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अलीगढ़ : ई-बसों का किराया ज्यादा, स्टॉपेज भी सही नहीं, ऑटो व ई-रिक्शा से सफर करे यात्री

Tue, 08 Mar 2022 12:56 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 12:56 AM IST
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The fare of e-buses is high, stoppage is also not correct, passengers should travel by auto and e-rickshaw
क्वार्सी चौराहे पर शहर के अंदर जाने के लिए सवारियों के अभाव में खाली खड़ी ई बस। - फोटो : CITY OFFICE
मुख्यमंत्री की इलेक्ट्रिक बस (ई-बस) योजना शहर के चार रूटों पर संचालित तो हो गई है। लेकिन इसके संचालन में कई सारी खामियां उजागर हो रही हैं। यात्रियों की मानें तो बिना सोचे समझे रूट के स्टॉपेज बनाए गए हैं और किराया भी ज्यादा है। इसकेे अलावा, जिन रूट पर सवारियां हैं, वहां पर ई-बसों की उपलब्धता नहीं हैं। इसी प्रकार जिस रूट पर ई-बसें हैं, वहां किराया अधिक होनेे के कारण लोग ऑटो, टेंपो, ई-रिक्शा में सफर करना पसंद करते हैं।
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ई-बस यात्रियों ने बताया कि अधिकांश रूट पर स्टॉपेज की समस्या है। ई-बस के मुकाबले कुछ स्टॉपेज पर टेंपो व ई-रिक्शा से सफर करना ज्यादा सस्ता है। शहर के अंदर आसपास के गांव से प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों का आवागमन रहता है। ऐसे में लोग अपने घर से टेंपो में बैठकर सीधे अलीगढ़ आ जाते हैं। कुछ स्टॉपेज व किराये में संशोधन करना चाहिए। अगर नहीं कर सकते हैं तो अंतिम स्टॉपेज से तीन-चार किलोमीटर बढ़ाया जाए। पहला रूट खेरेश्वर से बोनेर तक है। इस रूट पर खेरेश्वर स्टॉपेज को लोधा और बोनेर स्टॉपेज को पनैठी तक बढ़ाया जाए। दूसरा रूट हरदुआगंज चौराहे से महरावल तक है। हरदुआगंज चौराहे की जगह बस कम से कम साधू आश्रम तक जानी चाहिए। जबकि महरावल से आगे पचपेड़ा तक रूट बढ़ाया जाए। तीसरा रूट मडराक से मेडिकल कॉलेज है। चौथा रूट शिवदान सिंह कॉलेज से हरदुआगंज है। हरदुआगंज को साधू आश्रम और शिवदान सिंह कॉलेज की जगह हस्तपुर तक बस चलनी चाहिए। पांचवां रूट मंजूरगढ़ी से छर्रा अड्डा तक है। मंजूरगढ़ी की जगह इस रूट पर जमालपुर तक बसों का संचालन होना चाहिए।
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ये समस्या आती है
- लोगों ने बताया कि हरदुआगंज से गांधी आई अस्पताल तक 15 रुपये किराया है। बीच में क्वार्सी स्टॉपेज है। जहां उतरने के लिए भी लोगों को 15 रुपये चुकाने पड़ते हैं। जबकि टेंपो से दस रुपये में लोग सफर करते हैं। ऐसे में या तो किराया कम किया जाए। नहीं तो हरदुआगंज की जगह 15 रुपये में साधू आश्रम तक सफर कराया जाए। सैकड़ों मजदूर फिर इस बस का लाभ ले सकेंगे। इसी प्रकार हरदुआगंज से शिवदान सिंह कॉलेज तक बस चल रही है। शिवदान सिंह कॉलेज से सवारी नहीं मिलती हैं। अगर तीन किलोमीटर दूर हस्तपुर तक बस जाए तो एक साथ चार-पांच गांव की सवारियां मिल सकती हैं। इसी प्रकार एटा चुंगी से बोनेर तक सवारियां नहीं बैठती हैं। पनैठी जाने वाली सवारी टेंपो से जाना पसंद करती है।
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खाली चलती हैं ई-बसें, परिचालक जेब से काटते हैं टिकट
- शहर के रूट और अधिक किराये के चलते इन स्टॉपेज पर सवारियां बैठती ही नहीं हैं। ऐसे में ई-बसें खाली ही चलती हैं। जब कोई सवारी नहीं मिलती है तो परिचालक अपनी जेब से टिकट काटकर बस को आगे बढ़ाते हैं।
हॉर्न हुआ खराब, टीम ने आकर किया ठीक
- शिवदान सिंह कॉलेज से हरदुआगंज तक चलने वाली एक ई-बस का सोमवार शाम करीब चार बजे हॉर्न खराब हो गया था। ऐसे में एक टीम सारसौल ई-बस स्टेशन से क्वार्सी चौराहे आई और दस मिनट में नया हॉर्न लगा दिया। इसके बाद बस सीधे शिवदान सिंह कॉलेज के लिए रवाना हो गई।
- क्वार्सी से हरदुआगंज तक का किराया टेंपो और ई-रिक्शा से अधिक है। किराया कम नहीं कर पा रहे तो कम से कम यह रूट साधू आश्रम तक बढ़वाया जाए। तब कई लोग बसों में बैठेंगे। - कैलाश कुमार, निवासी ग्वालरा साधु आश्रम।
- हरदुआगंज से सासनीगेट जाना है। लंबा रूट तो ठीक है। लेकिन शिवदान सिंह रूट का कोई मतलब नहीं है। यह रूट कम से कम हस्तपुर तक होना चाहिए। कोई सवारी शिवदान सिंह पर क्यों आएगी। -अनिल गुप्ता, खिरनीगेट।

किराया और रूट की समस्या संज्ञान में है। सर्वे कराकर रूट को बढ़वा सकते हैं। सभी इलेक्ट्रिक बसें जनता की सुविधा के लिए हैं। उनके हित को देखते हुए जल्द रूट या किराये में संशोधन करवाएंगे। - मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम।
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