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भविष्य के लिए बड़ा खतरा: जांच में हुआ खुलासा, अलीगढ़ के पानी में घुल रहे भारी धातु के अंश
Sun, 22 Jun 2025 11:04 AM IST
चमन शर्मा
बृजेश चौहान, अमर उजाला, अलीगढ़
बृजेश चौहान, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Sun, 22 Jun 2025 11:04 AM IST
सार
अलीगढ़ शहर के 17 स्थानों से पेयजल के और 20 स्थानों से उद्योगों से निकलने वाले पानी के नमूने लिए गए। ईदगाह, प्रेम नगर और कालंदी पुरम में तीन स्थान आंशिक रूप से प्रभावित थे। यहां लोहा, मैगनीज और तांबा पाया गया।
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अलीगढ़ का पानी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
अलीगढ़ शहर के पानी में निकेल, लोहा, मैंगनीज, तांबा, जिंक, क्रोमियम आदि भारी धातुओं के अंश घुल रहे हैं। इसका खुलासा एएमयू के डॉक्टर जाकिर हुसैन कॉलेज के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शोध में हुआ है।
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सर्वेक्षण के कुल क्षेत्र का 64.7% प्रतिशत पानी में इनकी मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुरूप है, लेकिन 35.3 प्रतिशत स्थानों इनकी मात्रा आंशिक या मानक से ज्यादा पाई गई है और यह भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन रही है। इस शोध में डाक्टर जाकिर हुसैन कॉलेज के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष इजहार उल फारुकी, मोहम्मद सलीम बदर, शाहरुख अली, दानियाल, मोहम्मद वसीम अकरम, कासिफ फहीम, सैफउल्ला खान शामिल रहे।
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शहर के 17 स्थानों से पेयजल के और 20 स्थानों से उद्योगों से निकलने वाले पानी के नमूने लिए गए। ईदगाह, प्रेम नगर और कालंदी पुरम में तीन स्थान आंशिक रूप से प्रभावित थे। यहां लोहा, मैगनीज और तांबा पाया गया।
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नींवरी मोड़ और रोरावर में लिए गए पानी के नमूनों में निकेल, लोहा और मैगनीज मिला है। ईदगाह रोड़ इलाके के पानी में निकेल, लोहा, मैगनीज के साथ जस्ता भी मानक से बहुत अधिक मिला है। भूजल में निकिल की सांद्रता 0.000334 से 9.7 मिलीग्राम प्रति लीटर (एमजीएल) तक पाई गई है। रोरावर में औद्योगिक अपशिष्ट में यह 46.10 तक थी। क्रोमियम की मात्रा भूजल मानक के अनुरूप थी, लेकिन सराय रहमान में फैक्टरियों से निकलने वाले पानी में यह 78.30 एमजीएल मिली। भूजल में लोहा निर्धारित मानक के अनुयप थी, लेकिन औद्योगिक अपशिष्ट में यह भी 27.40 एमजीएल पाई गई। भूजल में मैगनीज का स्तर 0.161 से 0.000056 तक था, फैक्टरियों से निकले पानी में यह 8.1 व तांबा 0 से 8.7 एमजीएल तक मिला है।
अध्ययन में कुछ क्षेत्रों में भूजल में भारी धातुओं के अंश पाए गए हैं। ऐसा औद्योगिक इकाइयों से निकले पानी के भूजल में मिलने से हो रहा है। छह साल पहले भी इसी तरह की स्थिति आई थी, यह स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है।-इजहार उल फारुखी, विभागाध्यक्ष, सिविल इंजीनियरिंग, डॉक्टर जाकिर हुसैन कॉलेज, एएमयू
धातु का भारतीय और डब्ल्यूएचओ मानक
| धातु | भारतीय मानक | डब्ल्यूएचओ मानक |
| क्रोमियम | 0.5 | 0.5 |
| लोहा | 0.3 | 0.3 |
| मैगनीज | 0.1 | 0.4 |
| जिंक | 5 | 3 |
| तांबा | 0.05 | 2 |
| निकेल | 0.02 | 2 |
शोध: सेहत के लिए इस तरह है खतरा
निकिल
निकिल फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके संपर्क में आने से त्वचा की एलर्जी, फेफड़ों के फाइब्रोसिस और लोगों में श्वसन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
क्रोमियम
क्रोमियम त्वचा के संपर्क में आने पर यह यकृत परिगलन, झिल्ली के अल्सर और त्वचा की सूजन जैसी बीमारियों की वजह बन सकता है।
लोहा
यह सभी जीवों के लिए आवश्यक है और हीमोग्लोबिन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लेकिन इसकी भी ज्यादा मात्रा बीमारियों की वजह बन सकती है।
मैगनीज
पेयजल की उच्च मात्रा स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है, लेकिन यह मानक के अनुरूप ही है। लेकिन फैक्टरियों से निकले पानी में इसकी मात्रा काफी अधिक है। जो भविष्य के लिए खतरा बन सकती है।
तांबा
तांबे का उपयोग ताला निर्माण में, मुख्य रूप से ताला सिलिंडर और चाबी जैसे घटकों में किया जाता है। जन्म के समय गठन में देरी, शरीर के वजन में कमी और यकृत और गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकती है।
जिंक
विभिन्न शोधों में जिंक को एक आवश्यक तत्व माना जाता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा पेट की परत को नुकसान पहुंचा सकती है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और रक्त में एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी की वजह बन सकती है।