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Aligarh Exhibition: नुमाइश के 145 साल में पहली बार होगा यह, जिला प्रशासन ने की तैयारी शुरू

Fri, 21 Nov 2025 05:35 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 21 Nov 2025 05:35 PM IST
सार

अलीगढ़ नुमाइश का इतिहास लगभग डेढ़ सदी पुराना है। इसकी शुरुआत पहली बार 1880 में 'अलीगढ़ जिला मेला' के नाम से हुई थी।

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Tehbazari contracts at Aligarh Exhibition
अलीगढ़ की नुमाइश - फोटो : अलीगढ़ महोत्सव आधिकारिक वेबसाइट

विस्तार

अलीगढ़ की ऐतिहासिक नुमाइश (प्रदर्शनी) अपने 145 साल के इतिहास में पहली बार एक बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव करने जा रही है। जिला प्रशासन ने इस बार नुमाइश के सभी ठेकों को ऑनलाइन माध्यम से आवंटित करने की तैयारी शुरू कर दी है।

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पारदर्शिता लाने और ठेकों से जुड़े विवादों को समाप्त करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। नुमाइश प्रशासन ने ऑनलाइन ठेका प्रक्रिया के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जैम) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। यह महत्वपूर्ण निर्णय दो बड़े कारणों से लिया गया है। इनमें सबसे अहम है नुमाइश के सबसे बड़े राजस्व स्रोत, तहबजारी सहित अन्य ठेकों में हर बार उठने वाले विवादों को खत्म करना।

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नुमाइश के सभी ठेके ऑनलाइन कराने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जैम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होना है। कोशिश कर रहे हैं कि इस बार से ही यह काम हो जाए। पूरा प्रयास कर रहे हैं कि समय से रजिस्ट्रेशन आदि का काम हो जाए। यह कदम पारदर्शिता और बेहतर आयोजन कराने के मकसद से उठाया गया है। - किंशुक श्रीवास्तव, एडीएम सिटी

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राजस्व के बड़े स्रोत भी होंगे ऑनलाइन 
नुमाइश प्रशासन को राजस्व का सबसे बड़ा हिस्सा तहबजारी (स्टॉल और स्थान किराए पर देने का ठेका) से मिलता है। अब तक ये सभी ठेके ऑफलाइन प्रक्रिया से दिए जाते थे। इस बार तहबजारी के अलावा बिजली, साउंड, टेंट, होर्डिंग, केटरिंग, स्मृति चिह्न, सेनिटेशन आदि के ठेके भी ऑनलाइन माध्यम से होंगे। नुमाइश प्रशासन का मानना है कि अन्य शहरों में होने वाले बड़े उत्सवों की तरह ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने से ठेका आवंटन में पूर्ण पारदर्शिता आएगी।



1880 में हुई थी नुमाइश की शुरुआत
अलीगढ़ नुमाइश का इतिहास लगभग डेढ़ सदी पुराना है। इसकी शुरुआत पहली बार 1880 में 'अलीगढ़ जिला मेला' के नाम से हुई थी। उस समय इस आयोजन में घोड़ों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी, जिसमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के घोड़ों ने भी हिस्सा लिया था। अब यह परंपरा बदलने जा रही है, जो आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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