बुरी लत: 12 साल के बच्चे ने ‘हथियार’ खरीदने के लिए पहले पिता के पैसे चुराए, फिर बेच दिए मां के गहने, पकड़े जाने के डर से घर छोड़ भागा
लॉकडाउन के चलते ऑनलाइन क्लास के लिए पिता ने उसे स्मार्ट फोन दिलाया था। बाद में बच्चे ने फोन में ऑनलाइन बैटल गेम फ्री फायर डाउनलोड कर लिया। धीरे-धीरे वह उस गेम का आदी हो गया।
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पिता ने उसे ऑनलाइन क्लास के लिए स्मार्टफोन दिलाया था। पकड़े जाने के डर से वह मंगलवार तड़के घर से भाग गया। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से कालिंदी एक्सप्रेस में सवार होकर अलीगढ़ जंक्शन आ गया। यहां प्लेटफार्म दो पर बैठकर रोने लगा। आरपीएफ ने पूछताछ की तो उसने पूरी हकीकत बयां की।
आरपीएफ अलीगढ़ के पोस्ट कमांडर चमन सिंह तोमर ने बताया कि ये 12 वर्षीय बालक दिल्ली के नामचीन स्कूल में 6वीं कक्षा का छात्र है। पिता नमकीन, चिप्स आदि स्नैक्स का कारोबार करते हैं। लॉकडाउन के चलते ऑनलाइन क्लास के लिए पिता ने उसे स्मार्ट फोन दिलाया था। बाद में बच्चे ने फोन में ऑनलाइन बैटल गेम फ्री फायर डाउनलोड कर लिया। धीरे-धीरे वह उस गेम का आदी हो गया। गेम अपडेट के लिए उसे ऑनलाइन हथियार खरीदने थे तो वह अपने पिता की जेब से पैसे चुराने लगा। इलाके में ही रहने वाले एक युवक को वह पैसे देता था।
युवक अपने खाते से गेम में ऑनलाइन हथियार खरीदकर देता था। इसकी एवज में युवक बच्चे से मोटा कमीशन लेता था। एक बार उसने अपनी मां के गहने चुराए और उन्हें पास के ही ज्वेलर्स को बेच दिए। इससे मिली रकम से भी उसने ऑनलाइन हथियार खरीदे। करीब एक माह के भीतर उसने 20 हजार रुपये के ऑनलाइन हथियार खरीद डाले।
सोमवार को मां का ध्यान गहनों पर गया तो उनको जंजीर नहीं मिली। घर में तलाशी हुई। इससे बालक सहम गया। घरवालों को उस पर शक भी हुआ। पकड़े जाने के डर से वह मंगलवार तड़के घर से निकल नई दिल्ली स्टेशन पहुंचा और वहां से कालिंदी एक्सप्रेस में बिना टिकट ही सवार हो गया। अलीगढ़ जंक्शन पर ट्रेन पहुंची तो वह यहां उतर गया और प्लेटफार्म दो पर बैठकर रोने लगा।
प्लेटफार्म गश्ती पर एएसआई ओंकार सिंह की ड्यूटी लगी थी। उन्होंने बालक को रोते देखा तो संदेह हुआ। थाने लाकर की गई पूछताछ में बालक ने पूरी सच्चाई बताई। इसके बाद उसने अपने पिता का मोबाइल नंबर दिया। पिता को बालक के संबंध में सूचना दी गई। दोपहर में वह अलीगढ़ जंक्शन आए। बालक को समझा बुझाकर पिता के सुपुर्द कर दिया गया है।
गेमिंग डिसऑर्डर के शिकार हो रहे हैं बच्चे
स्वास्थ्य विभाग की साइको थेरेपिस्ट (पीएसडब्ल्यू) डॉ. अंशु सोम का कहना है कि इस प्रकार की लत को गेमिंग डिसऑर्डर कहते हैं, यह इंटरनेट एडिक्शन का ही एक हिस्सा है। इस डिसऑर्डर के शिकार बच्चों में चिड़चिड़ापन, बात-बात पर उग्र होना, नींद न आना, गेम हारने या न खेल पाने की स्थिति में बेहद उदास रहना आदि समस्याएं आती हैं। बच्चों का दिमाग गेम में इतना रहता है कि वह किसी से बातचीत भी नहीं करते हैं।
बच्चों में इस प्रकार के लक्षण दिखने पर अभिभावकों को सतर्क हो जाना चाहिए। इस डिसऑर्डर से बाहर निकालने के लिए बच्चों से बातचीत करें। मोबाइल से दूर रखने की कोशिश करें, आउटडोर गेम खिलाएं। किसी मनोवैज्ञानिक से बच्चों की काउंसिलिंग कराएं। समय रहते बच्चों पर ध्यान नहीं दिया तो अभिभावकों को अधिक नुकसान हो सकता है।