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Aligarh News: ग्राम प्रधानों की प्रशासक के रूप होगी महत्वपूर्ण भूमिका
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अतरौली के गांव खेड़िया ताल्लुक लोहगढ़ में प्रधान पूनम राघव को मिठाई खिलातीं महिलाएं।
- फोटो : samvad
प्रदेश भर के ग्राम प्रधानों के कार्यकाल के पांच साल पूरे गए हैं। चुनाव की तारीख तय न होने पर इस बार राज्य सरकार ने ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियु्क्त कर दिया है। अगर चुनाव लंबा खिंचता है तो प्रशासक की भूमिका अहम हो जाएगी। सरकार के इस फैसले से प्रधानों में खुशी का माहौल है।
इस बार 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन चुनाव की कोई तारीख तय नहीं है। इसे देखते हुए सरकार ने प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने की घोषणा कर दी है। प्रधानों और अधिकारियों के बीच चर्चा है कि विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव होंगे। यानि करीब आठ महीने तक चुनाव होना मुश्किल लग रहा है, इसे देखते हुए प्रधानों की प्रशासक के रूप में भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ज्ञात रहे प्रधान संगठन ने भी मांग की थी कि विधानसभा चुनाव होने तक मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाए।
2021 में चार महीने रहे थे एडीओ पंचायत प्रशासक
दिसंबर 2020 में प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद चुनाव की तारीख टल गई थी। अप्रैल 2021 में चुनाव होने तक चार महीने के लिए एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाकर गांव की सरकार चलाई गई थी। उस समय चुनाव की तारीख घोषित हो चुकी थी, इसलिए प्रधानों को प्रशासक बनाने की मांग नहीं उठी।
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अतरौली तहसील: 5 साल में 6 पंचायतों में रही विवाद की स्थिति
अतरौली तहसील में तीन ब्लॉक हैं बिजौली, गंगीरी और अतरौली। पांच साल के कार्यकाल में सबसे शांत अतरौली ब्लॉक रहा, जहां एक भी प्रधान पद से नहीं हटा, न कोई कार्रवाई न किसी पंचायत में शिकवा शिकायत के चलते कोई खास विवाद रहा। केवल चौमुंहा के प्रधान धर्मेंद्र लोधी की मृत्यु के बाद ग्राम पंचायत सदस्य अर्जुन सिंह को कार्यभार मिला। वहीं बिजौली और गंगीरी ब्लॉक में छह प्रधानों को कार्रवाई के कारण पद से हटना पड़ा। राहत की बात ये रही कि इनमें से ज्यादातर बहाल हो गए या उनके परिवार के सदस्य ही जनता के द्वारा दोबारा प्रधान चुनकर आ गए। एक प्रधान की मृत्यु के कारण सदस्य को कार्यभार मिला।
गंगीरी ब्लॉक का हाल
एडीओ पंचायत सुरेश चंद हितैषी के मुताबिक ग्राम पिपलोई के प्रधान विजेंद्र सिंह और मझोला के प्रधान चंद्रभान कुशवाहा के अधिकार शिकायतों के चलते सीज हुए थे। जांच में शिकायत गलत मिलने पर छह महीने के बाद ही दोनों बहाल हो गए. तब तक प्रशासनिक समिति के रूप में सदस्य ने काम संभाला। नौगवां के प्रधान किशनलाल अधिकार सीज होने के बाद 2024 में बर्खास्त हुए। उपचुनाव में उनकी पत्नी मुन्नी देवी प्रधान चुनी गईं। वहीं, नाह की प्रधान रामलली की मृत्यु के बाद 2025 से ग्राम पंचायत सदस्य कुमारी भावना कार्यभार संभाल रही हैं।
बिजौली ब्लॉक की स्थिति
एडीओ पंचायत लक्ष्मी नारायण के अनुसार बढ़ेपुरा की प्रधान अंजू देवी और दादों के प्रधान रामेश्वर सिंह के अधिकार सीज हुए थे। दोनों आठ महीने में बहाल हो गए। इस दौरान ग्राम पंचायत सदस्यों ने प्रशासक के तौर पर बागडोर संभाली। वहीं, ग्राम हरदोई में प्रधान जलधारा देवी के अधिकार सीज होने के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पुत्रवधु पिंकी देवी प्रधान बनीं।
