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विश्व गौरैया दिवस : आइए, मिलकर लौटाएं गौरैया का गौरव

Sat, 20 Mar 2021 12:44 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Mar 2021 12:44 AM IST
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World Sparrow Day
गौरैया। - फोटो : CITY OFFICE
इकराम वारिस
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छत पे दाना पानी जो मिल जाएगा, एक परिंदा मीठे गीत सुनाएगा। मगर, ऐसा सुनने को नहीं मिला रहा है, क्योंकि कंक्रीट के जंगल और मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगें उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन गई हैं। इसलिए इसका जिक्र विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर करना लाजिमी है, जो अपने कुनबे को बचाने लिए जद्दोजहद कर रही है। एएमयू के वाइल्डलाइफ साइंसेज विभाग के प्रोफेसर अफीफुल्लाह खान का कहना है कि अगर इनके बचाव को लेकर नहीं चेते तो निकट भविष्य में गौरैया का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। आने वाली पीढ़ियां केवल गौरैया को किताबों में पढ़ेगी। सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि गौरैया का गौरव लौटाएं, ताकि फिर आंगन व छत पर गौरैया फुदकती नजर आए।
गौरैया घरों में बनाती हैं घोंसले
गौरैया सामान्यत: घरों में घोंसले बनाती हैं। मसलन, छप्पर, झरोखा, बंद पंखा, छत की लकड़ी, खपरैल को अपना आशियाना बनाती हैं।
इन पेड़ों पर भी होता है घरौंदा
गौरैया घने पेड़ बबूल, कनेर, नींबू, अमरूद, अनार आदि पेड़ों को पसंद करती हैं।
ऐसे बढ़ेगा गौरैया का कुनबा
- गर्मी का मौसम चल रहा है। इसलिए घर की छत पर, पार्कों व बालकनी में बर्तन में दाना-पानी भरकर रखें।
- प्रजनन के समय उनके अंडों की सुरक्षा करें।
- घर के बाहर ऊंचाई व सुरक्षित जगह लकड़ी के घोंसले लटका सकते हैं।
- आंगन व पार्कों में कनेर, नींबू, अमरूद, अनार, मेहंदी, बांस, चांदनी आदि के पौधे लगाएं।
ये भी जानें
विलुप्त हो रही गौरैया को बचाने के लिए वर्ष 2010 से हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। गौरैया को झुंड में रहना पसंद है। भोजन के लिए गौरैैया का एक झुंड करीब दो मील की दूरी तय करता है। गौरैया की लंबाई 14 से 16 सेंटीमीटर होती है, जबकि इसका वजन 25 से 32 ग्राम तक होता है।
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देश की गौरैया से मॉरीशस की गौरैया तंदुरुस्त
मॉरीशस में परिंदों को लेकर ज्यादा संजीदगी है। वहां होटल, रेस्टोरेंट व पार्कों में नाश्ता-भोजन कर रहे लोग परिंदों के लिए भोजन डाल देते हैं। मैं दावे से कह सकता हूं कि मॉरीशस की गौरैया यहां की गौरैया से सवा गुना तंदुरुस्त हैं। मैंने अपने घर पर परिंदों के लिए घोंसला बना रखा है। अगर परिंदों को पता चल जाए कि घर में उसके दाना-पानी का इंतजाम है तो वह आपका दोस्त हो जाएगा।
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- जॉनी फॉस्टर, पक्षी प्रेमी
गौरैया को संरक्षित करने की आवश्यकता
गौरैया विलुप्त होने के कगार पर है। कुछ लोग उसके संरक्षण का प्रयास कर रहे हैं। गौरैया संरक्षण के लिए कार्य कर रहे सुबोधनंदन शर्मा की कमी खल रही है, जो एक मामले में एक साल से जेल में हैं। इस कारण यहां पर गौरैया के संरक्षण पर ज्यादा काम नहीं हो पा रहा है।
- डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा, अध्यक्ष, उड़ान सोसाइटी
तरंगें डालती हैं गौरैया के प्रजनन पर प्रभाव
गौरैया एक छोटी प्रजाति की चिड़िया है। यह एशिया, अमेरिका, यूरोप के कई देशों में पाई जाती है। गौरैया को घरेलू चिड़िया यानी हाउस स्पैरो भी कहा जाता है। कंक्रीट जंगल बनने से, प्राकृतिक जंगल घटने से, मोबाइल टावर की तरंगों से भारत ही नहीं, बल्कि विदेश में भी गौरैैया की तादाद में गिरावट आ रही है। गौरैया की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें एक हाउस स्पैरो भी है, जिसे गौरैया कहा जाता है। गौरैया की संख्या कितनी है, इसकी गणना अभी तक नहीं हो पाई है। जिस अनुपात में पहले गौरैया दिखती थीं, उस अनुपात से नहीं दिख रही हैं। मोबाइल टावर की तरंगें गौरैया के प्रजनन में प्रभाव डालती हैं, जैसे गिद्ध व हुदहुद के साथ हुआ है। अगर ऐसी स्थिति रही है तो निकट भविष्य में गौरैया को देख पाना मुश्किल होगा।

- प्रोफेसर अफीफुल्लाह खान, वाइल्डलाइफ साइंसेज, एएमयू

जॉनी फॉस्टर

जॉनी फॉस्टर- फोटो : CITY OFFICE

प्रोफेसर अफीफुल्लाह खान।

प्रोफेसर अफीफुल्लाह खान।- फोटो : CITY OFFICE

डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा।

डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा।- फोटो : CITY OFFICE

 गौरेया ।

गौरेया ।- फोटो : CITY OFFICE

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