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जबरन ली जमीन तो बिगड़ेंगे टप्पल के हालात
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2016 02:01 AM IST
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जमीन
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टप्पल क्षेत्र के किसान भाजपा की अलीगढ़ लोकसभा क्षेत्र प्रभारी व पूर्व ब्लॉक प्रमुख टप्पल शशी सिंह और भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष चौधरी सतेंद्रपाल सिंह के नेतृत्व में मंडलायुक्त चंद्रकांत से उनके निवास पर मिले। इन लोगोें ने कमिश्नर से भूमि अधिग्रहण व फसल के मुआवजे सहित कई मसले उठाए।
किसानों ने मंडलायुक्त को बताया कि वर्ष 2009 व 2010 में टप्पल ब्लॉक के टप्पल, जिकरपुर, जहानगढ़, कंसेरा व कृपालपुर में भूमि अधिग्रहण हुआ था। इसमें से 108 हेक्टेयर जमीन का करार किसानों ने नहीं किया था। चूंकि शासनादेश में जमीन को सहमति से लेना था। ऐसे में जब सहमति नहीं बनी तो यह तय हुआ था कि जो किसान जमीन नहीं देना चाहते उनकी जमीन छोड़ दी जाएगी।
शेष रह गया फसल मुआवजा मिलता रहेगा। लेकिन चार साल से किसानों को फसल मुआवजा नहीं मिला है और इससे किसान काफी परेशान हैं। इन लोगों ने बताया कि जिस 108 हेक्टेयर जमीन का करार नहीं हुआ था। उसका अवार्ड घोषित किया जा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर किसानों ने कहा कि यदि किसानों की जमीन जबरिया छीनी गई तो टप्पल के हालत फिर बिगड़ सकते हैं। उक्त किसानों व नेताओं ने कहा कि जमीन किसानों की सहमति से ली जाए।
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नए भूमि अधिग्रहण कानून के हिसाब से सर्किल रेट का चौगुना मिले तो किसान करार करने को तैयार हैं। किसानों ने कमिश्नर से यह भी कहा कि आखिर जमीन का अवार्ड अधिकारी क्यों घोषित करना चाहते हैं। क्या सरकार किसानों की जमीन छीनना चाहती है। शेष फसल मुआवजा देने के अलावा ओलावृष्टि का सर्वे ठीक तरीके से कराने की मांग भी उठाई गई। साथ ही पिछले साल बिना मौसम की बरसात और ओलावृष्टि से बर्बाद फसल का उचित मुआवजा जल्दी दिलाने की भी मांग की गई। कमिश्नर से मिलने वालों में रिषीपाल सिंह, कल्लू बघेल, रमेश शर्मा, नारायण, देवू, सुखवीर सिंह आदि थे।
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किसानों ने मंडलायुक्त को बताया कि वर्ष 2009 व 2010 में टप्पल ब्लॉक के टप्पल, जिकरपुर, जहानगढ़, कंसेरा व कृपालपुर में भूमि अधिग्रहण हुआ था। इसमें से 108 हेक्टेयर जमीन का करार किसानों ने नहीं किया था। चूंकि शासनादेश में जमीन को सहमति से लेना था। ऐसे में जब सहमति नहीं बनी तो यह तय हुआ था कि जो किसान जमीन नहीं देना चाहते उनकी जमीन छोड़ दी जाएगी।
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शेष रह गया फसल मुआवजा मिलता रहेगा। लेकिन चार साल से किसानों को फसल मुआवजा नहीं मिला है और इससे किसान काफी परेशान हैं। इन लोगों ने बताया कि जिस 108 हेक्टेयर जमीन का करार नहीं हुआ था। उसका अवार्ड घोषित किया जा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर किसानों ने कहा कि यदि किसानों की जमीन जबरिया छीनी गई तो टप्पल के हालत फिर बिगड़ सकते हैं। उक्त किसानों व नेताओं ने कहा कि जमीन किसानों की सहमति से ली जाए।
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नए भूमि अधिग्रहण कानून के हिसाब से सर्किल रेट का चौगुना मिले तो किसान करार करने को तैयार हैं। किसानों ने कमिश्नर से यह भी कहा कि आखिर जमीन का अवार्ड अधिकारी क्यों घोषित करना चाहते हैं। क्या सरकार किसानों की जमीन छीनना चाहती है। शेष फसल मुआवजा देने के अलावा ओलावृष्टि का सर्वे ठीक तरीके से कराने की मांग भी उठाई गई। साथ ही पिछले साल बिना मौसम की बरसात और ओलावृष्टि से बर्बाद फसल का उचित मुआवजा जल्दी दिलाने की भी मांग की गई। कमिश्नर से मिलने वालों में रिषीपाल सिंह, कल्लू बघेल, रमेश शर्मा, नारायण, देवू, सुखवीर सिंह आदि थे।