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नीलामी निरस्त होने पर व्यापारियों ने काटा हंगामा
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धनीपुर मंडी में बनी फल मंडी की 40 दुकानों की नीलामी एक बार फिर नहीं हो सकी। बोली के लिए नाममात्र के व्यापारी आने पर मंडी प्रशासन ने नीलामी प्रक्रिया निरस्त कर दी। अब छह जुलाई को बोली कराने का ऐलान किया गया है। इससे नाराज व्यापारियों ने डीडी मंडी एवं सचिव के कार्यालय पर जमकर हंगामा काटा। मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट की गाड़ी घेर ली। इस दौरान उनकी सिटी मजिस्ट्रेट से तीखी नोकझाेंक हुई। बाद में डीएम के हस्तक्षेप व छह जुलाई को हर हाल में बोली कराने के आश्वासन पर व्यापारी माने।
धनीपुर मंडी में विधायक कोल अनिल पाराशर के प्रयासों से चार करोड़ की लागत से फल मंडी की स्थापना करते हुए यहां 40 दुकानों का निर्माण किया गया था। इनकी नीलामी होनी है। लेकिन सारसौल पर मौजूद फल विक्रेताओं का काकस नीलामी का बहिष्कार पर आमादा है। वे इस मामले में न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। इस वजह से छह सात बार मंडी परिसर में नीलामी प्रक्रिया निरस्त हो चुकी है। शनिवार को भी नीलामी प्रक्रिया आयोजित हुई। लेकिन इसमें मात्र चंद लोगों के आने पर मंडी प्रशासन ने छह जुलाई को नीलामी कराने की घोषणा कर दी। घोषणा सुनते ही वहां मौजूद व्यापारी भड़क उठे। उन्होेंने प्रशासन पर वर्ग विशेष के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। यह भी कहा कि बोली के फार्म एवं डीडी जमा करने की अंतिम तिथि 25 जून के बावजूद 28 जून को रात दस बजे तक आढ़तियों से फार्म भरवाए गए। नियमानुसार डीडी के स्थान पर नगद धनराशि जमा कराई गई।
फल मंडी के लिए कुल 236 लाइसेंस धारक हैं। इनमें से अब तक मात्र 48 ने आवेदन किया है। शनिवार को बोली लगाने के लिए चंद लोग ही आए थे। इस वजह से नीलामी को छह जुलाई तक टाला गया है। कोई भी लाइसेंस धारक चार जुलाई तक आवेदन कर सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि 28 जून तक ज्यादा से ज्यादा लोगों को मौका देने के लिए आवेदन लिये गए। नगद जमानत राशि भी ली गई। लेकिन सभी को रसीद दी गई। इसमें कोई नियमों का उल्लंघन नहीं है। दो लाख तक की धनराशि नगद ली जा सकती है।
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- नरेंद्र मलिक डिप्टी डायरेक्टर मंडी एवं नीलामी समिति अध्यक्ष
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धनीपुर मंडी में विधायक कोल अनिल पाराशर के प्रयासों से चार करोड़ की लागत से फल मंडी की स्थापना करते हुए यहां 40 दुकानों का निर्माण किया गया था। इनकी नीलामी होनी है। लेकिन सारसौल पर मौजूद फल विक्रेताओं का काकस नीलामी का बहिष्कार पर आमादा है। वे इस मामले में न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। इस वजह से छह सात बार मंडी परिसर में नीलामी प्रक्रिया निरस्त हो चुकी है। शनिवार को भी नीलामी प्रक्रिया आयोजित हुई। लेकिन इसमें मात्र चंद लोगों के आने पर मंडी प्रशासन ने छह जुलाई को नीलामी कराने की घोषणा कर दी। घोषणा सुनते ही वहां मौजूद व्यापारी भड़क उठे। उन्होेंने प्रशासन पर वर्ग विशेष के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। यह भी कहा कि बोली के फार्म एवं डीडी जमा करने की अंतिम तिथि 25 जून के बावजूद 28 जून को रात दस बजे तक आढ़तियों से फार्म भरवाए गए। नियमानुसार डीडी के स्थान पर नगद धनराशि जमा कराई गई।
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फल मंडी के लिए कुल 236 लाइसेंस धारक हैं। इनमें से अब तक मात्र 48 ने आवेदन किया है। शनिवार को बोली लगाने के लिए चंद लोग ही आए थे। इस वजह से नीलामी को छह जुलाई तक टाला गया है। कोई भी लाइसेंस धारक चार जुलाई तक आवेदन कर सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि 28 जून तक ज्यादा से ज्यादा लोगों को मौका देने के लिए आवेदन लिये गए। नगद जमानत राशि भी ली गई। लेकिन सभी को रसीद दी गई। इसमें कोई नियमों का उल्लंघन नहीं है। दो लाख तक की धनराशि नगद ली जा सकती है।
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- नरेंद्र मलिक डिप्टी डायरेक्टर मंडी एवं नीलामी समिति अध्यक्ष