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अलीगढ़ : अभी ई-बस स्टेशन का फर्श तैयार नहीं, कैसे लगेंगे चार्जिंग प्वाइंट
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प्रभारी नगर आयुक्त की चेतावनी के बावजूद सोमवार को इलेक्ट्रिक बस स्टेशन में एक भी स्थायी चार्जिंग प्वाइंट नहीं लग सका। अभी तो फर्श ही तैयार नहीं है। ऐसे में चार्जिंग प्वाइंट नहीं लग सकते हैं। जबकि चार्जिंग प्वाइंट को गंदगी-धूल-बारिश से बचाने के लिए टीन शेड भी नहीं लगा है। इसके चलते अभी सभी ई-बसों के संचालन में और देरी होगी। मुख्यमंत्री द्वारा दी गई करोड़ों रुपयों की सौगात जनता को लाभ नहीं पहुंचा पा रही है।
बता दें कि बृहस्पतिवार को प्रभारी नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त ने सारसौल ई-बस चार्जिंग स्टेशन का औचक निरीक्षण किया। धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य को देखकर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और सोमवार तक हर हाल में सभी छह चार्जिंग प्वाइंट स्थापित कर सभी बसों के संचालन की चेतावनी दी थी, लेकिन इसका असर सोमवार को दिखाई नहीं दिया। उनके कहने के बावजूद छह तो दूर की बात। अभी एक भी चार्जिंग प्वाइंट नहीं लगा है। क्योंकि ई-बस स्टेशन का फर्श अभी तक तैयार नहीं हुआ है। दीवारों के ऊपर टीनशेड नहीं हुई है। ऐसे में चार्जिंग प्वाइंट और चार्जर खुले में नहीं रखे जा सकते हैं। देखना यह होगा कि चेतावनी के बावजूद कोई काम न होने पर क्या कार्रवाई अमल में लाई जाती है।
सवा करोड़ रुपये की है बस, लोगों को उपलब्धता का इंतजार
सवा करोड़ रुपये की लागत वाली इलेक्ट्रिक बस शहर को अभी तक 15 मिली हैं। जिनमें से पांच ई-बस दो रूटों पर चल रही हैं, जबकि दस ई-बस सरसौल परिवहन निगम के वर्कशॉप में धूल खा रही हैं। लोगों को यह ई-बस सहज उपलब्ध नहीं हो रही हैं। राह चलते अगर बस मिल जाए तो उसमें चढ़ जाते हैं। इंतजार करने के बावजूद लोग बस को नहीं पकड़ पाते हैं। शहरवासियों की मांग है कि सभी प्वाइंट पर हर एक घंटे में कम से कम एक बस के गुजरने की समयसारिणी बनाई जाए। जिसके आधार पर लोग बसों को अपने गंतव्य के लिए पकड़ पाएंगे।
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बता दें कि बृहस्पतिवार को प्रभारी नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त ने सारसौल ई-बस चार्जिंग स्टेशन का औचक निरीक्षण किया। धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य को देखकर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और सोमवार तक हर हाल में सभी छह चार्जिंग प्वाइंट स्थापित कर सभी बसों के संचालन की चेतावनी दी थी, लेकिन इसका असर सोमवार को दिखाई नहीं दिया। उनके कहने के बावजूद छह तो दूर की बात। अभी एक भी चार्जिंग प्वाइंट नहीं लगा है। क्योंकि ई-बस स्टेशन का फर्श अभी तक तैयार नहीं हुआ है। दीवारों के ऊपर टीनशेड नहीं हुई है। ऐसे में चार्जिंग प्वाइंट और चार्जर खुले में नहीं रखे जा सकते हैं। देखना यह होगा कि चेतावनी के बावजूद कोई काम न होने पर क्या कार्रवाई अमल में लाई जाती है।
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सवा करोड़ रुपये की है बस, लोगों को उपलब्धता का इंतजार
सवा करोड़ रुपये की लागत वाली इलेक्ट्रिक बस शहर को अभी तक 15 मिली हैं। जिनमें से पांच ई-बस दो रूटों पर चल रही हैं, जबकि दस ई-बस सरसौल परिवहन निगम के वर्कशॉप में धूल खा रही हैं। लोगों को यह ई-बस सहज उपलब्ध नहीं हो रही हैं। राह चलते अगर बस मिल जाए तो उसमें चढ़ जाते हैं। इंतजार करने के बावजूद लोग बस को नहीं पकड़ पाते हैं। शहरवासियों की मांग है कि सभी प्वाइंट पर हर एक घंटे में कम से कम एक बस के गुजरने की समयसारिणी बनाई जाए। जिसके आधार पर लोग बसों को अपने गंतव्य के लिए पकड़ पाएंगे।
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