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Aligarh News: कुख्यात अपराधी नाजिम की मौत पर दुष्कर्म पीड़ित परिवार ने ली चैन की सांस
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बुलंदशहर में भुजपुरा के कुख्यात अपराधी नाजिम कलुआ की मौत पर सासनी गेट के डकैती-दुष्कर्म पीड़ित परिवार ने चैन की सांस ली है, खुशी जाहिर की है। लोधा के कुख्यात अपराधी बबलू मेवाती गैंग के सदस्य नाजिम कलुआ व उसके साथियों ने ही इस वारदात को अंजाम दिया था। यह मुकदमा आज भी अपर सत्र न्यायालय में विचाराधीन है। यह घटना एक दशक पहले की है, जब नाजिम ने इस घटना को अंजाम दिया था। मगर पुलिस को तकनीकी पेचों में उलझाकर बबलू ने खुद का बचाव कर लिया था, जिस पर परिवार आज तक असंतुष्ट है।
ये घटना नवंबर 2012 की है। जब सर्द रात में सासनी गेट इलाके में डकैती की एक घटना हुई और उसमें 25-26 वर्षीय गृहस्वामिनी संग दुष्कर्म को अंजाम दिया गया था। इसके चलते महिला गर्भवती तक हुई थी। जनवरी 2013 में इस घटना का खुलासा करते हुए पुलिस ने कुछ माल बरामदगी कर कई अपराधियों को जेल भेजा था।
इसी दौरान गिरफ्तार किया गया कोतवाली भुजपुरा क्षेत्र का नाजिम कलुआ मडराक से पुलिस अभिरक्षा से भाग गया था। इससे पहले भी वह कोतवाली पुलिस की अभिरक्षा से एक मर्तबा भागा था। बाद में उसकी मथुरा में गिरफ्तारी हुई और दो वर्ष बाद वह मथुरा से भी न्यायालय में पेशी के दौरान पुलिस अभिरक्षा से भागा था। दुष्कर्म व डकैती के इस मुकदमे में नाजिम गैंग के सरगना लोधा के बबलू मेवाती का भी नाम आया।
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मगर उस घटना में बबलू के नाम से बबलू का भाई जेल चला गया और खुद बबलू ने उस घटना के समय अपनी गिरफ्तारी किसी अन्य मुकदमे में जेल में दिखा दी थी। हालांकि परिवार ने इस बात का विरोध किया था। मगर उस समय पुलिस ने इस सच की विवेचना करने के बजाय मसला दाखिल दफ्तर कर दिया था। इधर, बृहस्पतिवार को जब सासनी गेट के दुष्कर्म व डकैती पीड़ित परिवार को नाजिम की मौत की खबर मिली तो परिवार ने राहत और खुशी जताई। परिवार के मुखिया ने कहा है कि पुलिस से अभी तक न्याय नहीं मिल सका। मुकदमा अदालत में है। मगर कुदरत ने खुद न्याय दे दिया है।
मुकदमा में गवाही से मुकरने को मिलती रही हैं धमकियां
डकैती व दुष्कर्म पीड़ित परिवार के मुखिया मुकदमे की पैरवी कर रहे हैं। वे बताते हैं कि मुकदमा अपर सत्र न्यायालय में विचाराधीन हैं। उनके परिवार के तीन सदस्यों की गवाही हो चुकी हैं। अब 11 जुलाई को मुकदमा लेखक तलब किया गया है। करीब तीन-चार माह पहले उसे कचहरी में बबलू मेवाती, गुलफाम व अन्य कुछ आरोपी मिले थे। उन्होंने उसे पहले प्यार से यह कहते हुए समझाया कि मुकदमे में तू हमारा कुछ नहीं करा सकता। बाद में उन्होंने धमकी दीं कि हम हर डकैती में दुष्कर्म को अंजाम देते हैं। यही हमारा पेशा है। अब तो तेरी बेटी भी बड़ी हो गई है। अगर हमारी बात नहीं मानी तो परिणाम खुद भुगतने को तैयार रहना। यह सुनने के बाद वह डरा सहमा घर आया और बाद में थाने पर भी गया। मगर पुलिस ने यह कहकर घर भेज दिया कि कोई परेशान नहीं करेगा। आप चिंता मत करो। हालांकि इसके बाद वह कचहरी जब भी गया, तब अपनी गवाही देकर चुपचाप चला आया। फिर इन अपराधियों से आमना-सामना नहीं हुआ। मगर उसे डर बना रहता है। वह परेशान इस बात से भी है कि उसके मुकदमे में आरोपी रहे बबलू को पुलिस विवेचना आगे बढ़ाकर शामिल नहीं कर पाई।
