मां काली शोभायात्रा: दिखा गुस्सा और मनुहार, व्यापारियों ने 15 मिनट तक जनप्रतिनिधियों को सुनाई खरी-खोटी
शोभायात्रा से पहले शकुंतला भारती हाथ जोड़ते हुए बोलने लगीं, अरे मेरे कन्हैया, मेरे लाला, मेरे राजा बेटा, मेरी एक बात सुन लो, भईया..ऐसो मत करो। अपनी बुआ का सम्मान कर लो।
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तीन दिन से जारी व्यापारियों का विरोध उस वक्त बाहर आया जब शुक्रवार को कनवरीगंज में शोभायात्रा को हरीझंडी दिखाने के लिए दो विधायक, एमएलसी और पूर्व महापौर शकुंतला भारती पहुंचीं। इस बीच माइक पर घोषणा हुई कि हमारे जनप्रतिनिधियों का सम्मान किया जाए। यह सुन पास दुकानों पर बैठे व्यापारी लपकते हुए आए और बोले, काहे का सम्मान, तीन दिन से इन्होंने शक्ल तक नहीं दिखाई। तब कहां थे, जब प्रशासन हमें मंजूरी नहीं दे रहा था। भव्य शोभायात्रा निकालने के हमारे अरमान ऐसे ही रह गए। पहली बार ऐसा फीका आयोजन करना पड़ रहा है। अबके चुनाव में आना, कौन सा वोट मांगने आएगा?
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ इस तरह के कड़े शब्दों का इस्तेमाल करने वाले व्यापारियों की जब संख्या बढ़ने लगी तो सुरक्षा के लिहाज से आयोजक भी तनाव में आ गए। मंच पर एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह बैठे रहे, विरोध का असर उनके चेहरे पर नजर आने लगा और शकुंतला भारती हाथ जोड़ते हुए बोलने लगीं, अरे मेरे कन्हैया, मेरे लाला, मेरे राजा बेटा, मेरी एक बात सुन लो, भईया..ऐसो मत करो। अपनी बुआ का सम्मान कर लो।
हालांकि लोगों का हुजूम, शोर और विरोध के बीच जब उनकी बात अनसुनी होने लगी तो वे फूंट पड़ी और रोने लगीं। ये देख व्यापारियों का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ और बोले, बुआ तुम मत रोओ, तुमने बहुत साथ दिया, तुम्हारी गलती नहीं है। ऐसा कहते हुए उन्होंने शकुंतला भारती को गले लगा लिया और चुप कराने का प्रयास किया। स्थिति को भांपते हुए आयोजकों ने फौरन जयकारे लगाना शुरू किए ताकि कार्यक्रम आगे बढ़ाया जा सके।
इस पूरे संवाद में एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह, कोल विधायक अनिल पाराशर और शहर विधायक मुक्ता राजा के पास शब्द नहीं थे। वे खामोश बैठे रहे। बाद में जब मामला शांत हुआ तो इन्होंने महापौर प्रशांत सिंघल, भाजपा महानगर अध्यक्ष राजीव शर्मा और पूर्व महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत के साथ मिलकर शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान भी जनप्रतिनिधियों के हावभाव काफी चर्चाओं में रहे।
बैरियर लगाकर पुलिस ने रोकी काली व जगन्नाथ की झांकी
प्रशासन ने कलश यात्रा के साथ एक डोला निकालने की अनुमति दी थी। इसके बाद भी कटरा तिराहे से काली जी व जगन्नाथ की शोभायात्रा को भी इस यात्रा में शामिल करने की आयोजकों ने कोशिश की तो पुलिस ने बैरियर लगा दिया। सीओ सिविल लाइंस सर्वम सिंह ने साफ कह दिया कि शोभायात्रा में इनके शामिल होने की कोई अनुमति नहीं है। इसके बाद दोनों झांकियों को दूसरे रास्ते से ले जाया गया। हालांकि काली की शोभायात्रा कटरा, छिपैटी बाजार होते हुए अब्दुल करीम चाैराहे से पहले ही शोभायात्रा में शामिल हो गईं।
अनुमति मिली, लेकिन भरोसा नहीं जीत पाए
आयोजकों को भले ही प्रशासन ने शोभायात्रा निकालने की अनुमति दे दी थी, लेकिन वे प्रशासन का भरोसा नहीं जीत सके। पिछले साल अब्दुल करीम चाैराहे से आयोजकों द्वारा जबरन शोभायात्रा निकालने की घटना को देखते हुए प्रशासनिक अफसरों ने सुरक्षा व्यवस्था में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। कनवरीगंज फर्श में बनी मस्जिद के सामने से जैसे ही कलश यात्रा निकली तो वहां पहले से ही काफी फोर्स तैनात था। यहां काफी संख्या में मुस्लिम भी खड़े हुए थे और उनके चेहरे पर हल्का सा तनाव भी दिखा। हालांकि शोभायात्रा सकुशल निकली तो सबने राहत की सांस ली।
शोभायात्रा में शामिल नहीं हुए सांसद सतीश गौतम
मां काली शोभायात्रा की अनुमति को लेकर मची रार के बीच अचानक सांसद सतीश गौतम बृहस्पतिवार की रात देहलीगेट क्षेत्र में पहुंच गए और आयोजन समिति के पदाधिकारियों के सामने फोन पर सचिव से वार्ता कर सशर्त आयोजन की अनुमति ली। इस पर लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन शुक्रवार को शोभायात्रा में सांसद के न पहुंचने पर निराशा भी हुई। बताया जाता है कि वह संसद सत्र में शामिल होने के लिए सुबह ही दिल्ली रवाना हो गए थे।