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विश्व हृदय दिवसः इस नाजुक ‘दिल’ का जरा ख्याल रखिए
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प्रो. एमयू रब्बानी।
- फोटो : CITY OFFICE
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कौशल कुमार ओझा
बुजुर्ग ही नहीं युवा भी नाजुक दिल का ख्याल रखें। 50 प्रतिशत हार्ट अटैक से पीड़ित लोगों की उम्र 50 वर्ष से कम की होती है। इसमें 25 प्रतिशत 40 वर्ष से कम उम्र के होते हैं।
जेएन मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ कार्डियोलॉजी के चेयरमैन एवं कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया यूपी चैप्टर के निर्वाचित अध्यक्ष प्रो. एमयू रब्बानी का कहना है कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय उपमहाद्वीप में हृदयरोग दस साल पहले होता है और ज्यादा गंभीर होता है। प्रो. रब्बानी कहते हैं कि युवाओं में हृदय रोग तेजी से बढ़ रहा है। 30 साल या उससे कम उम्र के युवक भी हृदय रोग से पीड़ित हैं। वह कहते हैं कि 30 प्रतिशत मौत हृदय रोग से होती हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसके सिंघल (एमडी मेडिसिन/डिप्लोमा इन कार्डियोलॉजी) कहते हैं कि अस्पताल में रोज 50 से 100 के बीच हृदय से संबंधित बीमारियों के मरीज आते हैं। युवा भी हृदय रोग से पीड़ित हो रहे हैं।
क्या है कारण...
प्रो. एमयू रब्बानी कहते हैं कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल, स्मोकिंग और फैमिली हिस्ट्री हृदय रोग के प्रमुख कारण हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक तनाव, निष्क्रिय जीवन एवं आहार भी बीमारी के लिए जिम्मेदार हैं।
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कैसे करें पहचान...
प्रो. रब्बानी कहते हैं कि सीने में दर्द और सांस फूल रही हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। जरूरी नहीं है कि हृदय रोग है, लेकिन चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए। इस दो लक्षण की पहचान कोई भी कर सकता है।
कैसे बचें हृदय रोग से...
प्रो. रब्बानी कहते हैं कि आदमी चाहे तो हृदय रोग से बच सकता है। यह प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में है। स्मोकिंग रोकना स्वयं के हाथ में है। तंबाकू उत्पाद का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके सेवन से हार्ट अटैक का खतरा 4 से 5 गुना तक बढ़ जाता है। हम डायबिटीज, बीपी एवं कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल कर सकते हैं। नियमित चेक कराते रहें और दवा लेते रहने से यह नियंत्रित रहता है। हृदय रोग से बचने के लिए नियमित व्यायाम करें। यह ध्यान रखें कि अत्यधिक व्यायाम फायदा नहीं करता है। व्यायाम का मतलब टहलना, हल्का शारीरिक व्यायाम एवं साइकिलिंग आदि है।
हृदय रोगियों को अवश्य लगवाना चाहिए टीका
प्रो. रब्बानी कहते हैं कि हृदय रोगियों को कोविड से बचाव के लिए टीका जरूर लगवाना चाहिए। बाईपास सर्जरी करा चुके मरीज और स्टैंट लगवा चुके मरीज भी कोविड टीका लगवाएं। यह उनके लिए बहुत फायदेमंद है। हृदय रोगियों को कोविड से ज्यादा खतरा है। इसलिए टीकाकरण जरूरी है।
हृदय रोगियों के उपचार के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज में हर सुविधा उपलब्ध है। मरीज उसका लाभ उठा सकते हैं। चेकअप, स्टैंट से लेकर बाईपास सर्जरी तक की उच्च स्तरीय सुविधा मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है।
- प्रो. एमयू रब्बानी, चेयरमैन, डिपार्टमेंट ऑफ कार्डियोलॉजी, जेएन मेडिकल कॉलेज
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में आईसीसीयू नहीं है। एंजियोग्राफी, एंजियाप्लास्टी एवं इको डापलर आदि की सुविधा नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सक एवं स्टाफ नहीं है। गंभीर मरीज को रेफर करना पड़ता है।
- डॉ. एसके सिंघल, वरिष्ठ परामर्शदाता, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय
मानसिक तनाव, निष्क्रिय जीवन और फूड हैबिट की वजह से 40 वर्ष से कम उम्र के लोग भी हृदय रोग की चपेट में आ रहे हैं। पोस्ट कोविड मरीज भी हृदय रोग से संबंधित समस्याएं लेकर आए थे।