एसटीएफ ने दबोचा था बबलू को
इस घटना के बाद पुलिस ने बबलू को गांव में घेरा था। मगर वह पुलिस मजामत कर भाग गया था। फरारी में उसने बन्नादेवी में एक चोरी व हत्या को अंजाम दिया। इस पर उसके ऊपर इनाम घोषित हुआ और फिर एसटीएफ उसे उज्जैन के पास से गिरफ्तार करके लाई थी।
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ये घटना नवंबर 2012 की है। जब सर्द रात में सासनी गेट इलाके में डकैती की एक घटना हुई और उसमें 25-26 वर्षीय गृहस्वामिनी संग दुष्कर्म को अंजाम दिया गया था। इसके चलते महिला गर्भवती तक हुई थी। जनवरी 2013 में इस घटना का खुलासा करते हुए पुलिस ने कुछ माल बरामदगी कर कई अपराधियों को जेल भेजा था।
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इसी दौरान गिरफ्तार किया गया कोतवाली भुजपुरा क्षेत्र का नाजिम कलुआ मडराक से पुलिस अभिरक्षा से भाग गया था। इससे पहले भी वह कोतवाली पुलिस की अभिरक्षा से एक मर्तबा भागा था। बाद में उसकी मथुरा में गिरफ्तारी हुई और दो वर्ष बाद वह मथुरा से भी न्यायालय में पेशी के दौरान पुलिस अभिरक्षा से भागा था। दुष्कर्म व डकैती के इस मुकदमे में नाजिम गैंग के सरगना लोधा के बबलू मेवाती का भी नाम आया।
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मगर उस घटना में बबलू के नाम से बबलू का भाई जेल चला गया और खुद बबलू ने उस घटना के समय अपनी गिरफ्तारी किसी अन्य मुकदमे में जेल में दिखा दी थी। हालांकि परिवार ने इस बात का विरोध किया था। मगर उस समय पुलिस ने इस सच की विवेचना करने के बजाय मसला दाखिल दफ्तर कर दिया था। इधर, बृहस्पतिवार को जब सासनी गेट के दुष्कर्म व डकैती पीड़ित परिवार को नाजिम की मौत की खबर मिली तो परिवार ने राहत और खुशी जताई। परिवार के मुखिया ने कहा है कि पुलिस से अभी तक न्याय नहीं मिल सका। मुकदमा अदालत में है। मगर कुदरत ने खुद न्याय दे दिया है।
मुकदमा में गवाही से मुकरने को मिलती रही हैं धमकियां
डकैती व दुष्कर्म पीड़ित परिवार के मुखिया मुकदमे की पैरवी कर रहे हैं। वे बताते हैं कि मुकदमा अपर सत्र न्यायालय में विचाराधीन हैं। उनके परिवार के तीन सदस्यों की गवाही हो चुकी हैं। अब 11 जुलाई को मुकदमा लेखक तलब किया गया है। करीब तीन-चार माह पहले उसे कचहरी में बबलू मेवाती, गुलफाम व अन्य कुछ आरोपी मिले थे। उन्होंने उसे पहले प्यार से यह कहते हुए समझाया कि मुकदमे में तू हमारा कुछ नहीं करा सकता। बाद में उन्होंने धमकी दीं कि हम हर डकैती में दुष्कर्म को अंजाम देते हैं। यही हमारा पेशा है। अब तो तेरी बेटी भी बड़ी हो गई है। अगर हमारी बात नहीं मानी तो परिणाम खुद भुगतने को तैयार रहना। यह सुनने के बाद वह डरा सहमा घर आया और बाद में थाने पर भी गया। मगर पुलिस ने यह कहकर घर भेज दिया कि कोई परेशान नहीं करेगा। आप चिंता मत करो। हालांकि इसके बाद वह कचहरी जब भी गया, तब अपनी गवाही देकर चुपचाप चला आया। फिर इन अपराधियों से आमना-सामना नहीं हुआ। मगर उसे डर बना रहता है। वह परेशान इस बात से भी है कि उसके मुकदमे में आरोपी रहे बबलू को पुलिस विवेचना आगे बढ़ाकर शामिल नहीं कर पाई।
एसटीएफ ने दबोचा था बबलू को
इस घटना के बाद पुलिस ने बबलू को गांव में घेरा था। मगर वह पुलिस मजामत कर भाग गया था। फरारी में उसने बन्नादेवी में एक चोरी व हत्या को अंजाम दिया। इस पर उसके ऊपर इनाम घोषित हुआ और फिर एसटीएफ उसे उज्जैन के पास से गिरफ्तार करके लाई थी।