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कोरोना से डरें नहीं डटकर मुकाबला करें
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डा. कुलदीप राजपुरी।
- फोटो : CITY OFFICE
कोरोना वायरस को लेकर लोगों में जबरदस्त दहशत है। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही मानो जैसे शरीर का खून सूख जाता है। अगले 24 से 36 घंटे तक ज्यादा तनाव रहता है। उसके बाद धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगता है। संक्रमित मरीज को अपने से ज्यादा चिंता बच्चों और परिजनों की होती है। लेकिन घबराये नहीं, इसका हिम्मत से मुकाबला करें।
सराय मान सिंह के युवा सामाजिक कार्यकर्ता चंद रोज पहले कोरोना को पराजित कर आइसोलेशन वार्ड से बाहर आए हैं। अतरौली के कोविड-19 अस्पताल की सुविधाओं की तारीफ करते नहीं थक रहे। उनका सुझाव है कि कोविड हॉस्पिटल में एक नियमित काउंसलर होना चाहिए, जो मरीजों से दोस्ताना माहौल में काउंसलिंग करें। उनका कहना है कि मन में बार-बार यह ख्याल आता है कि उनका एवं उनके परिवार का क्या होगा? वह अच्छा होंगे या नहीं? ऐसे में काउंसलर का साथ मिल जाए तो शुरू के कुछ दिनों का तनाव बेहद कम हो जाएगा।
मलखान सिंह जिला अस्पताल की काउंसलर संक्रमित मरीजों की टेली काउंसलिंग के माध्यम से उपचार करती है। हम लोग भी अपने स्तर से काउंसिलिंग करते हैं। मरीजों के भोजन, दवा से लेकर अन्य सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है। मरीज यहां डरे हुए आते हैं लेकिन हंसते हुए लौटते हैं। यहां रहने के दौरान उनके मन का डर समाप्त हो जाता है। - डॉ. कुलदीप राजपुरी, अधीक्षक, सीएचसी अतरौली
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भर्ती होने के बाद सभी मरीजों का फोन नंबर मेरे पास आ जाता है। फोन के माध्यम से संपर्क में रहती हूं। वे लोग तरह-तरह के सवाल पूछते हैं। जैसे कि एक बार ठीक होने के बाद दोबारा तो कोरोना नहीं होगा, ठीक होंगे या नहीं, जल्दी स्वस्थ होने के लिए क्या करना चाहिए आदि..। मरीजों को समझाने के बाद उनका नजरिया बदलता है और उसका असर साफ-साफ दिखता भी है।
- पूजा कुलश्रेष्ठ, क्लीनिकल मनोचिकित्सक, मलखान सिंह जिला अस्पताल
कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं तो डरने की कोई बात नहीं है। हिम्मत से मुकाबला करें। ज्यादा सोच-विचार कर दुखी होने की जरूरत नहीं है। मन के विचार को सकारात्मक रखें। आइसोलेशन वार्ड में अच्छा भोजन करें। भरपूर नींद लें और संभव हो तो रोज सुबह योगाभ्यास व व्यायाम करें। साथी मरीजों से शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए दोस्ताना संबंध रखें।
- कोरोना को पराजित करने वाला युवक
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सराय मान सिंह के युवा सामाजिक कार्यकर्ता चंद रोज पहले कोरोना को पराजित कर आइसोलेशन वार्ड से बाहर आए हैं। अतरौली के कोविड-19 अस्पताल की सुविधाओं की तारीफ करते नहीं थक रहे। उनका सुझाव है कि कोविड हॉस्पिटल में एक नियमित काउंसलर होना चाहिए, जो मरीजों से दोस्ताना माहौल में काउंसलिंग करें। उनका कहना है कि मन में बार-बार यह ख्याल आता है कि उनका एवं उनके परिवार का क्या होगा? वह अच्छा होंगे या नहीं? ऐसे में काउंसलर का साथ मिल जाए तो शुरू के कुछ दिनों का तनाव बेहद कम हो जाएगा।
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मलखान सिंह जिला अस्पताल की काउंसलर संक्रमित मरीजों की टेली काउंसलिंग के माध्यम से उपचार करती है। हम लोग भी अपने स्तर से काउंसिलिंग करते हैं। मरीजों के भोजन, दवा से लेकर अन्य सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है। मरीज यहां डरे हुए आते हैं लेकिन हंसते हुए लौटते हैं। यहां रहने के दौरान उनके मन का डर समाप्त हो जाता है। - डॉ. कुलदीप राजपुरी, अधीक्षक, सीएचसी अतरौली
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भर्ती होने के बाद सभी मरीजों का फोन नंबर मेरे पास आ जाता है। फोन के माध्यम से संपर्क में रहती हूं। वे लोग तरह-तरह के सवाल पूछते हैं। जैसे कि एक बार ठीक होने के बाद दोबारा तो कोरोना नहीं होगा, ठीक होंगे या नहीं, जल्दी स्वस्थ होने के लिए क्या करना चाहिए आदि..। मरीजों को समझाने के बाद उनका नजरिया बदलता है और उसका असर साफ-साफ दिखता भी है।
- पूजा कुलश्रेष्ठ, क्लीनिकल मनोचिकित्सक, मलखान सिंह जिला अस्पताल
कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं तो डरने की कोई बात नहीं है। हिम्मत से मुकाबला करें। ज्यादा सोच-विचार कर दुखी होने की जरूरत नहीं है। मन के विचार को सकारात्मक रखें। आइसोलेशन वार्ड में अच्छा भोजन करें। भरपूर नींद लें और संभव हो तो रोज सुबह योगाभ्यास व व्यायाम करें। साथी मरीजों से शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए दोस्ताना संबंध रखें।
- कोरोना को पराजित करने वाला युवक

पूजा कुलश्रेष्ठ।- फोटो : CITY OFFICE