{"_id":"6365596c70b6c8505e62c892","slug":"two-girls-died-of-dengue-aligarh-news-ali3040258176","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाजौता में डेंगू से दो युवतियों की मौत, कई बीमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाजौता में डेंगू से दो युवतियों की मौत, कई बीमार
विज्ञापन
गांव बाजौता में डेंगू से पीड़ित महिला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टप्पल ब्लॉक के गांव बाजौता में डेंगू पीड़ित दो युवतियों की बृहस्पतिवार की रात इलाज के दौरान मौत हो गई। एक युवती बी फार्मा अंतिम वर्ष की छात्रा थी और उसकी बहन भी डेंगू से पीड़ित है जिसका फरीदाबाद के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। वही दूसरी मृतका सात माह की गर्भवती थी। वहीं गांव में कई लोग बुखार से पीड़ित हैं। बताया जा रहा है कि गांव में कुछ जगह पर डेंगू का लार्वा मिला है। वहीं गांव के दो अन्य लोगों की भी कुछ दिन पहले डेंगू से जान जा चुकी है। अब दो और मौत से गांव वाले दहशत में हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव के 20 घरों में डेंगू का लार्वा मिला है। शुक्रवार को स्वास्थ्य गांव में टीम घर-घर जांच करेगी।
बताते हैं कि बाजौता गांव निवासी 19 वर्षीय सपना पुत्री लोकेंद्र आरजे महाविद्यालय में बी फार्मा अंतिम वर्ष की छात्रा थी। वह कुछ दिनों से बीमार थी। कस्बे के एक अस्पताल में उसे दिखाने के बाद परिवार वाले सपना को दिल्ली ले गए। वहां भी बुखार न उतरने पर परिवार वाले सपना को नोएडा के कैलाश हास्पिटल ले गए जहां इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो र्गई। वह तीन बहन व एक भाई में दूसरे नंबर पर थीं। पिता लोकेंद्र ने बताया कि उनकी दूसरी बेटी पूजा भी डेंगू से पीड़ित है। फरीदाबाद के एक अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। वहीं गांव की निवासी 24 वर्षीय कमलेश पत्नी हरेंद्र की दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान बृहस्पतिवार की शाम मौत हो गई। वह सात माह की गर्भवती थी। पति हरेंद्र ने बताया कि 27 अक्तूबर को कमलेश को बुखार आया था। 28 अक्तूबर को उन्होंने कस्बे के एक निजी अस्पताल में दिखाया। वहां से डॉक्टरों की सलाह पर दिल्ली ले गए। वहां अस्पताल में कई चेकअप हुए। इलाज के बीच लगातार प्लेटलेट्स गिरती चली गई और बृहस्पतिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई।
शुक्रवार को सपना व कमलेश का गांव के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। ग्राम प्रधान पवन कुमार सिंह ने बताया कि गांव में बच्चे, महिलाओं और बुजुर्गों समेत गांव में कई लोग बुखार की चपेट में हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार को उन्होंने सूचना दी। इसके बाद गांव में कैंप लगाकर ग्रामीणों को दवा का वितरण किया गया। गांव में दवा का छिड़काव और फागिंग कराई जा रही है।
विज्ञापन
चार दिन पहले किशन और करवा चौथ पर योगेश की हो चुकी मौत
ग्रामीणों ने बताया चार दिन पहले गांव के निवासी किशन पुत्र कमल सिंह की भी डेंगू से ही मौत हो चुकी है। इससे पहले करवा चौथ वाले दिन गांव के निवासी योगेंद्र की पत्नी योगेश की डेंगू से मौत हो चुकी है। गांव में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। इस समय घर-घर तमाम बुखार पीड़ित चारपाई पर पड़े हैं। अधिकतर बुखार पीड़ितों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। सपना के पिता लोकेंद्र ने कहा कि गांव में फैल रहे डेंगू बुखार पर तत्काल रोक लगनी चाहिए ताकि उनकी बेटी की तरह अन्य किसी की जान न जाए।
