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सीएमओ और डीएम को पत्र लिखा मांगा मौतों का आंकड़ा : अनिल पाराशर
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कोविड काल में हुई मौतों का आंकड़ा स्पष्ट न होने पर आम जनता के साथ ही जनप्रतिनिधि भी प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से खफा हैं। इसको लेकर कोल विधायक अनिल पाराशर ने सीएमओ व जिलाधिकारी को एक-एक पत्र लिखा है।
इसमें उन्होंने एक अप्रैल से लेकर वर्तमान तक हुई मौतों का आंकड़ा मांगा है। इसके साथ ही रेमडेसिविर इंजेक्शन की खपत से लेकर उसे किन-किन मरीजों को दिया गया, इंजेक्शन मिलने के बाद कितने मरीजों की जान बची इसको लेकर भी जानकारी मांगी है।
कोल विधायक अनिल पाराशर ने बताया कि भयानक कोरोना दौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग बढ़ गई, मरीजों के तीमारदार इसके लिए भटकते नजर आए। जनप्रतिनिधियों के पास भी तमाम सिफारिशें आईं। आलम यह रहा कि जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों को दरकिनार किया गया।
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इसको लेकर सवाल उठाए तो प्रशासन ने कहा कि हर जरूरतमंद को इंजेक्शन दिलाए गए। जबकि स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे है। इस मामले में जानकारी मांगी गई है कि कितने मरीजों को इंजेक्शन दिया गया, निजी अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों में कितनी सप्लाई गई।
इसके साथ ही जिन मरीजों को इंजेक्शन लगा उनमें से कितनों की जान बचाई जा सकी। वहीं, अप्रैल से लेकर वर्तमान तिथि तक कितने मरीजों की कोविड के चलते अस्पतालों में मौत हुई है। इसका भी रिकार्ड मांगा गया है।
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इसमें उन्होंने एक अप्रैल से लेकर वर्तमान तक हुई मौतों का आंकड़ा मांगा है। इसके साथ ही रेमडेसिविर इंजेक्शन की खपत से लेकर उसे किन-किन मरीजों को दिया गया, इंजेक्शन मिलने के बाद कितने मरीजों की जान बची इसको लेकर भी जानकारी मांगी है।
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कोल विधायक अनिल पाराशर ने बताया कि भयानक कोरोना दौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग बढ़ गई, मरीजों के तीमारदार इसके लिए भटकते नजर आए। जनप्रतिनिधियों के पास भी तमाम सिफारिशें आईं। आलम यह रहा कि जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों को दरकिनार किया गया।
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इसको लेकर सवाल उठाए तो प्रशासन ने कहा कि हर जरूरतमंद को इंजेक्शन दिलाए गए। जबकि स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे है। इस मामले में जानकारी मांगी गई है कि कितने मरीजों को इंजेक्शन दिया गया, निजी अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों में कितनी सप्लाई गई।
इसके साथ ही जिन मरीजों को इंजेक्शन लगा उनमें से कितनों की जान बचाई जा सकी। वहीं, अप्रैल से लेकर वर्तमान तिथि तक कितने मरीजों की कोविड के चलते अस्पतालों में मौत हुई है। इसका भी रिकार्ड मांगा गया है।