{"_id":"6276d2941b2a800cdb115d76","slug":"world-thalassemia-day-aligarh-news-ali2910191110","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व थैलेसीमिया दिवस : शादी से पहले स्वास्थ्य कुंडली मिलाएं, बीमारी पास न आए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व थैलेसीमिया दिवस : शादी से पहले स्वास्थ्य कुंडली मिलाएं, बीमारी पास न आए
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रविवार को विश्व थैलेसीमिया दिवस है। यह आनुवांशिक रक्त रोग है और जन्म से ही बच्चे इस बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं। मरीज के शरीर में खून का ठीक से निर्माण भी नहीं हो पाता है। इस कारण रोगी को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। ऐसे में चिकित्सक का कहना है कि शादी से पहले युवक - युवती की स्वास्थ्य कुंडली जरूर मिलाएं, तभी इस बीमारी से दूर रह सकते हैं। इसके उपचार के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया सेंटर भी है, जहां अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि नोएडा, फर्रूखाबाद, मैनपुरी, इटावा, हाथरस, मुजफ्फनगर आदि जनपदों के बच्चों का इलाज होता है।
बेटी थैलेसीमिया से पीड़ित होने के बाद बनाई सोसाइटी
अलीगढ़ थैलेसीमिया सोसाइटी के अध्यक्ष विनय शर्मा की बेटी थैलेसीमिया से पीड़ित है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का जन्म 2003 में हुआ था। एक साल बाद ही उसके थैलेसीमिक होने का पता चला। बेटी के इलाज में काफी दिक्कतें आईं तो 2018 में एक सोसाइटी बनाई है। जिसमें 130 थैलेसीमिक बच्चे पंजीकृत हैं। इस सेंटर के माध्यम से बच्चों को सुविधाएं मिल रहीं हैं।
थैलेसीमिया होने की वजह
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विभव वार्ष्णेय ने बताया कि थैलेसीमिया एक आनुवंाशिक रोग है। यह माता या पिता या दोनों के जींस में गड़बड़ी के कारण होता है। किसी व्यक्ति के शरीर में अल्फा और बीटा दोनों में से किसी प्रोटीन के निर्माण वाले जींस में गड़बड़ी होने पर थैलेसीमिया रोग हो जाता हैं। इसके इलाज के लिए नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत होती है। कुछ रोगियों को हर 10 से 15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। ज्यादातर मरीज इसका खर्चा नहीं उठा पाते हैं। सामान्य तय पीड़ित बच्चे की मृत्यु 12 से 15 वर्ष की आयु में हो जाती है। सही उपचार लेने पर 25 वर्ष से ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बेटी थैलेसीमिया से पीड़ित होने के बाद बनाई सोसाइटी
अलीगढ़ थैलेसीमिया सोसाइटी के अध्यक्ष विनय शर्मा की बेटी थैलेसीमिया से पीड़ित है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का जन्म 2003 में हुआ था। एक साल बाद ही उसके थैलेसीमिक होने का पता चला। बेटी के इलाज में काफी दिक्कतें आईं तो 2018 में एक सोसाइटी बनाई है। जिसमें 130 थैलेसीमिक बच्चे पंजीकृत हैं। इस सेंटर के माध्यम से बच्चों को सुविधाएं मिल रहीं हैं।
विज्ञापन
थैलेसीमिया होने की वजह
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विभव वार्ष्णेय ने बताया कि थैलेसीमिया एक आनुवंाशिक रोग है। यह माता या पिता या दोनों के जींस में गड़बड़ी के कारण होता है। किसी व्यक्ति के शरीर में अल्फा और बीटा दोनों में से किसी प्रोटीन के निर्माण वाले जींस में गड़बड़ी होने पर थैलेसीमिया रोग हो जाता हैं। इसके इलाज के लिए नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत होती है। कुछ रोगियों को हर 10 से 15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। ज्यादातर मरीज इसका खर्चा नहीं उठा पाते हैं। सामान्य तय पीड़ित बच्चे की मृत्यु 12 से 15 वर्ष की आयु में हो जाती है। सही उपचार लेने पर 25 वर्ष से ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं।
विज्ञापन