- डॉ. नितिन वार्ष्णेय, हृदय रोग विशेषज्ञ
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बुजुर्ग ही नहीं युवा भी नाजुक दिल का ख्याल रखें। 50 प्रतिशत हार्ट अटैक से पीड़ित लोगों की उम्र 50 वर्ष से कम की होती है। इसमें 25 प्रतिशत 40 वर्ष से कम उम्र के होते हैं।
जेएन मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ कार्डियोलॉजी के चेयरमैन एवं कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया यूपी चैप्टर के निर्वाचित अध्यक्ष प्रो. एमयू रब्बानी का कहना है कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय उपमहाद्वीप में हृदयरोग दस साल पहले होता है और ज्यादा गंभीर होता है। प्रो. रब्बानी कहते हैं कि युवाओं में हृदय रोग तेजी से बढ़ रहा है। 30 साल या उससे कम उम्र के युवक भी हृदय रोग से पीड़ित हैं। वह कहते हैं कि 30 प्रतिशत मौत हृदय रोग से होती हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसके सिंघल (एमडी मेडिसिन/डिप्लोमा इन कार्डियोलॉजी) कहते हैं कि अस्पताल में रोज 50 से 100 के बीच हृदय से संबंधित बीमारियों के मरीज आते हैं। युवा भी हृदय रोग से पीड़ित हो रहे हैं।
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क्या है कारण...
प्रो. एमयू रब्बानी कहते हैं कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल, स्मोकिंग और फैमिली हिस्ट्री हृदय रोग के प्रमुख कारण हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक तनाव, निष्क्रिय जीवन एवं आहार भी बीमारी के लिए जिम्मेदार हैं।
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कैसे करें पहचान...
प्रो. रब्बानी कहते हैं कि सीने में दर्द और सांस फूल रही हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। जरूरी नहीं है कि हृदय रोग है, लेकिन चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए। इस दो लक्षण की पहचान कोई भी कर सकता है।
कैसे बचें हृदय रोग से...
प्रो. रब्बानी कहते हैं कि आदमी चाहे तो हृदय रोग से बच सकता है। यह प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में है। स्मोकिंग रोकना स्वयं के हाथ में है। तंबाकू उत्पाद का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके सेवन से हार्ट अटैक का खतरा 4 से 5 गुना तक बढ़ जाता है। हम डायबिटीज, बीपी एवं कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल कर सकते हैं। नियमित चेक कराते रहें और दवा लेते रहने से यह नियंत्रित रहता है। हृदय रोग से बचने के लिए नियमित व्यायाम करें। यह ध्यान रखें कि अत्यधिक व्यायाम फायदा नहीं करता है। व्यायाम का मतलब टहलना, हल्का शारीरिक व्यायाम एवं साइकिलिंग आदि है।
हृदय रोगियों को अवश्य लगवाना चाहिए टीका
प्रो. रब्बानी कहते हैं कि हृदय रोगियों को कोविड से बचाव के लिए टीका जरूर लगवाना चाहिए। बाईपास सर्जरी करा चुके मरीज और स्टैंट लगवा चुके मरीज भी कोविड टीका लगवाएं। यह उनके लिए बहुत फायदेमंद है। हृदय रोगियों को कोविड से ज्यादा खतरा है। इसलिए टीकाकरण जरूरी है।
हृदय रोगियों के उपचार के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज में हर सुविधा उपलब्ध है। मरीज उसका लाभ उठा सकते हैं। चेकअप, स्टैंट से लेकर बाईपास सर्जरी तक की उच्च स्तरीय सुविधा मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है।
- प्रो. एमयू रब्बानी, चेयरमैन, डिपार्टमेंट ऑफ कार्डियोलॉजी, जेएन मेडिकल कॉलेज
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में आईसीसीयू नहीं है। एंजियोग्राफी, एंजियाप्लास्टी एवं इको डापलर आदि की सुविधा नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सक एवं स्टाफ नहीं है। गंभीर मरीज को रेफर करना पड़ता है।
- डॉ. एसके सिंघल, वरिष्ठ परामर्शदाता, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय
मानसिक तनाव, निष्क्रिय जीवन और फूड हैबिट की वजह से 40 वर्ष से कम उम्र के लोग भी हृदय रोग की चपेट में आ रहे हैं। पोस्ट कोविड मरीज भी हृदय रोग से संबंधित समस्याएं लेकर आए थे।
- डॉ. नितिन वार्ष्णेय, हृदय रोग विशेषज्ञ