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विश्व एथलेटिक्स दिवस: कोई कोरियर बांट रहा तो कोई खेतों में कर रहा काम, होनहार बोले- सरकार मुहैया कराए संसाधन तो लगा देंगे पदकों की झड़ी
Sat, 07 May 2022 02:03 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 07 May 2022 02:03 AM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर अलीगढ़ जिले का नाम रोशन कर चुके खिलाड़ी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार संसाधन व सुविधाएं मुहैया कराए तो पदकों की झड़ी लगा सकते हैं।
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कोरियर बांटते संदीप पाठक, सिर पर बोरी रखे पूजा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एक तरफ सरकार खेलो इंडिया के तहत खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का काम रही है तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर अलीगढ़ जिले का नाम रोशन कर चुके खिलाड़ी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कोई कोरियर बांट रहा है तो कोई खेतों में काम कर अपना गुजारा कर रहा है। इससे उनकी प्रैक्टिस भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यदि सरकार संसाधन व सुविधाएं मुहैया कराए तो पदकों की झड़ी लगा सकते हैं। विश्व एथलेटिक्स दिवस पर ऐसे ही खिलाड़ियों पर खबर...
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आस : अंतरराष्ट्रीय धावक करना चाहते हैं देश का नाम रोशन
कभी अपनी रफ्तार से सबको पछाड़ने वाले गांव बादबामनी निवासी अंतरराष्ट्रीय धावक संदीप पाठक वर्तमान में आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। इनका गांव जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। वह वर्तमान में कोरियर कंपनी में काम करते हैं। इसी से उनका घर का खर्च चलता है।
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पिता रघुवीर दयाल शर्मा मजदूरी करते हैं। मां राजकुमारी देवी गृहिणी हैं। संदीप बताते हैं कि वर्ष 2017 में लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 200 व 400 मीटर में गोल्ड जीतकर जिले का नाम रोशन किया था। 2017 में दिसंबर में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता रिलायंस यूथ नेशनल में गोल्ड व सिल्वर मेडल जीता था। नेपाल में अंतरराष्ट्रीय एशियन गेम्स मीट में 400 मीटर में गोल्ड जीता था। बातचीत के दौरान उनका दर्द झलक आया, उन्होंने कहा कि यदि सरकार सुविधाएं और संसाधन दे तो वह देश के लिए और पदक जीत सकते हैं। आर्थिक तंगी के कारण वह प्राइवेट कंपनी में कोरियर ब्वॉय के तौर पर काम कर रहे हैं। इसकी वजह से उनकी प्रैक्टिस भी छूट गई है।
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दर्द : खेत से शुरू हुआ सफर, कहीं खेतों में ही न हो जाए खत्म
20 वर्षीय राष्ट्रीय खिलाड़ी पूजा कुमारी ऊंची कूद में माहिर हैं। वह जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित गांव सूरतगढ़ की निवासी हैं। पूजा बताती हैं कि उनका सफर अतरौली के खेतों से ही शुरू हुआ था और अब वहीं खत्म होता दिख रहा है। आर्थिक तंगी की वजह से वह अपने खेल को आगे नहीं बढ़ा पा रही हैं।
पूजा ने 2021 में लखनऊ में आयोजित राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर जिले का नाम रोशन किया था। मेरठ में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता था। लखनऊ, भोपाल, विजयवाड़ा सहित कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के साथ ही मेडल जीते। वर्ष 2022 में भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी पूजा ने भाग लिया। लेकिन इस बार उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया और उनकी सभी प्रतियोगिता रद्द हो गई। अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने बीएचयू स्थित साई हॉस्टल में दाखिला लिया। प्रैक्टिस के अभाव में उनकी जिला वापसी हो गई। अब वह खेतों में काम करने के दौरान ही प्रैक्टिस करती हैं। सरकार से यही आस है कि खिलाड़ियों की स्थिति पर ध्यान दें, जिससे वह देश का नाम रोशन कर सकें।
अपने दम पर इन खिलाड़ियों ने जिले का नाम रोशन किया है। एसोसिएशन का प्रयास रहता है कि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देकर आगे बढ़ाया जाए। मंडल होने के बाद भी यहां खेलो इंडिया का सेंटर नहीं हैं। लेकिन कासगंज में इसका सेंटर बनाया गया है। कोच के अभाव खिलाड़ियों दिल्ली व हरियाणा का रुख करना पड़ता है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को परेशानी होती है। अलीगढ़ में खिलाड़ी होने के बावजूद भी यहां सेंटर नहीं है। -शमशाद निसार आजमी, संयुक्त सचिव, यूपी एथलेटिक्स संघ