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याद आएंगे मुद्राराक्षस और उनकी बेबाक रचनाएं

Tue, 14 Jun 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 14 Jun 2016 01:48 AM IST
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Will miss his straightforward compositions Mudrarakshasa
मुद्राराक्ष्‍ास - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
वरिष्ठ उपन्यासकार, स्तंभ लेखक, नाटक और व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर मुद्राराक्षस का सोमवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। जानेमाने साहित्यकारों ने उनकी यादें साझा की। अलीगढ़ में 1986 में जनवादी लेखक संघ की तीन दिवसीय कार्यशाला में उनकी उपस्थिति यहां के साहित्यकारों की स्मृति में आज भी दर्ज है।
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मुद्राराक्षस से मेरी आत्मीयता बहुत रही। वह गरीबों के लिए पूरी जिंदगी काम करते रहे, जिनकी आवाज हमेशा दबाई जाती है। वह उपन्यास, नाटक, व्यंग्य, आलोचना में बहुत अच्छे हस्ताक्षर रहे हैं। मुद्राराक्षस लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से हमने एक अच्छे दोस्त को खो दिया है। साहित्य जगत में उनका एक अलग स्थान हमेशा बना रहेगा। उनकी कई कृतियां कालजयी हैं।  
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- गोपालदास नीरज, पद्मविभूषण।

1986 जनवादी लेखक संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम में वह अलीगढ़ में  आये थे। एएमयू के एनएसआरसी क्लब में हुई बैठकों में देश भर से तकरीबन 70 जानेमाने कवि, कहानीकार, लेखक शामिल हुए थे। मुद्राराक्षस ने तीन दिन तक अपने स्पष्ट और बेबाक विचारों से सभी को प्रभावित किया। उन्होंने हमेशा अपने साहित्य में उन लोगों को तरजीह दी। जो दलित शोषित पीड़ित थे और सांप्रदायिक वातावरण में दबे हुए थे। अपने साहित्य में भारतीय समाज में आम आदमी की समस्याओं को उन्होंने मजबूती से उठाया है।
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-नमिता सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार।
ये उस पीढ़ी और उन मूल्यों के लेखक है जो स्पष्टता ईमानदारी, मुखरता और साहसिक लेखन के लिए जाने जाते हैं। सीधे सीधे मिलना नहीं हुआ लेकिन बातचीत होती रही। सामाजिक समस्याओं और निर्बल निर्धन वर्ग के हितों के रक्षक के रूप में वह जाने जाते रहे। आजादी के बाद सक्रिय लेखकों में उनका नाम भी शामिल हैं। उनके निधन से निर्बल वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाला एक बड़ा साहित्यकार खो दिया है। उन्होंने पत्र पत्रिकाओं में बहुत चर्चित स्तंभ भी लिखे हैं।

-प्रेम कुमार, वरिष्ठ साहित्यकार

मुद्राराक्षस गरीबों के हीरो थे। जिन्होंने पूरे जीवनकाल में सांप्रदायिकता का शिकार, गरीबी से लाचार, वक्त से मारे गए लोगों की आवाज को मुखरता से उठाया। इतना निष्पक्ष और प्रभावी लेखन का साहस बहुत कम साहित्यकारों ने दिखाया है। वह अपनी स्पष्टवादिता और शब्दों के चयन के लिए जाने जाते हैं।
-सुरेश कुमार, साहित्यकार।
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