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अलीगढ़ः बच्चों को कमरे में कर दिया था बंद, फिर की पत्नी की हत्या
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रमेश विहार कॉलोनी में मेडिकल ऑफिसर डॉ. आस्था अग्रवाल की हत्या कब, क्यों और किन परिस्थितियों में हुई? यह तो मुख्य आरोपी पति अरुण अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद साफ होगा। मगर, इतना जरूर है कि हत्या मंगलवार रात 9:30 बजे से पहले ही हो गई है। इस बात की तस्दीक बच्चों के बयान व सीसीटीवी में हुई है। बच्चों ने स्वीकारा है कि झगड़ा होते समय उन्होंने जब बीच में बोलने का प्रयास किया तो अरुण ने उन दोनों को दूसरे कमरे में कर दिया। इस दौरान कभी अरुण हमलावर हो रहा था तो कभी बचाव में आस्था हमलावर हो रही थी। इसके बाद क्या हुआ, पता नहीं। बस अरुण दोनों बच्चों को घर से लेकर बाहर से ताला लगाकर निकल गया। इसके बाद वह सीसीटीवी में वापस आता कैद नहीं पाया गया है।
पांच भाई-बहनों में तीसरे नंबर की आस्था
आस्था का मायका मूल रूप से छर्रा है। मगर उनके अधिवक्ता पिता मामू भांजा में रहते थे। आस्था की सबसे बड़ी बहन दिल्ली में हैं। इसके बाद दूसरे नंबर का भाई अमित अमेरिका में। आगरा भगवान टॉकीज इलाके में रहने वाली आकांक्षा और सबसे छोटा नोएडा में अभिनव हैं। अभिनव को जिस वक्त सूचना मिली, वे गोवा में थे। वहां से बृहस्पतिवार सुबह ही वे अलीगढ़ पहुंचे। उनके आने के बाद ही पोस्टमार्टम शुरू कराया गया। अब अमित के अमेरिका से आने का इंतजार है। उनके आने पर शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इधर, आस्था-अरुण के दोनों बच्चे अभी ताऊ तरुण के पास ही हैं। शुक्रवार को अंतिम संस्कार के बाद ही उनके विषय में मायके पक्ष के स्तर से कोई निर्णय लिया जाएगा।
मुकदमे में अरुण के प्रेम संबंधों पर हत्या का आरोप
क्वार्सी थाने में बहन आकांक्षा की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में कहा गया है कि उनके बहनोई अरुण के किसी अन्य महिला से प्रेम संबंध हैं। विरोध पर अक्सर वह आस्था के साथ मारपीट करता था। कई बार उसके देवर व जेठ ने भी हाथ उठाया। इस काम में अरुण का पड़ोसी दोस्त अर्पित भी सहयोग करता था। आस्था ने अपनी दोस्त मधु को फोन पर यह मैसेज भी भेजा था कि उसकी हत्या की प्लानिंग हो रही है। अगर कुछ हो जाए तो बच्चों को बहन के पास पहुंचा देना। इस तरह इन्हीं लोगों ने मिलकर प्लानिंग के तहत बहन को मारा है। पुलिस ने इस आधार पर हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज किया है।
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होटल में क्यों कटती थीं रातें, कई अनसुलझे हैं सवाल
डॉ. आस्था अग्रवाल हत्याकांड में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ पुलिस की एक टीम आधा दर्जन सवालों के जवाब तलाशने में भी जुटी है ताकि इस हत्या की गुत्थी सुलझाई जा सके। यह साफ हो सके कि कहीं इस हत्या में पति के साथ कोई बाहरी भी तो शामिल नहीं है? इनमें सबसे अहम सवाल पति की अधिकांश रातें होटलों में कटना? किस महिला से मित्रता होना? ऑक्सीजन कांड से जुड़े किरदारों की भूमिका क्या है? बाहरी पुरुष और कौन संलिप्त हो सकते हैं? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने कई मोबाइल नंबर जांच की जद में लिए हैं। उनकी मदद से गुत्थी सुलझाने के साथ-साथ मुख्य आरोपी तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।
इन सवालों पर गहराई से हो रही पुलिस की जांच
