धीमी थी, इसलिए तीन घाट तैयार नहीं कराए जा सके। सिंचाई विभाग के अफसरों ने इस बात की पुष्टि की कि जलस्तर नहीं बढ़ रहा है। जो घाट बनवाए गए हैं, उनमें संगम स्नान घाट, अरैल स्नान घाट, रामघाट, दंडीबाड़ा घाट, आचार्य बाड़ा घाट, दशाश्वमेघ घाट, काली सड़क से महावीर मार्ग तक का घाट, महावीर मार्ग से अक्षयवट तक का घाट और खाक चौक घाट शामिल हैं जबकि गंगोली शिवाला, जीटी रोड और मोरी रोड घाट का निर्माण नहीं कराया जा सका है। नौ घाटों पर रविवार को साफ-सफाई कराकर कांसा-पुआल बिछा दिया गया। इसके अलावा भूले-भटके शिविर की स्थापना भी कर दी गई है।
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मेले की तैयारियां का रविवार को निरीक्षण किया। बातचीत में श्रद्धालुओं ने बताया कि गत वर्षों की तुलना में इस बार व्यवस्था बेेहतर है। श्रद्धालु तैयारियों से संतुष्ट नजर आए। मेला क्षेत्र में अफसर नियमित रूप से निरीक्षण भी कर रहे हैं। थोड़ी सी भी कमी होगी तो तुरंत सुधार होगा। सोमवार को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भवनाथ सिंह, जिलाधिकारी
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