अलीगढ़: सड़क पर न हनुमान चालीसा और न ही हो सकेगी नमाज
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त्योहारों को छोड़कर आम दिनों में सड़कों पर बगैर अनुमति न हनुमान चालीसा हो सकेगा और न ही नमाज हो सकेगी। एडीएम सिटी से वार्ता के दौरान विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने सहमति दे दी है। हालांकि ईद, बकरीद और अलविदा जुमे की परंपरागत नमाज पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। खास बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण बैठक से मुस्लिम धर्मावलंबियों और अन्य हिंदू संगठनों ने दूरी बनाए रखी।
सड़कों पर हनुमान चालीसा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर डीएम द्वारा लगाई गई रोक के बाद विहिप के एक नेता ने डीएम को अपशब्द कहे थे। इसके बाद यह मामला गरमा गया। इस मामले में एडीएम सिटी ने मंगलवार को हिंदू और मुस्लिम धर्मावलंबियों की बैठक बुलाई थी। बैठक में विहिप के नेता तो पहुंचे, लेकिन मुस्लिम धर्मावलंबियों और हिंदुओं के अन्य संगठनों अखिल भारत हिंदू महासभा और हिंदू जागरण मंच के नेताओं ने बैठक से दूरी बनाए रखी।
उनके कर्ताधर्ताओं का कहना था कि हमें बैठक की कोई सूचना ही नहीं थी। विहिप नेता इंद्रपाल ने बताया कि परंपरागत ईद, बकरीद और अलविदा जुमे की नमाज सड़कों पर पढ़े जाने पर संगठन को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन आम दिनों में नमाज सड़कों पर नहीं होनी चाहिए। हिंदू त्योहारों पर भी भक्त सड़कों पर महाआरती समेत अन्य आयोजन करते हैं। यह विशेष परिस्थिति है। शासन ने आम दिनों में कोई भी धार्मिक आयोजन सड़क पर न करने का आदेश दिया है। हम इससे सहमत हैं।
इस मौके पर महानगर संयोजक गौरव शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष शेखर शर्मा, उपाध्यक्ष मयंक, मीडिया प्रभारी विशाल देशभक्त, संपर्क प्रमुख मोनू शर्मा एवं सह संयोजक प्रवीण शर्मा आदि उपस्थित थे। एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी ने स्वीकार किया कि संगठन त्योहारों को छोड़कर आम दिनों में सड़कों पर धार्मिक क्रियाकलाप न करने पर सहमत हैं।
'हिंदुओं को नाराज कर सड़कों पर इबादत नहीं'
पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह ने कहा है कि हम हिंदू भाईयों को नाराज कर सड़क पर नमाज नहीं पढ़ना चाहते हैं। परंपरागत ईद, बकरीद, अलविदा जुमे की नमाज से किसी को दिक्कत नहीं है। इस मामले में डीएम से मुलाकात करते हुए पूर्व विधायक ने दार्शनिक लहजे में कहा कि इबादत से अगर किसी को तकलीफ होती है तो इबादत का क्या फायदा। हम शासन के आदेश का पूरा सम्मान करते हैं।
आम दिनों में नमाज मस्जिद के अंदर ही पढ़ी जाएगी। जहां तक हनुमान चालीसा का सवाल है तो हिंदू भाई हमारी गली, सड़क, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, हवाई अड्डे या किसी भी स्थान पर हनुमान चालीसा पढ़े, हमें आपत्ति नहीं है। भगवान का नाम ही तो ले रहे हैं, अच्छा है। इससे भगवान खुश होंगे और प्राकृतिक आपदाओं से सभी की रक्षा करेंगे। जोर देकर कहा कि हम चैलेंज करने वाले नहीं हैं, हम प्रधानमंत्री मोदी के सबका साथ सबका विकास के नारे से सहमत हैं और हर तरह से शासन प्रशासन को सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
'मुसलमानों से ज्यादा हिंदू करते हैं सड़कों पर धार्मिक जलसे'
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के अलीगढ़ मंडल अध्यक्ष डा. रक्ष्पपाल सिंह ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों से कुछ अति उत्साही लोग शहर और जिले के साथ पूरे प्रदेश में शांति व्यवस्था में खलल डालने के लिए नमाज और चालीसा की आड़ ले रहे हैं। ये वह लोग हैं जिनको भाजपा सरकार में कोई पूछ नहीं रहा है। ऐसे लाग अपनी पूछ बनाने के लिए इस तरह का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, जो कभी सफल नहीं हो जाएगा। हिंदू हो या मुसलमान सभी जानते हैं कि किसी क्या आवश्यकता है।
सड़क पर नमाज केवल ईद बकरीद या जुमे के दिन होती है। इससे उलट हिंदूओं की यात्राएं, जुलूस, धार्मिक आयोजन से लेकर रामलीला तक तमाम जगह सड़कों पर होती है। जिसके लिए बाकायदा यातायात बदला जाता है। यह सब कई दशकों से हो रहा है। इसलिए सड़क पर नमाज या धार्मिक कार्यक्रमों की आड़ में नेतागिरी करने का कोई मतलब नहीं है।