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बिटिया की शादी में पूरे नहीं हो सके दिल के अरमान

Fri, 25 Nov 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Fri, 25 Nov 2016 12:53 AM IST
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The daughter's wedding could not heart yearn
वंशिका हाथों में लगी मेंहदी को दिखाती - फोटो : amar ujala
नोटबंदी से शादी वाले परिवारों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धूमधाम से शादी करने की इनकी तमन्ना नोटबंदी के चलते अधूरी रह गई है। शादी के कार्ड पर इन परिवारों को बार-बार धक्के खाने के बाद भी ढाई लाख रुपया नहीं मिला और अपने पास पहले से जमा नोटों को यह लोग बदल नहीं पाए।
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ऐसे में कई परिवारों ने तोे जैसे-तैसे उधारी लेकर शादी की रस्म ही अदा की और इसे धूमधाम तरीके से नहीं कर पाए। इसको को लेकर काफी परेशान हंै। लोगों का कहना है कि हमारे रुपये ही हमको नहीं मिल पा रहे। शादी का कार्ड दिखाने पर  बैंक वाले कई शर्तें लगा देते हैं, उन शर्तों को पूरा करना असंभव है।
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अलीगढ़। सूर्य विहार कॉलोनी निक ट रावण टीला निवासी देवेंद्र कुमार शर्मा जिला उद्योग विभाग में चालक हैं। गुरुवार को उनकी बेटी वंशिका की शादी थी और देवेंद्र ऐन वक्त तक रुपयोें का इंतजाम करने में लगे थे। देवेंद्र के पास बैंक में अपनी बेटी की शादी के लिए पर्याप्त धनराशि जमा थी, लेकिन नोटबंदी ने उनके सामने ऐसी समस्या पैदा कर दी कि वह अपने ही पैसे को बेटी की शादी में इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे।
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देवेंद्र बताते हैं कि अपनी बेटी वंशिका की शादी जुलाई के महीने में तय की थी। उन्होंने इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी थी कि अचानक मोदी सरकार का नोटबंदी का फैसला आया और वह काफी परेशान हो गए। उसके बाद जब उन्हें यह जानकारी मिली कि जिन घर में शादी है वो बैंक से ढाई लाख रुपये निकाल सकते हैं, इस पर उन्होंने  बैंक में चक्कर लगाने शुरू कर दिए।  

उन्होंने बताया कि बैंक के मैनेजर ने उनसे काफी औपचारिकताएं पूरी करवाई। शादी के कार्ड से लेकर शपथ पत्र और आयु के बाबत बेटी के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की फोटोकॉपी भी ले ली। उसके बाद बैंक प्रशासन उनसे शादी में खर्च का बिल मांगने लगा। अब आखिर वह चाट वाले से लेकर पान वाले तक का बिल कहां से लाते। ऐसे में उन्हें बैंक प्रशासन ने चक्कर तो बहुत लगवाए, लेकिन नकदी के नाम पर फूटी कोड़ी नहीं दी।

उन्होंने बताया कि वह अपने परिचितों, पड़ोेसियों और रिश्तेदारों से जैसे-तैसे उधार मांगकर महज इतना ही इंतजाम कर सके हैं कि कम से कम बारातियों और घरातियों की दावत तो हो जाए। उन्होंने वेदना भरे स्वर में कहा कि नकदी के लिए उन्होंने कहां-कहां धक्के नहीं खाए। यदि शादी के कार्ड पहले नहीं बंटे होते तो वह शादी टाल देते।

अलीगढ़। सूर्य विहार कॉलोनी निवासी पीएसी से रिटायर्ड हरगोविंद सिंह चौहान की दो बेटियों पूर्णिमा और अन्नू की आज यानि शुक्रवार की शादी है। इस परिवार के सामने भी नकदी का संकट है। परिवार के  लोगों ने भी शादी के कार्ड को लेकर बैंकों में चक्कर लगाए लेकिन उन्हें पैसा नहीं मिला।


इन दोनों बेटियों की मां सुमन देवी ने बताया कि वह और उनके परिजन कई बैंकों में जा चुके हैं, लेकिन नकदी न होने की बात कही जाती है। इससे विवाह की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। बिना नकदी के बाजार से सामान नहीं आ पा रहा। वह को अच्छा था कि उन्होंने कुछ सामान नोटबंदी से पहले ही खरीद कर रख लिया था। वरना स्थिति और गंभीर होे जाती। अब परिवार के लोग बैंकों की लाइन में खड़े रहें या फिर शादी की तैयारियां कराएं। सब्जी वाले से लेकर हलवाई तक को नकदी चाहिए।
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