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बाइक टकराने पर हुए विवाद में हुई जमानतदार की हत्या

Fri, 15 Jul 2016 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 15 Jul 2016 12:57 AM IST
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The dispute resulted in the killing of guarantors bike collide
बाइक टकराने पर हुए विवाद में हुई जमानतदार की हत्या - फोटो : रुपेश
बुधवार को दीवानी परिसर में दिन दहाड़े बाइक सवार हमलावरों द्वारा की गई जवां के चाऊपुर निवासी जमानतदार ओम प्रकाश जाटव की हत्या के मामले में पुलिस ने 24 घंटे से भी कम समय में मामले का खुलासा करते हुए एक हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो फरार हैं। घटना के मूल में बुधवार को ही दीवानी के गेट पर हमलावरों की बाइक का ओमप्रकाश से टकराने का विवाद निकलकर आया है।
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गुरुवार को पुलिस लाइन के सभागार में प्रेसवार्ता में एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव और सीओ तृतीय राजीव सिंह ने बताया कि दीवानी परिसर में हत्या करने के बाद भागते समय हत्यारों के चेहरे और बाइक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। इसी के आधार पर इनकी तलाश की जा रही थी। इस हमले में एक हमलावर इमरान, जिसे पकड़ा गया है, वह भी जख्मी हुआ है। उसके हाथ और कमर में गोली चलाते समय छर्रे लगे हैं।
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पकड़ा गया आरोपी इमरान पुत्र सलीम निवासी चांदपला थाना खैर का रहने वाला है। उसकी गांव के ही एक पक्ष से रंजिश चल रही है। जिसमें दोनों पक्षों के लोग जेल में निरुद्ध हैं। बुधवार को इमरान ऊपर कोट निवासी शाहरुख और सराय मियां देहली गेट निवासी फैजान पुत्र अन्ना को साथ लेकर अपने वकील हरिनारायण से मिलने आया था। यह लोग लाल रंग की बाइक पर सवार होकर कचहरी आए। फैजान गाड़ी चला रहा था, इमरान बीच में बैठा और और सबसे पीछे बैठे शाहरुख के पास 315 बोर का तमंचा भी था।
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गेट पर ही इनकी बाइक ओम प्रकाश की साइकिल से टकरा गई। जिसके बाद दोनों पक्षों में विवाद हो गया। इमरान ने बताया कि ओम प्रकाश ने उन्हें गाली दे दी और भला बुरा कहा। उस वक्त तो हमलावर वहां से चले गए। कुछ देर बाद वकील से मिलकर लौट रहे हमलावरों का आमना सामना ओम प्रकाश से हो गया, जिसके बाद बाइक पर सबसे पीछे बैठे शाहरुख ने गोली चला दी जो ओम प्रकाश के सीने में लगी। गोली चलने से बीच में बैठा इमरान भी जख्मी हुआ।
सीसीटीवी में कैद न होते तो नामुमकिन था हमलावर को पकड़ना
दीवानी परिसर में हमलावरों का पूरा हुलिया दीवानी के गेट पर लगे सीसीटीवी में कैद हो गया था। सीसीटीवी फुटेज को मौके पर मौजूद लोगों को जब दिखाया गया तो उन्होंने हमलावरों को पहचान लिया। यही नहीं हमले में जो हमलावर घायल हुआ है उसने झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश की और अपने को गांव की रंजिश में घायल होने की बात कहकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन सीसीटीवी में आए क्लीयर फुटेज और अन्य पर्याप्त साक्ष्य के चलते उसके सभी तर्क झूठे साबित हुए। ओम प्रकाश की हत्या अचानक मोटरसाइकिल टकराने और उसके बाद हुई गालीगलौज के बाद रंगदारी में हुई।
मृतक के परिवार और हमलावरों का दूर दूर तक कोई ताल्लुक भी नहीं था। अगर सीसीटीवी में हमलावर कैद नहीं होते तो इमरान की पूरी योजना थी कि वह अपने घायल होने को खैर में चल रही दूसरे पक्ष की रंजिश प्रकरण में हमला दिखा देता। पत्रकार वार्ता में एसपी सिटी ने भी यही बताया कि इमरान ने अस्पताल पहुंच कर अपना इलाज कराया और जिन लोगों से उसकी रंजिश चल रही है उन्हें फंसाने का प्रयास किया। सीसीटीवी में वारदात कैद न होती तो इमरान की थ्योरी नकराने का कोई कारण नहीं था। क्योंकि ओम प्रकाश और हमलावरों को एक साथ जोड़कर देखना औचित्यहीन ही नजर आता।
हथियार सहित प्रवेश खतरनाक
अलीगढ़। दीवानी परिसर में तीन हमलावर एक बाइक पर सवार होकर और तमंचा लेकर अंदर प्रवेश कर गए। वकील कहते हैं कि यह तो वह मामला है जो प्रकाश में आ गया है। कितने ही अपराधी तत्व इसी तरह बिना चेकिंग के तमंचा आदि लेकर घुस आते होंगे और वह भविष्य में इससे भी गंभीर वारदात को अंजाम दे सकते हैं। वकीलों के साथ साथ न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए भी ये बड़ा खतरा है। अधिवक्ता दिनेश बाबू कहते हैं कि अगर गेटों पर वाहनों का प्रतिबंध रहता और चेकिंग होती तो हमलावर तमंचा लेकर प्रवेश ही नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में हमलावरों का ओमप्रकाश से विवाद हो सकता था लेकिन उसकी जान बच जाती।
वकील हड़ताल पर पुलिस आराम पर
अलीगढ़। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वकील आरपार की लड़ाई लड़ने के मूड में आ गए हैं। गुरुवार को उन्होंने हड़ताल की और अपना विरोध जताया। वकीलों की हड़ताल के चलते जिनके मुकदमे और अन्य न्यायिक काम थे, उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। दीवानी परिसर के गेटों पर भी सुरक्षा की स्थिति बेहद ढुलमुल नजर आई। जिन पुलिस वालों को चेकिंग आदि के लिए तैनात किया गया, वह बैठे रहे। जबकि साइकिल स्टैंड के ठेकेदार का आदमी गेट पर भाग-भाग कर वाहनों को रोकता रहा। मैटल डिटेक्टर पर रूमाल पड़ा रहा और उमस भरी गर्मी में पुलिस कर्मी पेड़ के नीचे कुर्सी पर बैठे रहे।

सुरक्षा बढ़ाने की मांग की
अलीगढ़। सपा अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव अब्दुल रईस एडवोकेट ने दीवानी परिसर की सुरक्षा के लिए जिलाधिकारी और एसएसपी से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अधिवक्ताओं के कल्याण और सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन की कमी के चलते घटनाओं की पुनरावृत्ति हो रही है। पूरे घटनाक्रम से मुख्यमंत्री को अवगत कराएंगे और दोषी पुलिस अफसराें पर कार्रवाई कराएंगे।
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