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विश्व साइकिल दिवस : साइकिल की सवारी, सेहत से है यारी

Fri, 03 Jun 2022 12:36 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2022 12:36 AM IST
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World Bicycle Day
प्रो. इरफान हबीब साइकिल चलाते हुए। - फोटो : CITY OFFICE
कोरोना काल के बाद हर कोई अपनी सेहत को लेकर फिक्रमंद है। कोई सुबह पार्क में दौड़ लगा रहा है तो कोई पैदल चल रहा है। सभी का मकसद खुद को सेहतमंद रखना है। इन्हीं में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो साइकिल चलाकर इस भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी सेहत को बरकरार रखे हैं। इसी के चलते शहर में रोजाना छोटी-बड़ी 250 साइकिलों की बिक्री हो रही है। वहीं, चिकित्सकों का भी कहना है कि स्वास्थ्य की दृष्टि से सुबह साइकिल चलाना लाभकारी होता है।
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आज विश्व साइकिल दिवस है। शहर के प्रमुख साइकिल विक्रेताओं का कहना है कि सेहत को लेकर सभी लोग फिक्रमंद हैं। यही कारण है कि लोगों का झुकाव साइकिल चलाने की तरफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शहर में रोजाना 250 साइकिलें बिक रही हैं, इनमें फैंसी, बच्चों और परंपरागत साइकिलें शामिल हैं। हालांकि, पहले के मुकाबले परंपरागत साइकिलों की बिक्री में गिरावट आई है। युवाओं में साइकिल चलाने का जुनून है और आधुनिक तकनीक व डिजाइन वाली साइकिलें खरीदते हैं।
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साइकिलें स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए युवा खरीद रहे हैं। बाजार में छह से 15 हजार रुपये की साइकिलें उपलब्ध हैं। युवाओं का जोर नई डिजाइन व तकनीक वाली साइकिलों पर रहता है।
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- एसएस गुप्ता चंचल, साइकिल विक्रेता
शहर में रोजाना 250 साइकिलों की बिक्री हो रही है। 15-20 फीसदी परंपरागत साइकिलें बिकती हैं। पहले इनकी मांग काफी होती थी। 30-35 फीसदी फैंसी साइकिलों की मांग बढ़ी है।
- प्रदीप कुमार वार्ष्णेय, साइकिल विक्रेता
पिछले 54 साल से साइकिल चला रहा हूं। हरदुआगंज से डीएस कॉलेज साइकिल से आता था। रोजाना 25 किलोमीटर साइकिल चलाता हूं। पहली साइकिल 1977 में 305 रुपये में ली थी। साइकिल चलाने से ही सेहतमंद हूं।
- पूरनचंद्र, हरदुआगंज
जिम में साइकिल चलाने की बजाय सुबह सड़क पर साइकिल चलाएं तो और बेहतर होगा। इससे लोगों को शुद्ध हवा मिलेगी। सुबह के वक्त वातावरण साफ रहता है। स्वास्थ्य के दृष्टि से साइकिल चलाने का बेहतर समय है।

- डॉ. प्रेक्षा राठी अग्रवाल, चिकित्सक
प्रो. इरफान हबीब को भी पसंद है साइकिल सवारी
प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब (90) ने पूरी जिंदगी साइकिल चलाई। वह एएमयू में रीडर व प्रोफेसर रहे। अब एमरिट्स प्रोफेसर हैं। बदरबाग से एएमयू तक वह साइकिल से आते आते थे। कामरेड शमीम अख्तर ने बताया कि कोरोना काल से पहले फरवरी 2020 तक प्रो. इरफान ने साइकिल का ही प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि कमजोरी होने के चलते उन्हें अब साइकिल चलाने से मना कर दिया गया है।
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