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इंदिरा मैराथन
Updated Mon, 19 Nov 2018 08:47 PM IST
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इंदिरा मैराथन में उठी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की मांग
0 श्यामा चरण ने कहा, एक वर्ष का सांसद निधि देने को तैयार
0 विजेताओं को किया पुरस्कृत, शहरी निकलें तो मिले अंतरराष्ट्रीय दर्जा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। स्कूली बच्चों की मोहक प्रस्तुतियों के बीच सोमवार को मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में आयोजित समापन समारोह में अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। मुख्य अतिथि सांसद श्यामा चरण गुप्त ने पहले मैराथन तथा फिर क्रास कंट्री के विजेताओं को इनामी राशि तथा प्रमाणपत्र दिए।
समारोह में इंदिरा मैराथन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन बनाने तथा प्रयागराज में अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनाने का मुद्दा भी उठा। खास यह कि ये मुद्दे स्वयं सांसद और खेल निदेशक ने उठाए। संबोधन की शुरुआत ही सांसद ने जिले में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की मांग से उठाई। उन्होंने खेल निदेशक डॉ.आरपी सिंह से मांग की कि यहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लिए वह केंद्र सरकार से घोषणा करवाएं। सांसद ने कहा कि यदि बजट की कमी हो तो उनका एक वर्ष की सांसद निधि इसमें लगा दी जाए।
इससे पहले खेल निदेशक ने कहा कि इंदिरा मैराथन को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इसके लिए जरूरी है कि शहरियों की इस आयोजन में भागीदारी बढ़े। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ खेल विभाग का आयोजन नहीं है। खेल संस्थाओं, लोगों की भागीदारी होनी चाहिए। उन्हाेंने कहा कि लोग सीधे तौर पर भले किसी दौड़ में शामिल न हों लेकिन, हर घर से किसी न किसी को इसमें शरीक होकर धावकों का उत्साह बढ़ाना चाहिए। जिस दिन ऐसा होगा उसी दिन यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन हो जाएगा। डॉ.आरपी सिंह की इस अपील पर सांसद ने घोषणा की अगले वर्ष से वह और उनका परिवार इस दौड़ में जरूर शामिल होगा। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि खेल के प्रति लोगों में रुझान बढ़ा है। अब देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने लगे हैं। सांसद ने कहा कि तीन-चार वर्ष पहले तक किसी के कहने पर खिलाड़ियों का चयन हुआ करता था। राजनीति भी हावी थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब पक्षपात नहीं होगा। मेधावियों को सम्मान मिलेगा। समारोह में लकी ड्रा के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। इससे पहले क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी चंचल मिश्र ने अतिथियों का स्वागत और धन्यवाद ज्ञापित किया। डॉ.रंजना त्रिपाठी ने संचालन किया। समारोह में अर्जुन एवार्डी बैंडमिंटन खिलाड़ी अभिन्न श्याम गुप्त, प्रमोद तिवारी, बॉक्सिंग कोच एसएन मिश्र आदि मौजूद रहे।
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महिला क्रास कंट्री में मात्र तीन ने पूरी की दौड़
0 दौड़ की दूरी आधी किए जाने के बावजूद 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिला क्रास कंट्री में उत्साह नहीं दिखा। पिछले वर्ष आठ किमी की इस दौड़ में 11 महिलाओं ने प्रतिभाग किया था। इनमें से मात्र तीन ही दौड़ पूरी कर सकी थीं। इसलिए इस दौड़ को समाप्त करने का निर्णय लिया गया लेकिन, खेल निदेशक के हस्तक्षेप के बाद 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की दौड़ भी कराने का निर्णय लिया गया। हालांकि दौड़ की दूरी घटाकर चार किमी कर दी गई। इसका सकारात्मक परिणाम रहा और इस वर्ग में 400 से अधिक अधिक इंट्री हुई लेकिन दौड़ मात्र तीन महिलाएं ही दौड़ पूरी कर सकीं। इस पर खेल निदेशक ने शहरियों से आयोजन में भागीदारी बढ़ाने की अपील की।
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सांसद ने की एक लाख रुपये देने की घोषणा
0 सांसद श्यामा चरण गुप्त ने इंदिरा मैराथन के लिए हर वर्ष एक लाख रुपये देने की घोषणा की। यह राशि खिलाड़ियों में वितरित की जाएगी।
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बच्चों की प्रस्तुतियों ने लुभाया
0 स्कूली बच्चों की प्रस्तुतियों ने इंदिरा मैराथन के समापन समारोह की शोभा बढ़ाने के साथ महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। समारोह के शुरुआत में जगत तारन गर्ल्स इंटर कालेज की छात्राओं ने स्वागत गीत पर नृत्य प्रस्तुत की। इसके बाद गोल्डेन जुबली के विद्यार्थियों ने महिलाओं के विविध रूपों तथा उनकी शक्ति का प्रदर्शन किया।
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रास्ते में बीमार पड़ गईं अवंति
0 सोरांव की महिला धावक अवंति रास्ते में ही बीमार पड़ गईं। मैराथन के वापसी के दौरान नैनी नया पुल से पहले ही वह गिर गईं। उनके पेट में दर्द था। एंबुलेंस से तत्काल बेली अस्पताल पहुंचाया गया। परिवार वालों को भी बुला लिया गया था। अब तबीयत ठीक बताई जा रही है।
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इस बार भी मंत्री नहीं आए मंत्री
0 इंदिरा मैराथन की शुरुआत 1985 में हुई थी। उसमें प्रधानमंत्री राजीव गांधी तथा मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह मौजूद रहे। इसके बाद के आयोजनों में भी खेल मंत्री तथा खेल विभाग के प्रमुख सचिव तथा अन्य अफसर मौजूद रहते थे लेकिन, इस बार यह गहमा-गहमी नहीं दिखी। पिछले वर्ष कहा गया था कि नगर निकाय चुनाव आचार संहिता लागू है। इसलिए कोई मंत्री आयोजन में नहीं पहुंचा लेकिन इस बार ऐेसी कोई बाधा नहीं थी। इसके बावजूद इस वर्ष भी कोई मंत्री आयोजन में नहीं पहुंचा। जबकि, पहले तय हुआ था कि खेल मंत्री चेतन चौहान ही मैराथन को हरी झंडी दिखाएंगे लेकिन, वह नहीं आए। इनके अलावा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जिले में रहे और कई कार्यक्रमों में शामिल हुए लेकिन, इंदिरा मैराथन में नहीं पहुंचे। डीएम सुहास एलवाई ने मैराथन को हरी झंडी दिखाई।
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अब छह साल तक नहीं टूट पाएगा गावते का रिकार्ड
0 पुरुष और महिला वर्ग में लगातार छह बार मैराथन जीतने वाली एक मात्र खिलाड़ी बनीं
प्रयागराज। महाराष्ट्र की ज्योति शंकर राव गावते ने अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन में लगातार छह बार विजेता होने का रिकार्ड बनाया है। पुरुष और महिला दोनों ही वर्ग में वह एकमात्र धावक हैं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। अब उनका यह रिकार्ड कम से कम छह वर्ष तक नहीं टूट पाएगा। इंदिरा मैराथन में भैरो सिंह लोने ने छह बार जीत हासिल की है लेकिन बीच में एक बार चूक गए।
गावते ने 2013-14 में इंदिरा मैराथन में हिस्सा लिया था और अब तक लगातार छह दफे विजेता रहीं। महिला वर्ग में इनसे पहले नीलाम्मा एल. ने 1993-94 से 1995-96 के बीच लगातार तीन बार जीत हासिल की। एच.संगनी देवी भी इंदिरा मैराथन की तीन बार विजेता रहीं लेकिन, बीच में एक बार उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था।