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वर्जन
- 26 मई के बाद गांवों में विकास कार्य व सरकार की अन्य योजनाएं प्रभावित न हों, इसके लिए प्रशासक की नियुक्ति होनी हैं। राज्य सरकार ने जो फैसला होगा उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।- केपी सिंह, एडीओ पंचायत अतरौली
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इस बार 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन चुनाव की कोई तारीख तय नहीं है। इसे देखते हुए सरकार ने प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने की घोषणा कर दी है। प्रधानों और अधिकारियों के बीच चर्चा है कि विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव होंगे। यानि करीब आठ महीने तक चुनाव होना मुश्किल लग रहा है, इसे देखते हुए प्रधानों की प्रशासक के रूप में भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ज्ञात रहे प्रधान संगठन ने भी मांग की थी कि विधानसभा चुनाव होने तक मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाए।
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2021 में चार महीने रहे थे एडीओ पंचायत प्रशासक
दिसंबर 2020 में प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद चुनाव की तारीख टल गई थी। अप्रैल 2021 में चुनाव होने तक चार महीने के लिए एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाकर गांव की सरकार चलाई गई थी। उस समय चुनाव की तारीख घोषित हो चुकी थी, इसलिए प्रधानों को प्रशासक बनाने की मांग नहीं उठी।
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अतरौली तहसील: 5 साल में 6 पंचायतों में रही विवाद की स्थिति
अतरौली तहसील में तीन ब्लॉक हैं बिजौली, गंगीरी और अतरौली। पांच साल के कार्यकाल में सबसे शांत अतरौली ब्लॉक रहा, जहां एक भी प्रधान पद से नहीं हटा, न कोई कार्रवाई न किसी पंचायत में शिकवा शिकायत के चलते कोई खास विवाद रहा। केवल चौमुंहा के प्रधान धर्मेंद्र लोधी की मृत्यु के बाद ग्राम पंचायत सदस्य अर्जुन सिंह को कार्यभार मिला। वहीं बिजौली और गंगीरी ब्लॉक में छह प्रधानों को कार्रवाई के कारण पद से हटना पड़ा। राहत की बात ये रही कि इनमें से ज्यादातर बहाल हो गए या उनके परिवार के सदस्य ही जनता के द्वारा दोबारा प्रधान चुनकर आ गए। एक प्रधान की मृत्यु के कारण सदस्य को कार्यभार मिला।
गंगीरी ब्लॉक का हाल
एडीओ पंचायत सुरेश चंद हितैषी के मुताबिक ग्राम पिपलोई के प्रधान विजेंद्र सिंह और मझोला के प्रधान चंद्रभान कुशवाहा के अधिकार शिकायतों के चलते सीज हुए थे। जांच में शिकायत गलत मिलने पर छह महीने के बाद ही दोनों बहाल हो गए. तब तक प्रशासनिक समिति के रूप में सदस्य ने काम संभाला। नौगवां के प्रधान किशनलाल अधिकार सीज होने के बाद 2024 में बर्खास्त हुए। उपचुनाव में उनकी पत्नी मुन्नी देवी प्रधान चुनी गईं। वहीं, नाह की प्रधान रामलली की मृत्यु के बाद 2025 से ग्राम पंचायत सदस्य कुमारी भावना कार्यभार संभाल रही हैं।
बिजौली ब्लॉक की स्थिति
एडीओ पंचायत लक्ष्मी नारायण के अनुसार बढ़ेपुरा की प्रधान अंजू देवी और दादों के प्रधान रामेश्वर सिंह के अधिकार सीज हुए थे। दोनों आठ महीने में बहाल हो गए। इस दौरान ग्राम पंचायत सदस्यों ने प्रशासक के तौर पर बागडोर संभाली। वहीं, ग्राम हरदोई में प्रधान जलधारा देवी के अधिकार सीज होने के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पुत्रवधु पिंकी देवी प्रधान बनीं।
वर्जन
- 26 मई के बाद गांवों में विकास कार्य व सरकार की अन्य योजनाएं प्रभावित न हों, इसके लिए प्रशासक की नियुक्ति होनी हैं। राज्य सरकार ने जो फैसला होगा उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।- केपी सिंह, एडीओ पंचायत अतरौली