Aligarh: 10 हजार लोगों का वजन 100 के पार, बीमारियां कर रहीं वार, तीन फीसदी विद्यार्थी रक्तचाप के शिकार
आईएपी के अध्यक्ष डॉ. विकास मेहरोत्रा ने कहा कि जिले में 10 हजार लोग मोटापे के शिकार हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से 2025 तक उनके क्लीनिक पर आने वाले विद्यार्थियों का अध्ययन किया है।
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अलीगढ़ जिले में 10 हजार लोगों का वजन 100 किलो से पार हो गया है। उन पर बीमारियां प्रहार कर रही हैं। डॉक्टरों का भी मानना है कि 100 किलो से ज्यादा वजन सेहत के लिए परेशानी का सबब है। यह खुलासा पिछले पांच साल के अध्ययन में हुआ है।
जिले की आबादी करीब 42 लाख है। अनियमित जीवनशैली, व्यायाम से दूरी बनाना शरीर के वजन को बढ़ा रही है। आईएपी के अध्यक्ष डॉ. विकास मेहरोत्रा ने कहा कि जिले में 10 हजार लोग मोटापे के शिकार हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से 2025 तक उनके क्लीनिक पर आने वाले विद्यार्थियों का अध्ययन किया है।
तीन प्रतिशत विद्यार्थी उच्च रक्तचाप की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोटापे से जंग जीतनी है, तो पौष्टिक आहार का सेवन करना होगा। फास्ट फूड, चिकनाई युक्त भोजन और मिठाई से दूरी बनानी होगी। मोटापे मधुमेह और हृदय रोग की संभावना भी बढ़ रही है।
अनियमित खान-पान व दिनचर्या से शरीर में मोटापा छा गया था। इससे कई तरह की बीमारियां उन्हें परेशान करने लगी थी। अब मोटापे को कम करने के लिए नियमित दवाओं का सेवन करने के साथ योग क्रिया, सुबह घूमा कर रहे हैं।- राजकुमार शर्मा, बांके विहारी काॅलोनी
बाजार के खान-पान से शरीर में मोटापा आ गया था। थोडा सा चलने में ही सांसें फूलने लग जाती थी। काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। चिकित्सक के बताए अनुसार दवाओं के साथ ही खान-पान का बदलाव किया है। इससे पिछले कई महीने से लगातार वजन कम हो रहा है।- प्रदीप गुप्ता, इंदिरानगर, खैर बाईपास रोड
दवाओं से कम नहीं होगा वजन
डॉ. प्रदीप बंसल ने कहा कि जो मोटापे से परेशान हैं, वह टीवी पर बताए जाने वाले दवाओं को सेवन करते हैं, जिससे उनका वजन कम होने के बजाय स्वास्थ्य खराब हो जाता है। दवाओं से मोटापा खत्म नहीं होता है।
80 किलो का व्यक्ति अगर सक्रिय है तो उसे मोटापा नहीं कह सकते : प्रो. रूबी
मोटापे की जांच करने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तिब्बिया कॉलेज में खास तौर से कैंप लगाया गया है। इसमें यह आकलन किया गया कि आज के समय में मोटापे की परिभाषा में क्या शामिल हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति 80 किलो का है और अपनी सभी गतिविधियां सक्रियता के साथ कर रहा है तो उसे मोटापे की परिभाषा में सीमित नहीं किया जा सकता है।
शिविर में 250 से अधिक लोग आए, जिन्होंने विभिन्न स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। जूनियर रेजिडेंट ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए गुणवत्तापूर्ण जीवनशैली पर मार्गदर्शन किया। एएमयू के यूनानी चिकित्सा संकाय के तहफ्फुजी वा समाजी तिब (निवारक एवं सामाजिक चिकित्सा) विभाग ने भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए जनजातीय आयुष जागरूकता अभियान के तहत स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया। शिविर में विभाग की अध्यक्ष प्रो. रूबी अंजुम, डॉ. हशमत उस्मानी, डॉ. अम्मार इब्ने अनवर आदि मौजूद रहे।