पुरुष वर्ग में भी भैरो सिंह लोने 2000-01 से 2004-05 के बीच लगातार पांच बार विजेता रहे लेकिन 2005-06 वह उपविजेता रहे। केसी रामू ने उन्हें 37 सेकेंड से पीछे छोड़ दिया था। हालांकि, इसके अगले वर्ष 2006-07 में वह एक बार विजयी रहे। इस तरह से लोने भी छह बार यह प्रतियोगिता जीतने वाले खिलाड़ी हैं लेकिन, लगातार जीत से चूक गए। इनके अलावा अभय सिंह ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने लगातार चार बार जीत हासिल की। अभय 1993-94 से 1996-97 के बीच इंदिरा मैराथन के विजेता रहे।
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धोनी, गावते को मिले दो-दो लाख रुपये
0 पुरुष और महिला दोनों ही वर्ग में मैराथन के विजेताओं को प्रमाणपत्र के अलावा दो-दो लाख रुपये का चेक दिया गया। उप विजेताओं को एक-एक लाख तथा द्वितीय उपविजेताओं को 75-75 हजार रुपये का पुरस्कार मिला। इनके अलावा दोनों ही वर्ग में 11-11 धावकों को 10 हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार दिए गए। 15 से 20 वर्ष आयु वर्ग में आठ किमी की क्रास कंट्री दौड़ में बालक और बालिका दोनों ही वर्ग में विजेताओं को 10-10 हजार रुपये दिए गए। उपविजेता को पांच-पांच तथा तीसरे स्थान पर रहने वाले को तीन-तीन हजार रुपये प्रदान किए गए। सात-सात अन्य प्रतिभागियों को एक-एक हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार दिए गए। इसी तरह से 45 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों और महिलाओं की दौड़ के विजेताओं को पांच-पांच हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले प्रतियोगियाें को तीन-तीन एवं दो-दो हजार रुपये के पुरस्कार दिए गए। पुरुष वर्ग के सात अन्य धावकों को एक-एक हजार रुपये का सांत्वना पुरस्कार दियार गया। महिलाओं के वर्ग में मात्र तीन धावक दौड़ पूरी कर पाईं। कई अन्य प्रतिभागियों को लकी ड्रा के माध्यम से पुरस्कार के लिए चुना गया।
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0 श्यामा चरण ने कहा, एक वर्ष का सांसद निधि देने को तैयार
0 विजेताओं को किया पुरस्कृत, शहरी निकलें तो मिले अंतरराष्ट्रीय दर्जा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। स्कूली बच्चों की मोहक प्रस्तुतियों के बीच सोमवार को मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में आयोजित समापन समारोह में अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। मुख्य अतिथि सांसद श्यामा चरण गुप्त ने पहले मैराथन तथा फिर क्रास कंट्री के विजेताओं को इनामी राशि तथा प्रमाणपत्र दिए।
समारोह में इंदिरा मैराथन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन बनाने तथा प्रयागराज में अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनाने का मुद्दा भी उठा। खास यह कि ये मुद्दे स्वयं सांसद और खेल निदेशक ने उठाए। संबोधन की शुरुआत ही सांसद ने जिले में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की मांग से उठाई। उन्होंने खेल निदेशक डॉ.आरपी सिंह से मांग की कि यहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लिए वह केंद्र सरकार से घोषणा करवाएं। सांसद ने कहा कि यदि बजट की कमी हो तो उनका एक वर्ष की सांसद निधि इसमें लगा दी जाए।
