फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   World Environment Protection day

उधारी के ऑक्सीजन पर चल रही हैं हम सबकी सांसें

Thu, 26 Nov 2020 01:12 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Nov 2020 01:12 AM IST
विज्ञापन
World Environment Protection day
अंडला के जंगल। - फोटो : CITY OFFICE
कौशल कुमार ओझा
विज्ञापन

गंगा एवं यमुना नदी के दोआब में स्थित अलीगढ़ जनपद के निवासियों की सांसें उधारी के ऑक्सीजन पर चल रही है। जनपद में वन क्षेत्र 2 प्रतिशत से भी कम है, जबकि स्वस्थ पर्यावरण के लिए कुल क्षेत्रफल का 33 प्रतिशत होना चाहिए। जनपद की सीमा से प्रवाहित काली नदी गंगा एवं अलीगढ़ ड्रेन यमुना नदी को मैली कर रही हैं।
विशेषज्ञ कहते हैं कि वातावरण में ऑक्सीजन एवं कार्बन डाईऑक्साइड का संतुलन बनाए रखने के लिए क्षेत्रफल के 33 प्रतिशत क्षेत्र में वन होना चाहिए। अच्छी फसल के लिए बारिश जरूरी है और बारिश के लिए वन क्षेत्र। अलीगढ़ कृषि प्रधान जनपद है और यहां की आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियां इसी के इर्द-गिर्द घूमती हैं। जनपद के 40 लाख से अधिक नागरिकों के चेहरे पर मुस्कान लहलहाते फसलों को देखकर आती है। गांवों में अच्छी पैदावार होने पर शहर का व्यापार भी कई गुना बढ़ जाता है। शहर के आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कल-कारखाने दमघोटू हालात उत्पन्न कर रहे हैं। अत्यधिक मात्रा में रसायन के प्रयोग एवं प्रदूषण के कारण दोआब क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी बंजर एवं बीमार होती जा रही है। विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस पर यह चिंता लोगों की जुबां पर है।
विज्ञापन

जनपद में वन क्षेत्र बहुत कम है। इससे वातावरण में ऑक्सीजन एवं कार्बन डाईऑक्साइड का संतुलन बिगड़ रहा है। सड़क के दोनों ओर व्यापक स्तर पर बड़ी पत्ती वाले पौधे लगाने की जरूरत है, जिसमें धूल बाध्यकारी क्षमता, डस्ट बाइडिंग कैपेसिटी हो। छोटी पत्ती पर धूल ज्यादा देर नहीं रुक पाती है। प्रदूषण बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है। - डॉ. मुकेश भारद्वाज, वनस्पति विज्ञान, डीएस कॉलेज।
विज्ञापन
विज्ञापन

जनपद में वन क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का मात्र 1.8 प्रतिशत है। बावजूद इसके बेरहमी से पेड़ों एवं जंगलों को काटा जा रहा है। अंडला ताजा उदाहरण है। नदियां नाला बन गई हैं। वेटलैंड्स पर अवैध कॉलोनिया एवं घर बन रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए शासन-प्रशासन गंभीर नहीं है। समय रहते ध्यान नहीं दिए तो काले हिरण भी विलुप्त हो जाएंगे। - रंजन राना, प्रबंधक, पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति।

समय रहते नहीं चेते तो भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली एवं एनसीआर की हालत हम लोग देख चुके हैं। प्रदूषण के कारण महामारी जैसे हालात भविष्य में आ सकते हैं। लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण के स्तर में बेहद सुधार देखने को मिला था। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के लिए शासन, प्रशासन के साथ-साथ जनभागीदारी बेहद जरूरी है। - रामगोपाल, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed