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टीईटी 2018 संशोधित आंसर कीििकि चुनौती
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टीईटी-2018 में गलत सवालों पर जवाब तलब
0 संशोधित आंसर-की और परिणाम रद्द करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। यूपी टीईटी 2018 में प्रश्नों के गलत जवाब को सही मानने के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप है कि पूछे गए कुछ प्रश्न सही नहीं हैं। प्राधिकारी द्वारा जारी संशोधित आंसर-की को लेकर आपत्ति है। याचिका में 30 नवंबर 2018 को जारी संशोधित आंसर-की और दिसंबर 2018 को जारी परिणाम रद्द करने की मांग की गई है।
श्वेता पाठक और 31 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने छह मई तक सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यदि जवाब नहीं दाखिल होता है तो किसी ऐसे अधिकारी को अदालत में हाजिर होना होगा, जिसे पूरे मामले की जानकारी हो। अधिकारी को संशोधित आंसर-की और जारी परिणाम के पूरे रिकार्ड के साथ हाजिर होना होगा। याचीगण का कहना है कि एक अन्य याचिका दिव्यांशु मिश्र व अन्य में भी इसी मामले को उठाया गया है, जिस पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा था, मगर अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है।
याचिका में कहा गया कि टीईटी-2018 की आंसर-की जारी होने के बाद याचीगण की ओर से 20-22 प्रश्नों के उत्तर को लेकर आपत्ति जताई थी। इस पर सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने प्राथमिक टीईटी के तीन प्रश्नों और उच्च प्राथमिक टीईटी के दो प्रश्नों पर ही आपत्तियां स्वीकार कीं, शेष आपत्तियों को नहीं माना। याचीगण का कहना है कि संशोधित आंसर-की सही नहीं है, इसे रद्द कर याचीगण को उनके द्वारा दिए गए सही जवाब का अंक दिया जाए तथा परीक्षा परिणाम संशोधित किया जाए।
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0 संशोधित आंसर-की और परिणाम रद्द करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। यूपी टीईटी 2018 में प्रश्नों के गलत जवाब को सही मानने के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप है कि पूछे गए कुछ प्रश्न सही नहीं हैं। प्राधिकारी द्वारा जारी संशोधित आंसर-की को लेकर आपत्ति है। याचिका में 30 नवंबर 2018 को जारी संशोधित आंसर-की और दिसंबर 2018 को जारी परिणाम रद्द करने की मांग की गई है।
श्वेता पाठक और 31 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने छह मई तक सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यदि जवाब नहीं दाखिल होता है तो किसी ऐसे अधिकारी को अदालत में हाजिर होना होगा, जिसे पूरे मामले की जानकारी हो। अधिकारी को संशोधित आंसर-की और जारी परिणाम के पूरे रिकार्ड के साथ हाजिर होना होगा। याचीगण का कहना है कि एक अन्य याचिका दिव्यांशु मिश्र व अन्य में भी इसी मामले को उठाया गया है, जिस पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा था, मगर अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है।
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याचिका में कहा गया कि टीईटी-2018 की आंसर-की जारी होने के बाद याचीगण की ओर से 20-22 प्रश्नों के उत्तर को लेकर आपत्ति जताई थी। इस पर सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने प्राथमिक टीईटी के तीन प्रश्नों और उच्च प्राथमिक टीईटी के दो प्रश्नों पर ही आपत्तियां स्वीकार कीं, शेष आपत्तियों को नहीं माना। याचीगण का कहना है कि संशोधित आंसर-की सही नहीं है, इसे रद्द कर याचीगण को उनके द्वारा दिए गए सही जवाब का अंक दिया जाए तथा परीक्षा परिणाम संशोधित किया जाए।
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