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इससे पहले खेल निदेशक ने कहा कि इंदिरा मैराथन को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इसके लिए जरूरी है कि शहरियों की इस आयोजन में भागीदारी बढ़े। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ खेल विभाग का आयोजन नहीं है। खेल संस्थाओं, लोगों की भागीदारी होनी चाहिए। उन्हाेंने कहा कि लोग सीधे तौर पर भले किसी दौड़ में शामिल न हों लेकिन, हर घर से किसी न किसी को इसमें शरीक होकर धावकों का उत्साह बढ़ाना चाहिए। जिस दिन ऐसा होगा उसी दिन यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन हो जाएगा। डॉ.आरपी सिंह की इस अपील पर सांसद ने घोषणा की अगले वर्ष से वह और उनका परिवार इस दौड़ में जरूर शामिल होगा। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि खेल के प्रति लोगों में रुझान बढ़ा है। अब देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने लगे हैं। सांसद ने कहा कि तीन-चार वर्ष पहले तक किसी के कहने पर खिलाड़ियों का चयन हुआ करता था। राजनीति भी हावी थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब पक्षपात नहीं होगा। मेधावियों को सम्मान मिलेगा। समारोह में लकी ड्रा के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। इससे पहले क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी चंचल मिश्र ने अतिथियों का स्वागत और धन्यवाद ज्ञापित किया। डॉ.रंजना त्रिपाठी ने संचालन किया। समारोह में अर्जुन एवार्डी बैंडमिंटन खिलाड़ी अभिन्न श्याम गुप्त, प्रमोद तिवारी, बॉक्सिंग कोच एसएन मिश्र आदि मौजूद रहे।
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महिला क्रास कंट्री में मात्र तीन ने पूरी की दौड़
0 दौड़ की दूरी आधी किए जाने के बावजूद 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिला क्रास कंट्री में उत्साह नहीं दिखा। पिछले वर्ष आठ किमी की इस दौड़ में 11 महिलाओं ने प्रतिभाग किया था। इनमें से मात्र तीन ही दौड़ पूरी कर सकी थीं। इसलिए इस दौड़ को समाप्त करने का निर्णय लिया गया लेकिन, खेल निदेशक के हस्तक्षेप के बाद 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की दौड़ भी कराने का निर्णय लिया गया। हालांकि दौड़ की दूरी घटाकर चार किमी कर दी गई। इसका सकारात्मक परिणाम रहा और इस वर्ग में 400 से अधिक अधिक इंट्री हुई लेकिन दौड़ मात्र तीन महिलाएं ही दौड़ पूरी कर सकीं। इस पर खेल निदेशक ने शहरियों से आयोजन में भागीदारी बढ़ाने की अपील की।
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सांसद ने की एक लाख रुपये देने की घोषणा
0 सांसद श्यामा चरण गुप्त ने इंदिरा मैराथन के लिए हर वर्ष एक लाख रुपये देने की घोषणा की। यह राशि खिलाड़ियों में वितरित की जाएगी।
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बच्चों की प्रस्तुतियों ने लुभाया
0 स्कूली बच्चों की प्रस्तुतियों ने इंदिरा मैराथन के समापन समारोह की शोभा बढ़ाने के साथ महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। समारोह के शुरुआत में जगत तारन गर्ल्स इंटर कालेज की छात्राओं ने स्वागत गीत पर नृत्य प्रस्तुत की। इसके बाद गोल्डेन जुबली के विद्यार्थियों ने महिलाओं के विविध रूपों तथा उनकी शक्ति का प्रदर्शन किया।
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रास्ते में बीमार पड़ गईं अवंति
0 सोरांव की महिला धावक अवंति रास्ते में ही बीमार पड़ गईं। मैराथन के वापसी के दौरान नैनी नया पुल से पहले ही वह गिर गईं। उनके पेट में दर्द था। एंबुलेंस से तत्काल बेली अस्पताल पहुंचाया गया। परिवार वालों को भी बुला लिया गया था। अब तबीयत ठीक बताई जा रही है।
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इस बार भी मंत्री नहीं आए मंत्री
