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खजाना पाने को किशोर की बलि: दो दोषियों को उम्रकैद, बाल अपचारी को 20 साल कारावास, ऐसे ली थी कन्हैया की जान
Fri, 05 Sep 2025 01:38 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 05 Sep 2025 01:38 PM IST
सार
कन्हैया को बाल अपचारी बरूले खिलाने के बहाने ले गया। बाल अपचारी ने उसके दोनों हाथों से पैर पकड़े। फिर मल्लजी ने गंड़ासा से पहले कमर की करधनी काटी। फिर चप्पल पर तिलक लगाया। इसके बाद गंड़ासे से गर्दन पर वार किया। कन्हैया तड़पते हुए छटपटा रहा था, उसके खून से मल्लजी ने तिलक किया।
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कोर्ट
- फोटो : प्रतीकात्मक
विस्तार
अलीगढ़ के थाना हरदुआगंज क्षेत्र के गांव चौगानपुर में खजाना पाने के लालच में सात साल पहले एक किशोर की बलि देने के मामले में एडीजे पॉक्सो प्रथम अनिल कुमार की अदालत ने दो आरोपियों ताराचंद्र व मल्लजी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं, बाल अपचार को 20 साल की सजा सुनाई है। यह घटना 24 फरवरी 2018 की है।
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मामले में हरदुआगंज क्षेत्र के गांव चौगानपुर निवासी संजय सिंह ने तहरीर देकर कहा था कि उनका सात साल का बेटा विशाल व पांच साल का छोटा बेटा कन्हैया घर के पीछे खड़ंजा पर खेल रहे थे। इसी दौरान बाल अपचारी बरूले खिलाने के बहाने से कन्हैया को ले गया। देर शाम तक जब कन्हैया वापस नहीं आया तो परिजनों ने बाल अपचारी के परिजनों से पूछा। इस पर उन्होंने धमकी दी कि तेरा लड़का नहीं मिलेगा। पुलिस ने मामले में 26 फरवरी 2018 को मुकदमा दर्ज किया। 14 मार्च 2018 को कन्हैया का कंकाल मिला।
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पुलिस ने बाल अपचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसमें उसने बताया कि ताराचंद ने दो हजार रुपये देकर उसे लालच देकर कन्हैया को बुलाने के लिए भेजा था। जब वह किशोर को लेकर पहुंचा तो ताराचंद्र ने कन्हैया का मुंह बंदकर गोद में उठा लिया। फिर उसे लेखराज के तारबंदी वाले खेत में ले गए। वहां पहले से मौजूद ज्ञान सिंह उर्फ मल्लजी ने कहा कि इसे लिटा दे। आज तेरे सारे दुख-दर्द व बदहाली दूर हो जाएगी। तुझे माया का भंडार मिलने वाला है। ताराचंद्र ने उसे लिटाकर मुंह दबाए रखा।
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बाल अपचारी ने दोनों हाथों से पैर पकड़े। फिर मल्लजी ने गंड़ासा से पहले कमर की करधनी काटी। फिर चप्पल पर तिलक लगाया। इसके बाद गंड़ासे से गर्दन पर वार किया। कन्हैया तड़पते हुए छटपटा रहा था, उसके खून से मल्लजी ने तिलक किया। इसके बाद ताराचंद्र को बलि देने को कहा तो गंड़ासे से उसने कन्हैया की गर्दन काट दी। इसके बाद खेत में शव को दबा दिया।