दो बार में बाजौता में चिकित्सा टीम भेजकर घर-घर जांच कराई गई है। 20 घरों से डेंगू का लार्वा मिला है। लावा नष्ट कराने के लिए दवा प्रधान को दी गई है ताकि उसका छिड़काव कराया जा सके। गांव से अभी तक एक भी डेंगू पीड़ित सीएचसी नहीं पहुंचा है। सूचना प्राप्त हुई है कि गाव में बड़ी संख्या में डेंगू पीड़ित मरीज हैं। शुक्रवार को करीब 50 कर्मचारियों की टीम के साथ गांव में घर-घर जांच कराई जाएगी। गांव में जिन स्थानों पर गंदगी की अधिकता है उस स्थान को ग्राम प्रधान के जरिए ढकवाया जाएगा और लगातार गांव में दवा का छिड़काव कराया जाएगा।
विज्ञापन
बताते हैं कि बाजौता गांव निवासी 19 वर्षीय सपना पुत्री लोकेंद्र आरजे महाविद्यालय में बी फार्मा अंतिम वर्ष की छात्रा थी। वह कुछ दिनों से बीमार थी। कस्बे के एक अस्पताल में उसे दिखाने के बाद परिवार वाले सपना को दिल्ली ले गए। वहां भी बुखार न उतरने पर परिवार वाले सपना को नोएडा के कैलाश हास्पिटल ले गए जहां इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो र्गई। वह तीन बहन व एक भाई में दूसरे नंबर पर थीं। पिता लोकेंद्र ने बताया कि उनकी दूसरी बेटी पूजा भी डेंगू से पीड़ित है। फरीदाबाद के एक अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। वहीं गांव की निवासी 24 वर्षीय कमलेश पत्नी हरेंद्र की दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान बृहस्पतिवार की शाम मौत हो गई। वह सात माह की गर्भवती थी। पति हरेंद्र ने बताया कि 27 अक्तूबर को कमलेश को बुखार आया था। 28 अक्तूबर को उन्होंने कस्बे के एक निजी अस्पताल में दिखाया। वहां से डॉक्टरों की सलाह पर दिल्ली ले गए। वहां अस्पताल में कई चेकअप हुए। इलाज के बीच लगातार प्लेटलेट्स गिरती चली गई और बृहस्पतिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई।
विज्ञापन
शुक्रवार को सपना व कमलेश का गांव के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। ग्राम प्रधान पवन कुमार सिंह ने बताया कि गांव में बच्चे, महिलाओं और बुजुर्गों समेत गांव में कई लोग बुखार की चपेट में हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार को उन्होंने सूचना दी। इसके बाद गांव में कैंप लगाकर ग्रामीणों को दवा का वितरण किया गया। गांव में दवा का छिड़काव और फागिंग कराई जा रही है।
विज्ञापन
चार दिन पहले किशन और करवा चौथ पर योगेश की हो चुकी मौत
ग्रामीणों ने बताया चार दिन पहले गांव के निवासी किशन पुत्र कमल सिंह की भी डेंगू से ही मौत हो चुकी है। इससे पहले करवा चौथ वाले दिन गांव के निवासी योगेंद्र की पत्नी योगेश की डेंगू से मौत हो चुकी है। गांव में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। इस समय घर-घर तमाम बुखार पीड़ित चारपाई पर पड़े हैं। अधिकतर बुखार पीड़ितों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। सपना के पिता लोकेंद्र ने कहा कि गांव में फैल रहे डेंगू बुखार पर तत्काल रोक लगनी चाहिए ताकि उनकी बेटी की तरह अन्य किसी की जान न जाए।
दो बार में बाजौता में चिकित्सा टीम भेजकर घर-घर जांच कराई गई है। 20 घरों से डेंगू का लार्वा मिला है। लावा नष्ट कराने के लिए दवा प्रधान को दी गई है ताकि उसका छिड़काव कराया जा सके। गांव से अभी तक एक भी डेंगू पीड़ित सीएचसी नहीं पहुंचा है। सूचना प्राप्त हुई है कि गाव में बड़ी संख्या में डेंगू पीड़ित मरीज हैं। शुक्रवार को करीब 50 कर्मचारियों की टीम के साथ गांव में घर-घर जांच कराई जाएगी। गांव में जिन स्थानों पर गंदगी की अधिकता है उस स्थान को ग्राम प्रधान के जरिए ढकवाया जाएगा और लगातार गांव में दवा का छिड़काव कराया जाएगा।