परिवार न्यायालय: पति के पैसे से ही पति के खिलाफ, अलग होने के लिए लड़ रहीं लड़ाई
गुजारा भत्ते में मिल रही धनराशि से महिलाएं अपनी पत्नी के खिलाफ मुकदमा लड़ रही हैं। वह पति से अलग होना चाहती हैं। कानून के जानकार कहते हैं कि इनमें से कुछ मामलों में तो प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
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विस्तार
अलीगढ़ दीवानी परिसर स्थित परिवार न्यायालय में चल रहे भरण पोषण के करीब 15 हजार मुकदमों में से 12000 मामले ऐसे हैं जिनमें महिलाओं को जीवन यापन के लिए अदालत के आदेश पर गुजारा भत्ता मिल रहा है। इस भत्ते के अलावा इनके पास आय का कोई साधन भी नहीं है। अब इसी पैसे से यह महिलाएं अपने पति को सजा दिलाने के लिए या फिर उससे अलग होने के लिए मुकदमा लड़ रही हैं। कानून के जानकार कहते हैं कि इनमें से कुछ मामलों में तो प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
इसको व्यवस्था की विसंगति ही कहा जा सकता है। इसके अलावा कुछ नहीं। अब समय आ गया है कि प्रावधानों पर फिर से विचार मंथन किया जाए क्योंकि स्थितियां, समाज और मान्यताएं तेजी से बदली हैं। - दिनेश कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता
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यह देखा गया है कि 80 फीसदी मामलों में आरोप गलत होते हैं। इस बात की निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए कि कानून का दुरुपयोग नहीं हो।- जितेंद्र सिंह, जिला शासकीय अधिवक्ताविज्ञापन विज्ञापन
केस-1
एक साल में ही दांपत्य जीवन में घुली कड़वाहट
शहर की रहने वाली एक युवती की शादी पांच वर्ष पहले लखनऊ के एक युवक के साथ हुई थी। एक साल भी पूरा नहीं हुआ और दोनों के दांपत्य जीवन में कड़वाहट घुल गई। युवती अपने मायके आ गई। यहां पर गुजारा भत्ता के लिए अपील की और अब गुजारा भत्ता पा रही है। साथ ही केस भी चल रहा है।
केस-2
मायके आकर डाल दिया भरण पोषण का दावा
चार साल पहले सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद युवती ने शादी कर ली। परिवार वालों ने पहले ना नुकर की फिर मान गए। डेढ़ साल बाद युवती ने ससुराल वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। इसके बाद युवती मायके आ गई और घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न के साथ भरण पोषण का दावा डाला था। अब उसे गुजारा भत्ता मिलने लगा है।
केस -3
संयुक्त परिवार में रहना पसंद नहीं था, केस डाला
शहर के एक व्यापारी की बेटी की शादी दूसरे राज्य में हुई। शादी बेहद शानदार रही। शादी के बाद ससुराल में संयुक्त परिवार में रहने को लेकर पति पत्नी में मतभेद रहने लगे। नतीजा पत्नी ने दहेज के लिए उत्पीड़न, हिंसा आदि के आरोप लगाते हुए मायके आकर मुकदमा दर्ज करा दिया। मामला संबंध बिच्छेद तक आ गया है। गुजारा भत्ता के रूप में मोटी रकम हासिल की जा रही है।
मायके में रहने का विरोध किया तो पति को बना डाला आरोपी
केस-4
मायके में रहने का विरोध किया तो पति को बना डाला आरोपी
शादी के तीन साल गुजर जाने पर जब पित ने अधिकांश समय मायके में रहने का विरोध किया और पत्नी को अपना घर संभालने के लिए दबाव डाला तो पति पर उत्पीड़न करने, दूसरी महिला से संबंध होने का आरोप लगा दिया। पत्नी ने गुजारा भत्ता हासिल करने का दावा डाला है।