पुलिस की अब तक की जांच में यह तो साफ है कि ऑक्सीजन कांड के समय जो ऑडियो वायरल हुआ था, उसमें खुद अरुण अग्रवाल अपनी पत्नी की हत्या की सुपारी देने की बात कह रहा है। इसके अलावा तथ्य प्रकाश में आया है कि वह एक अन्य व्यक्ति की हत्या की सुपारी देने की बात भी वह कहता था। सवाल है कि आखिर वह व्यक्ति कौन है और क्यों उसकी हत्या की सुपारी देना चाहता था। इसके अलावा दंपती के बीच इतना झगड़ा किस बात को लेकर, क्यों होता था कि अधिकांश रात अरुण अग्रवाल होटल के कमराें में काटता था। क्या जानबूझकर या पत्नी के सामने आने से बचने के लिए। इसके अलावा ऑक्सीजन कांड से जुड़े किरदारों की भूमिका भी इस प्रकरण से जोड़कर जांची जा रही है। सवाल खड़ा हो रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उस समय आस्था की ओर से की गई शिकायत को वापस कराने के लिए फिलहाल किसी तरह का नया विवाद दंपती में शुरू हुआ हो। उसी विवाद ने यह रूप ले लिया हो, क्योंकि जो सुपारी देने संबंधी जो ऑडियो उस समय वायरल हुआ था। वह ऑडियो भी ऑक्सीजन कांड से जुड़े किरदारों की ओर से ही वायरल किया गया था। कुल मिलाकर इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस गंभीरता से खोज रही है। तथ्यों को जुटाने और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
जल्द न हुआ गिरफ्तार तो होगी कइयों से पूछताछ
वैसे पुलिस की तीन टीमें अरुण की तलाश में हर संभावित ठिकाने पर दबिश दे रही हैं। नाते रिश्तेदारियों से लेकर उसके करीबियों, मोबाइल सर्विलांस से प्रकाश में आए लोगों तक पहुंचा जा रहा है। मगर इतना जरूर है कि अगर जल्द अरुण हाथ नहीं आया तो पुलिस पूछताछ की जद में कई लोग आ सकते हैं।
मनीष की भूमिका को भी देखेगी पुलिस
पुलिस जांच में मनीष नाम के युवक की भूमिका भी देखी जाएगी। उसके इस परिवार से क्या रिश्ते थे। किस तरह की नजदीकियां थीं। दंपती में वह किसके ज्यादा नजदीक था। किसका विश्वासपात्र था। उस आधार पर आगे उससे भी तथ्य निकलवाए जा सकते हैं।
- वैसे तो यह हत्या अब तक के तथ्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व नामजदगी के आधार पर साफ है। फिर भी अरुण अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन तथ्यों को भी समझा जा रहा है जो हत्या की वजह हो सकते हैं। उसी अनुसार आगे निर्णय लिया जाएगा।-श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
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पांच भाई-बहनों में तीसरे नंबर की आस्था
आस्था का मायका मूल रूप से छर्रा है। मगर उनके अधिवक्ता पिता मामू भांजा में रहते थे। आस्था की सबसे बड़ी बहन दिल्ली में हैं। इसके बाद दूसरे नंबर का भाई अमित अमेरिका में। आगरा भगवान टॉकीज इलाके में रहने वाली आकांक्षा और सबसे छोटा नोएडा में अभिनव हैं। अभिनव को जिस वक्त सूचना मिली, वे गोवा में थे। वहां से बृहस्पतिवार सुबह ही वे अलीगढ़ पहुंचे। उनके आने के बाद ही पोस्टमार्टम शुरू कराया गया। अब अमित के अमेरिका से आने का इंतजार है। उनके आने पर शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इधर, आस्था-अरुण के दोनों बच्चे अभी ताऊ तरुण के पास ही हैं। शुक्रवार को अंतिम संस्कार के बाद ही उनके विषय में मायके पक्ष के स्तर से कोई निर्णय लिया जाएगा।
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मुकदमे में अरुण के प्रेम संबंधों पर हत्या का आरोप
क्वार्सी थाने में बहन आकांक्षा की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में कहा गया है कि उनके बहनोई अरुण के किसी अन्य महिला से प्रेम संबंध हैं। विरोध पर अक्सर वह आस्था के साथ मारपीट करता था। कई बार उसके देवर व जेठ ने भी हाथ उठाया। इस काम में अरुण का पड़ोसी दोस्त अर्पित भी सहयोग करता था। आस्था ने अपनी दोस्त मधु को फोन पर यह मैसेज भी भेजा था कि उसकी हत्या की प्लानिंग हो रही है। अगर कुछ हो जाए तो बच्चों को बहन के पास पहुंचा देना। इस तरह इन्हीं लोगों ने मिलकर प्लानिंग के तहत बहन को मारा है। पुलिस ने इस आधार पर हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज किया है।
