माइक्रोसॉफ्ट के बाय-आउट ऑफर से एक दिन पहले बिल गेट्स ने जताई थी चिंता: जानें AI और नौकरियों पर क्या कहा था?
रविवार को बिल गेट्स ने चेताया था कि AI के दौर में कंपनियां रोबोट रखो, इंसान निकालो की राह पर हैं और अगले ही दिन माइक्रोसॉफ्ट ने 60 हजार कर्मचारियों को बाय-आउट का ऑफर दे दिया। अब गेट्स के बयान और कंपनी के ऑफर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विस्तार
AI के दौर में कंपनियां इंसानों की जगह मशीनें क्यों चुन रही हैं, और इसकी कीमत कौन चुकाएगा? Microsoft के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने रविवार को इसी पर कड़ी चेतावनी दी थी। खास बात ये है कि अगले ही दिन उनकी बनाई कंपनी ने अपने करीब 60 हजार कर्मचारियों को स्वैच्छिक एग्जिट का ऑफर दे दिया।
बिल गेट्स ने क्या कहा था?
द ऑब्जर्वर को दिए एक इंटरव्यू में गेट्स ने कहा कि आज का प्रोत्साहन ढांचा ही गलत है। कंपनियों को संदेश मिल रहा है कि रोबोट रखो, इंसान निकालो और पीछे मुड़कर मत देखो। उन्होंने AI के दौर को 'विकासवादी घटना' बताया, जिसमें इंसान अब धरती की सबसे समझदार चीज नहीं रहे। उनका अनुमान है कि AI लगभग हर तरह के कौशल का काम संभाल लेगा, पहले दफ्तर के काम, फिर हाथ और मेहनत के काम।
गेट्स ने जताई थी सबसे बड़ी चिंता
बिल गेट्स की सबसे बड़ी फिक्र नौकरियों के साथ-साथ टैक्स की भी है। काम करने वाले कम होंगे तो सरकार की कमाई घटेगी, और देश की कुल समृद्धि बढ़ने के बावजूद सामाजिक सुरक्षा का दायरा सिकुड़ सकता है। इसके हल के तौर पर उन्होंने दो सुझाव दिए थे।
- AI के इस्तेमाल पर 'टोकन टैक्स'
- अरबपतियों पर ज्यादा टैक्स।
अपनी मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि वे अब तक 14 अरब डॉलर टैक्स दे चुके हैं, पर 40 अरब डॉलर तक देने को तैयार होते। गौरतलब है कि बिल गेट्स अब माइक्रोसॉफ्ट में किसी कार्यकारी या बोर्ड पद पर नहीं हैं, इसलिए यह उनकी निजी राय है, कंपनी का रुख नहीं।
अगले दिन कंपनी ने उठाया कदम
इसके अगले ही दिन यानी सोमवार को Microsoft ने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और भारत में लेवल 70 और उससे नीचे के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक एग्जिट ऑफर घोषित किया। सभी टीमें इसमें शामिल नहीं हैं, इसलिए आंकड़ा करीब एक-चौथाई वर्कफोर्स यानी लगभग 60 हजार पर रुकता है। रिपोर्टों के मुताबिक पात्र कर्मचारियों के पास दिसंबर की शुरुआत तक फैसला लेने का समय है और जो हां कहेंगे वे उसी महीने के अंत तक कंपनी छोड़ देंगे।
चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमैन ने कर्मचारियों से कहा कि यह प्रक्रिया कंपनी के लिए नई है और उससे सीख ली जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी कहती है कि इसके पीछे AI नहीं है, पर रॉयटर्स के हवाले से यह भी कहा गया है कि कंपनी लागत पर काबू पाकर अपने भारी AI निवेश के लिए पैसा जुटाना चाहती है। इस साल यह उसका दूसरा ऐसा कदम है। अप्रैल में उसने अमेरिका के करीब 8750 कर्मचारियों को पहली बार स्वैच्छिक रिटायरमेंट योजना दी थी।
दोनों घटनाएं अलग, पर साथ-साथ
- गेट्स की बात और Microsoft का ऑफर अलग-अलग घटनाएं हैं। पर लगातार दो दिनों में आना इसे एक बड़ा सवाल बना देता है: जब कंपनियाँ AI में पैसा झोंक रही हैं, तो इस बदलाव की कीमत किसके सिर जाएगी?
- यह चिंता सिर्फ गेट्स की नहीं है। 2024 के एक IMF विश्लेषण ने भी कहा था कि AI से उत्पादकता बढ़े तो ज्यादातर कामगारों की आय बढ़ सकती है। पर अगर फायदा मुख्य रूप से ऊंची वेतन वालों को मिला, तो कामगारों के बीच असमानता बढ़ सकती है, और पूंजी की कमाई बढ़ने से संपत्ति की असमानता भी गहरा सकती है।
भारत के लिए क्यों है अहम?
भारत दुनिया के सबसे बड़े टेक वर्कफोर्स में से एक है, और वह Microsoft के ऑफर वाले चार देशों में है। इसलिए यह सवाल यहां और जोर से उठेगा। बिल गेट्स के बयान और अगल ही दिन कंपनी में बाय-आउट ऑफर की घोषणा ने कई सवाल पैदा कर दिए हैं।