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विश्व गौरैया दिवस: हमने रखा है दाना पानी, लौट आओ चिड़ियारानी

Mon, 20 Mar 2023 01:08 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 20 Mar 2023 01:08 AM IST
सार

मोबाइल टॉवरों की बढ़ती संख्या और जबरदस्त ध्वनि प्रदूषण ने इस मनोहारी पक्षी को खासा नुकसान पहुंचाया है। मोबाइल टॉवरों से निकलने वाली हानिकारक तरंगों और खेतों में बेतहाशा प्रयोग होने वाले कीटनाशकों ने इनकी आबादी को कम कर दिया है। 

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World Sparrow Day We kept food and water come back sparrow
ओ री गौरैया - फोटो : social media

विस्तार

सुबह-शाम गौरैया की चहचहाहट सुनाई देना कम जरूर हो गया है, लेकिन सुखद बात ये है कि अभी तक ये सिलसिला जारी है। आंगन में फुदक फुदक कर अनाज के दाने चुगते हुए चीं-चीं सी चहकने वाली गौरेया अब कम ही घरों में दिखतीं हैं। मोबाइल टॉवरों की बढ़ती संख्या और जबरदस्त ध्वनि प्रदूषण ने इस मनोहारी पक्षी को खासा नुकसान पहुंचाया है। मोबाइल टॉवरों से निकलने वाली हानिकारक तरंगों और खेतों में बेतहाशा प्रयोग होने वाले कीटनाशकों ने इनकी आबादी को कम कर दिया है। 

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घटते जंगल और कटते पेड़ों ने भी इनका आशियाना छीना है। नतीजा ये है कि शहर से गांवों तक वो बहुत कम दिखती हैं। उनके इंतजार में दरख्त सूने हैं और आंगन में सन्नाटा है, खेत और खलिहान खाली हैं। सब इंतजार कर रहे हैं नन्हीं सी गौरैया फिर से झुंडो में आए और उड़ उड़ कर हर जगह को गुलजार कर दे। बीते कुछ सालों में लाेगों में इस परिंदे के लिए प्यार जागा है। लोग गौरैया को आश्रय देकर उन्हें बसाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसके नतीजे भी अच्छे आ रहे हैं। घर आंगन से छत तक फिर से इनकी आवाजाही शुरू हो गई है। 
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बदले वातावरण से हो रही विलुप्त
आधुनिकता की दौड़ में सीमेंट और कंक्रीट की इमारतें धड़ाधड़ बन रही हैं, इसके लिए पेड़ कट रहे हैं। खेत और खलिहान में भी निर्माण हो रहा है। चहुंओर वाहनों का शोर है। हर आधा किमी में कई-कई मोबाइल टॉवर खड़े हो गए। मोबाइल, टीवी और बिजली के साथ बेसिक फोन के तारों का मकड़जाल है। वायु प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। जिससे गौरैया को नुकसान हो रहा है  
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गौरैया के लिए नहीं कटने दिया पेड़
शहर के मोती मिल कंपाउंड निवासी अलका गर्ग के घर गौरैया का बसेरा है। वह बताती हैं कि पति उमेश गर्ग के साथ उनकी सुबह चिड़ियों की चहचहाहट से ही होती है। घर के आंगन में बड़े पेड़ हैं। इससे उनका पूरा घर ढ़क जाता है। तमाम लोगों ने उनसे पेड़ कटवाने को कहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी पेड़ पर गौरैया बैठती है। चिड़ियों ने घोंसले भी बना लिए हैं। यहां नियमित रूप से चिड़ियों को दाना-पानी दिया जाता है। उनके घर के आंगन, चाहरदीवारी, खिड़की सब जगह गौरैया दिखाई देती है। 

सुबह से होती है कलरव
गांधीनगर निवासी प्रीति वार्ष्णेय के परिवार की सुबह चिड़ियों के कलरव से होती है। उनके घर आंगन में सैकड़ों गौरैया आती है। जिससे मोहल्ला भी गुलजार है। नियमित रूप से वह चिड़ियों को दाना-पानी देती है। वह कहतीं हैं कि इससे बहुत खुशी मिलती है। 


पितरों की याद में बनाया पक्षी घर 
इगलास तहसील के गांव दुमेड़ी में एक परिवार ने अपने पितरों की याद में छह मंजिला पक्षी घर बना दिया है। जिसमें परिंदों के लिए छोटे छोटे 512 खंड हैं। सात लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण नवंबर 2021 में किया गया। गांव के देवकीनंदन शर्मा, रामनिवास शर्मा, रामहरि शर्मा, मुनेश शर्मा ने अपने पिता द्वारिका प्रसाद और माता शांति देवी की याद में इसको बनाया है। अब इसको देखने के लिए दूर दूर से लोग आ रहे हैं। चिड़ियों के बसने से गांव का वातावरण भी बदल रहा है। 

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