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होटल में क्यों कटती थीं रातें, कई अनसुलझे हैं सवाल
डॉ. आस्था अग्रवाल हत्याकांड में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ पुलिस की एक टीम आधा दर्जन सवालों के जवाब तलाशने में भी जुटी है ताकि इस हत्या की गुत्थी सुलझाई जा सके। यह साफ हो सके कि कहीं इस हत्या में पति के साथ कोई बाहरी भी तो शामिल नहीं है? इनमें सबसे अहम सवाल पति की अधिकांश रातें होटलों में कटना? किस महिला से मित्रता होना? ऑक्सीजन कांड से जुड़े किरदारों की भूमिका क्या है? बाहरी पुरुष और कौन संलिप्त हो सकते हैं? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने कई मोबाइल नंबर जांच की जद में लिए हैं। उनकी मदद से गुत्थी सुलझाने के साथ-साथ मुख्य आरोपी तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।
इन सवालों पर गहराई से हो रही पुलिस की जांच
पुलिस की अब तक की जांच में यह तो साफ है कि ऑक्सीजन कांड के समय जो ऑडियो वायरल हुआ था, उसमें खुद अरुण अग्रवाल अपनी पत्नी की हत्या की सुपारी देने की बात कह रहा है। इसके अलावा तथ्य प्रकाश में आया है कि वह एक अन्य व्यक्ति की हत्या की सुपारी देने की बात भी वह कहता था। सवाल है कि आखिर वह व्यक्ति कौन है और क्यों उसकी हत्या की सुपारी देना चाहता था। इसके अलावा दंपती के बीच इतना झगड़ा किस बात को लेकर, क्यों होता था कि अधिकांश रात अरुण अग्रवाल होटल के कमराें में काटता था। क्या जानबूझकर या पत्नी के सामने आने से बचने के लिए। इसके अलावा ऑक्सीजन कांड से जुड़े किरदारों की भूमिका भी इस प्रकरण से जोड़कर जांची जा रही है। सवाल खड़ा हो रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उस समय आस्था की ओर से की गई शिकायत को वापस कराने के लिए फिलहाल किसी तरह का नया विवाद दंपती में शुरू हुआ हो। उसी विवाद ने यह रूप ले लिया हो, क्योंकि जो सुपारी देने संबंधी जो ऑडियो उस समय वायरल हुआ था। वह ऑडियो भी ऑक्सीजन कांड से जुड़े किरदारों की ओर से ही वायरल किया गया था। कुल मिलाकर इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस गंभीरता से खोज रही है। तथ्यों को जुटाने और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
जल्द न हुआ गिरफ्तार तो होगी कइयों से पूछताछ
वैसे पुलिस की तीन टीमें अरुण की तलाश में हर संभावित ठिकाने पर दबिश दे रही हैं। नाते रिश्तेदारियों से लेकर उसके करीबियों, मोबाइल सर्विलांस से प्रकाश में आए लोगों तक पहुंचा जा रहा है। मगर इतना जरूर है कि अगर जल्द अरुण हाथ नहीं आया तो पुलिस पूछताछ की जद में कई लोग आ सकते हैं।
मनीष की भूमिका को भी देखेगी पुलिस
पुलिस जांच में मनीष नाम के युवक की भूमिका भी देखी जाएगी। उसके इस परिवार से क्या रिश्ते थे। किस तरह की नजदीकियां थीं। दंपती में वह किसके ज्यादा नजदीक था। किसका विश्वासपात्र था। उस आधार पर आगे उससे भी तथ्य निकलवाए जा सकते हैं।
- वैसे तो यह हत्या अब तक के तथ्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व नामजदगी के आधार पर साफ है। फिर भी अरुण अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन तथ्यों को भी समझा जा रहा है जो हत्या की वजह हो सकते हैं। उसी अनुसार आगे निर्णय लिया जाएगा।-श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय