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10 महीने बीते, नहीं खुला, पूर्व प्र्रिंसिपल की मौत का राज

Fri, 08 Feb 2019 01:15 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 08 Feb 2019 01:15 AM IST
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10 months passed, not open, secret of death of former principal
sucide shimla
जमुना क्रिश्चियन इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य आरके गवन की मौत का राज 10 महीने बाद भी नहीं खुल सका है। जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजे गए सुसाइड नोट की रिपोर्ट अब तक नहीं आ सकी है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही के चलते ही मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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आरके गवन (78) जमुना क्रिश्चियन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य पद से रिटायर हुए थे। 18 अप्रैल की शाम फांसी लगाकर उन्होंने खुदकुशी कर ली थी। जांच पड़ताल के दौरान सुसाइड नोट मिला था। जिसमें लिखा था ‘फर्जी मुकदमे में फंसाकर कुछ लोगों ने उनकी प्रतिष्ठा धूमिल कर दी। जो स्थिति इन लोगों ने कर दी है, उसके कारण मेरे लिए आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं है।’परिजनों का आरोप था कि कई बार शिकायत के बावजूद पुलिस ने उनकी नहीं सुनी। घरवालों ने आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाकर पूर्व काशी नरेश के जिले में स्थित संपत्तियों के केयरटेकर रुद्रनारायण पाठक के साथ ही तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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घटना के बाद मिशनरी समुदाय के लोगों ने उत्पीड़न का आरोप लगाकर कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था। उस वक्त पुलिस ने भले ही रिपोर्ट दर्ज कर ली थी लेकिन वह परिजनों के आरोपों को मानने को तैयार नहीं थी। यही वजह थी कि पुलिस ने सुसाइड नोट को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा। पुलिस अफसरों का कहना था कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। हालांकि 10 महीने बीतने के बाद भी अब तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है। परिजनोें का आरोप है कि राजनीतिक दबाव कहें या लापरवाही, पुलिस मामले को लेकर गंभीर नहीं है। यही वजह है कि 10 महीने बाद भी रिपोर्ट नहीं आ सकी है।
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मामले को लेकर पुलिस कितनी गंभीर है, इसका पता इसी से चलता है मामले के विवेचक को यह तक पता नहीं कि सुसाइड नोट की जांच रिपोर्ट अभी आई या नहीं। जब इस बारे में विवेचक रामबहादुर साहनी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि डेढ़ महीने पहले ही उन्हें विवेचना मिली है। ऐसे में अभी वह यह नहीं देख सके हैं कि रिपोर्ट आई है या नहीं। बता दें कि मामले के वह तीसरे विवेचक हैं। इससे पहले दो अन्य दरोगाओं के पास भी विवेचना रही लेकिन फिर भी मामले में कार्रवाई नहीं हुई।
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