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कॉपियां जलाने पर भी नहीं मिटेगा सुबूत
Updated Sat, 02 Sep 2017 08:07 PM IST
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कॉपियां जलाने पर भी नहीं मिटेगा सुबूत
डिजिटलाइज की जाएंगी मुख्य परीक्षा की कॉपियां
यूपीपीएस में डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की कॉपियां नष्ट किए जाने के बाद भी अब कोई विवाद नहीं होगा। आयोग ने मुख्य परीक्षाओं की कॉपियों को डिजिटलाइज कराए जाने का निर्णय लिया है। इसके लिए डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही आयोग प्रस्तावित डीपीआर शासन को भेजकर बजट की मांग करेगा। हालांकि इसके लिए शासन स्तर से पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। यह व्यवस्था वर्ष 2018 से लागू किए जाने की तैयारी है।
हालांकि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में वर्ष 1964 से यह नियम है कि कॉपियां एक साल तक संरक्षित रखी जाएंगी और इसके बाद नष्ट कर दी जाएंगी। पिछले कुछ वर्षों में हुईं तकरीबन सभी भर्ती परीक्षाओं को लेकर कोई न कोई विवाद सामने आता रहा। कई मामले न्यायालय में लंबित भी हैं। इसके बावजूद आयोग ने कॉपियां नष्ट कर दीं। ऐसे में आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। प्रदेश सरकार ने ऐसे मामलों की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, आयोग में तैनात नए अफसरों ने सुधार की कवायद भी शुरू कर दी है। आयोग के सचिव जगदीश के अनुसार मुख्य परीक्षाओं की कॉपियों को स्कैनिंग के जरिये डिजिटलाइज किया जाएगा। परिणाम घोषित होने के बाद कॉपियों को ऑनलाइन कर दिया जाए। प्रतियोगी अपने लॉगइन और पावसर्ड से कॉपियां देख सकेंगे। ऐसे में कॉपियां नष्ट किए जाने के बाद भी रिकार्ड संरक्षित रहेंगे। यह काम किसी दूसरी एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। डीपीआर तैयार किया जा रहा है। जल्द ही बजट के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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डिजिटलाइज की जाएंगी मुख्य परीक्षा की कॉपियां
यूपीपीएस में डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की कॉपियां नष्ट किए जाने के बाद भी अब कोई विवाद नहीं होगा। आयोग ने मुख्य परीक्षाओं की कॉपियों को डिजिटलाइज कराए जाने का निर्णय लिया है। इसके लिए डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही आयोग प्रस्तावित डीपीआर शासन को भेजकर बजट की मांग करेगा। हालांकि इसके लिए शासन स्तर से पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। यह व्यवस्था वर्ष 2018 से लागू किए जाने की तैयारी है।
हालांकि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में वर्ष 1964 से यह नियम है कि कॉपियां एक साल तक संरक्षित रखी जाएंगी और इसके बाद नष्ट कर दी जाएंगी। पिछले कुछ वर्षों में हुईं तकरीबन सभी भर्ती परीक्षाओं को लेकर कोई न कोई विवाद सामने आता रहा। कई मामले न्यायालय में लंबित भी हैं। इसके बावजूद आयोग ने कॉपियां नष्ट कर दीं। ऐसे में आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। प्रदेश सरकार ने ऐसे मामलों की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, आयोग में तैनात नए अफसरों ने सुधार की कवायद भी शुरू कर दी है। आयोग के सचिव जगदीश के अनुसार मुख्य परीक्षाओं की कॉपियों को स्कैनिंग के जरिये डिजिटलाइज किया जाएगा। परिणाम घोषित होने के बाद कॉपियों को ऑनलाइन कर दिया जाए। प्रतियोगी अपने लॉगइन और पावसर्ड से कॉपियां देख सकेंगे। ऐसे में कॉपियां नष्ट किए जाने के बाद भी रिकार्ड संरक्षित रहेंगे। यह काम किसी दूसरी एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। डीपीआर तैयार किया जा रहा है। जल्द ही बजट के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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