UP: अलीगढ़ AMU में पश्चिम बंगाल की छात्रा की संदिग्ध परिस्थिति में मौत, विश्वविद्यालय प्रशासन में मचा हड़कंप
खाना खाने के बाद इर्तिका अपने कमरे में चली गई। उसके साथ रहने वाली एक छात्रा कुछ देर बाद अपनी सहेली के कमरे में चली गई। बाद में जब वह वापस लौटी तो उसने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के इंदिरा गांधी हॉल में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा इर्तिका समीर (19) ने फंदे पर लटक कर जान दे दी। छात्रा हॉल के कमरा नंबर-19 में रहती थी। मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले की रहने वाली थी। वह दर्शनशास्त्र की छात्रा थी। आत्महत्या करने की वजह पारिवारिक समस्या बताई जा रही है।
मंगलवार रात करीब आठ बजे खाना खाने के बाद इर्तिका अपने कमरे में चली गई। उसके साथ रहने वाली एक छात्रा कुछ देर बाद अपनी सहेली के कमरे में चली गई। बाद में जब वह वापस लौटी तो उसने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। उसे लगा कि इर्तिका सो गई है, इसलिए वह अपनी सहेली के कमरे में लौट गई। रात करीब एक बजे इर्तिका की मां का हावड़ा की रहने वाली एक छात्रा के पास फोन आया। मां ने बताया कि वह इर्तिका को लगातार फोन कर रही हैं, लेकिन वह फोन नहीं उठा रही। इसके बाद छात्रा ने इर्तिका के कमरे का दरवाजा खटखटाया।
जवाब नहीं मिलने पर उसने खिड़की से अंदर देखा तो इर्तिका फंदे पर झूल रही थी। उसने अन्य छात्राओं को सूचना दी। कुछ ही देर में हॉल की छात्राएं और वार्डन मौके पर पहुंच गईं। घटना की सूचना प्रोवोस्ट और प्रॉक्टर को दी गई। पुलिस को भी जानकारी दी गई। करीब रात 1:30 बजे पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रा को कमरे से बाहर निकालकर जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलने पर एएमयू की कुलपति प्रो. नईमा खातून भी रात करीब 3:30 बजे इंदिरा गांधी हॉल पहुंचीं और घटनाक्रम की जानकारी ली। प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान ने बताया कि घटना के बाद इर्तिका के माता-पिता को जानकारी दे दी गई थी। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। बुधवार शाम करीब पांच बजे शव को एंबुलेंस में लेकर हावड़ा ले गए।
बेटी का शव लेने पहुंचे पिता रोते रहे, मां एकटक निहारती रही
बेटी इर्तिका समीर की मौत की खबर ने उसके माता-पिता को भीतर तक तोड़ दिया। बुधवार को जब माता-पिता बेटी का शव लेने पहुंचे तो मेडिकल कॉलेज परिसर का माहौल भावुक हो गया। बेटी को अंतिम बार देखने के बाद पिता अपने आंसुओं को रोक नहीं सके। वह लगातार रोते रहे। वहीं मां पूरी तरह खामोश हो गई थीं। वह कुछ बोल नहीं सकीं और काफी देर तक एकटक अपनी बेटी को निहारती रहीं। आंखों के सामने बेटी का शव था और चेहरे पर ऐसा दर्द था, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था। पिता मोहम्मद समीर के अनुसार, बेटी 28 जुलाई को ही हावड़ा से यूनिवर्सिटी आई थी। ब्यूरो
दो घंटे पहले हो चुकी थी मौत
छात्रा इर्तिका समीर की आत्महत्या के मामले में एक अहम जानकारी सामने आई है। डॉक्टरों के अनुसार, जब छात्रा को रात करीब 1:30 बजे जेएन मेडिकल कॉलेज लाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार उसकी मौत इससे करीब दो घंटे पहले हो चुकी थी। ब्यूरो
रात 8:30 बजे बेटी से आखिरी बार बात हुई
रात करीब 8:30 बजे मां ने बेटी से आखिरी बार बात की थी। उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बातचीत उनकी जिंदगी की सबसे आखिरी बातचीत बन जाएगी। इसके कुछ घंटे बाद हावड़ा में बैठे माता-पिता को ऐसी खबर मिली, जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। जिस बेटी की आवाज कुछ देर पहले तक फोन पर सुनाई दे रही थी, वह अब इस दुनिया में नहीं थी। मां-बेटी के बीच क्या बात हुई थी। यह तो बेटी बता सकती थी, जो अब दुनिया में नहीं है या मां बता सकती है, जो सदमे में है। इर्तिका अक्सर अपनी सहेलियों से पारिवारिक समस्याओं का जिक्र करती थी। जब वह परेशान होती थी तो उसकी सहेलियां पूछती थीं, क्या बात है तो वह पारिवारिक समस्याएं बताकर उन्हें शांत कर देती थी।
एएमयू में आत्महत्या की घटनाएं
- 16 अक्तूबर 2019 को एएमयू के आफताब हॉल के मुमताज हॉस्टल के एक छात्र ने की थी आत्महत्या
- 21 फरवरी 2025 को एएमयू के मुमताज हॉस्टल के छात्र ने जान दी थी।
- 25 अक्तूबर 2025 को एएमयू के वीमेंस कॉलेज के हॉस्टल में छात्रा ने की थी खुदकुशी
- 12 जनवरी 2026 को एएमयू के एसएन हॉस्टल में छात्रा ने की थी आत्महत्या
15 अगस्त के बाद मनाया जाएगा एंटी सुसाइड वीक
15 अगस्त के बाद आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एंटी सुसाइड वीक मनाया जाएगा। अभियान के दौरान युवाओं और विद्यार्थियों को तनाव, भावनात्मक परेशानियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
तनाव से जूझ रहे विद्यार्थियों के लिए बनी थी सेल, 25 छात्रों की हुई काउंसिलिंग
विद्यार्थियों को मानसिक तनाव और विभिन्न व्यक्तिगत समस्याओं से उबरने में मदद देने के उद्देश्य से पिछले वर्ष एएमयू के मनोविज्ञान विभाग में विशेष काउंसिलिंग सेल की स्थापना की गई थी। मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने बताया कि सेल में पिछले वर्ष करीब 25 विद्यार्थी पहुंचे थे। ये विद्यार्थी अलग-अलग तरह की समस्याओं और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। उनकी व्यक्तिगत स्तर पर काउंसिलिंग की गई और उनकी परेशानियों को समझते हुए आवश्यक मनोवैज्ञानिक सहयोग प्रदान किया गया।
मन की बात दबाएं नहीं, अपनों से साझा करें : प्रो. शाह आलम
एएमयू के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने कहा कि विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई, भविष्य, रिश्तों और व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी कई तरह की चुनौतियां आती हैं। ऐसे में अगर किसी विद्यार्थी को महसूस हो कि वह किसी बात को लेकर परेशान है या मानसिक दबाव महसूस कर रहा है, तो उसे अपनी बात किसी भरोसेमंद व्यक्ति तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। वह अपने शिक्षक, दोस्त, सहेली, वार्डन या प्रोवोस्ट से जरूर बात करें। विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि परेशानी के समय मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है। प्रो. शाह आलम ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों से लगातार संपर्क में रहना चाहिए। केवल पढ़ाई और परीक्षा के बारे में पूछने के बजाय बच्चों से यह भी जानना चाहिए कि वह अंदर से कैसा महसूस कर रहे हैं।