0 इंदिरा मैराथन की शुरुआत 1985 में हुई थी। उसमें प्रधानमंत्री राजीव गांधी तथा मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह मौजूद रहे। इसके बाद के आयोजनों में भी खेल मंत्री तथा खेल विभाग के प्रमुख सचिव तथा अन्य अफसर मौजूद रहते थे लेकिन, इस बार यह गहमा-गहमी नहीं दिखी। पिछले वर्ष कहा गया था कि नगर निकाय चुनाव आचार संहिता लागू है। इसलिए कोई मंत्री आयोजन में नहीं पहुंचा लेकिन इस बार ऐेसी कोई बाधा नहीं थी। इसके बावजूद इस वर्ष भी कोई मंत्री आयोजन में नहीं पहुंचा। जबकि, पहले तय हुआ था कि खेल मंत्री चेतन चौहान ही मैराथन को हरी झंडी दिखाएंगे लेकिन, वह नहीं आए। इनके अलावा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जिले में रहे और कई कार्यक्रमों में शामिल हुए लेकिन, इंदिरा मैराथन में नहीं पहुंचे। डीएम सुहास एलवाई ने मैराथन को हरी झंडी दिखाई।
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अब छह साल तक नहीं टूट पाएगा गावते का रिकार्ड
0 पुरुष और महिला वर्ग में लगातार छह बार मैराथन जीतने वाली एक मात्र खिलाड़ी बनीं
प्रयागराज। महाराष्ट्र की ज्योति शंकर राव गावते ने अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन में लगातार छह बार विजेता होने का रिकार्ड बनाया है। पुरुष और महिला दोनों ही वर्ग में वह एकमात्र धावक हैं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। अब उनका यह रिकार्ड कम से कम छह वर्ष तक नहीं टूट पाएगा। इंदिरा मैराथन में भैरो सिंह लोने ने छह बार जीत हासिल की है लेकिन बीच में एक बार चूक गए।
गावते ने 2013-14 में इंदिरा मैराथन में हिस्सा लिया था और अब तक लगातार छह दफे विजेता रहीं। महिला वर्ग में इनसे पहले नीलाम्मा एल. ने 1993-94 से 1995-96 के बीच लगातार तीन बार जीत हासिल की। एच.संगनी देवी भी इंदिरा मैराथन की तीन बार विजेता रहीं लेकिन, बीच में एक बार उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था।
पुरुष वर्ग में भी भैरो सिंह लोने 2000-01 से 2004-05 के बीच लगातार पांच बार विजेता रहे लेकिन 2005-06 वह उपविजेता रहे। केसी रामू ने उन्हें 37 सेकेंड से पीछे छोड़ दिया था। हालांकि, इसके अगले वर्ष 2006-07 में वह एक बार विजयी रहे। इस तरह से लोने भी छह बार यह प्रतियोगिता जीतने वाले खिलाड़ी हैं लेकिन, लगातार जीत से चूक गए। इनके अलावा अभय सिंह ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने लगातार चार बार जीत हासिल की। अभय 1993-94 से 1996-97 के बीच इंदिरा मैराथन के विजेता रहे।
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धोनी, गावते को मिले दो-दो लाख रुपये
0 पुरुष और महिला दोनों ही वर्ग में मैराथन के विजेताओं को प्रमाणपत्र के अलावा दो-दो लाख रुपये का चेक दिया गया। उप विजेताओं को एक-एक लाख तथा द्वितीय उपविजेताओं को 75-75 हजार रुपये का पुरस्कार मिला। इनके अलावा दोनों ही वर्ग में 11-11 धावकों को 10 हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार दिए गए। 15 से 20 वर्ष आयु वर्ग में आठ किमी की क्रास कंट्री दौड़ में बालक और बालिका दोनों ही वर्ग में विजेताओं को 10-10 हजार रुपये दिए गए। उपविजेता को पांच-पांच तथा तीसरे स्थान पर रहने वाले को तीन-तीन हजार रुपये प्रदान किए गए। सात-सात अन्य प्रतिभागियों को एक-एक हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार दिए गए। इसी तरह से 45 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों और महिलाओं की दौड़ के विजेताओं को पांच-पांच हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले प्रतियोगियाें को तीन-तीन एवं दो-दो हजार रुपये के पुरस्कार दिए गए। पुरुष वर्ग के सात अन्य धावकों को एक-एक हजार रुपये का सांत्वना पुरस्कार दियार गया। महिलाओं के वर्ग में मात्र तीन धावक दौड़ पूरी कर पाईं। कई अन्य प्रतिभागियों को लकी ड्रा के माध्यम से पुरस्कार के लिए चुना गया।