फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   The first murder took place in 1944 in Aligarh court complex

1944 में हुई थी अलीगढ़ कचहरी परिसर में पहली हत्या

Fri, 15 Jul 2016 12:57 AM IST
दीपक शर्मा
दीपक शर्मा Updated Fri, 15 Jul 2016 12:57 AM IST
विज्ञापन
बुधवार को दीवानी परिसर में हुई जमानतदार ओम प्रकाश जाटव की हत्या की दिन दहाड़े हत्या की घटना के बाद सुरक्षा का मुद्दा उठा है।
विज्ञापन

गुरुवार को मामले का खुलासा हो गया लेकिन यह प्रश्न उठता रहा कि आखिर दीवानी परिसर में किसी अभियुक्त की हत्या करने की पहली घटना कौन सी हुई होगी? अतीत की परतें तलाशने के क्रम में पता चला कि दीवानी कचहरी के ज्ञात इतिहास में 1944 में परिसर के भीतर ही एक मवेशी चोर को कुछ लोगों ने धारदार हथियारों और लाठी डंडों से पीटा था। (स्रोत: सिविल लाइफ ऑफ सिटी, सम अनटोल्ड स्टोरी: लेखक स्वर्गीय रियाज हाशमी) बाद में उस मवेशी चोर की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद तत्कालीन अंग्रेज अफसरों और न्यायिक अधिकारियों के समक्ष परिसर की सुरक्षा का मुद्दा आया था।
इतिहास के शोधार्थी चौ. परमवीर सिंह कहते हैं कि अतीत को कुरदने पर पता चलता है कि आजादी से पहले के इस समय तक दीवानी परिसर की वाउंड्रीवाल इस तरह की नहीं थी। साथ ही इतनी गहमा गहमी भी नहीं थी।
विज्ञापन

टिन शेड में बैठने वाले अधिवक्ताओं की संख्या बेहद कम थी। मुख्य भवन में ही चेंबर आवंटित थे। परिसर में पेड़ों का झुरमुट आदि भी था। उन दिनों लोधा और खैर क्षेत्र के आसपास एक मवेशी चोर गिरोह के सरगना का बहुत ही आतंक था। वह पशु चुरा कर दूसरे जिलों के किसानों को बेचा करता था। चोरी होने वाले पशुओं में बैलों की जोड़ी आदि शामिल रहती थी। इसके अलावा वह आतंक का पर्याय भी था।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्षेत्र के ग्रामीणों को जब पता चला कि अमुक दिन उसकी अदालत में पेशी है तो वह अलग- समूहों में दीवानी कचहरी के आसपास इकट्ठा हो गए। मवेशी चोर सरगना को दो पुलिस कर्मी अदालत लाए। पहले से तय योजना के मुताबिक करीब 35-40 ग्रामीणों ने पुलिस कर्मियों की आंखों में मिर्च आदि डाल कर सरगना को अपने कब्जे में कर लिया और साथ लाए धारदार हथियार, लाठी डंडों से हमला बोल दिया।
जब तक दोनों पुलिस कर्मी मिर्च के प्रभाव से बाहर आते, तब तक ग्रामीणों ने सरगना को मरणासन्न हालत में कर दिया था। बाद में उपचार के दौरान मलखान सिंह जिला अस्पताल (उस समय सिविल हॉस्पिटल) मे ंउसकी मौत हो गई। इस प्रकरण में हमलावरों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ लेकिन पुलिस कर्मी किसी को भी पहचानने में नाकाम रहे।

1955 में हत्या की घटना के बाद दीवार बनाने की मांग उठी
मवेशी चोर सरगना के बाद काफी समय तक दीवानी परिसर में माहौल बेहद अनुशासित रहा। उस समय अधिवक्ताओं की संख्या बेहद कम थी और गहमा गहमी भी बेहद सीमित रहती थी। करीब एक दशक बाद 1955 में दीवानी परिसर के पास ही एक सनसनी खेज हत्या की घटना के बाद परिसर की दीवार बनाकर उसे पूरी तरह कवर करने की बात उठी। 1955 में परिसर के पास ही अदालत में तारीख करने के लिए आए एक वादकारी की बेहद जघन्य तरीके से धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। बाद में पता चला कि उसे तलवार से काटा गया था।
दीवानी परिसर में हुई कुछ प्रमुख हत्या की घटनाएं
a 1986 में लोधा के गांव ल्होसरा के तीन अभियुक्तों की हत्या की गई
a 1991 में पुलिस कस्टडी में आए तीन अभियुक्तों की हत्या की गई
a 2001 में तारीख पर आए अतरौली के चकाथल निवासी सत्यवीर चौधरी की हत्या
a 2002 में हरदुआगंज के बुढ़ासी निवासी आस मोहम्मद की हत्या की गई
a 2007 में परिसर में ही कुख्यात रॉबी और कालू गुट में गोलियां चलीं
a 2013 में हत्या के आरोपी होशियार सिंह को गोलियों से भूना
a 2014 में सिपाही को गोली मार कर बंदी को छुड़ाया गया
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed