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शिक्षक-शिक्षिका का हुआ स्थानान्तरण: गुस्साए अभिभावक-बच्चों ने स्कूल में जड़ा ताला, रोकना ही पड़ा ट्रांसफर

Mon, 18 Sep 2023 07:25 PM IST
चमन शर्मा शेखर अग्रवाल, अमर उजाला, अलीगढ़
शेखर अग्रवाल, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 18 Sep 2023 07:25 PM IST
सार

अलीगढ़ में विकास खण्ड बिजौली के गांव शफीपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय के इंचार्ज और सहायक अध्यापक को गांव राजगांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय से शिक्षण कार्य हेतु सम्बद्ध करने से अभिभावकों एवं स्कूली बच्चों में रोष व्याप्त हो गया। आक्रोशित अभिभावकों एवं बच्चों ने स्कूल पर ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।

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Teacher transferred, angry parents and children locked the school
प्राथमिक विद्यालय इंचार्ज सुनील कुमार एवं सहायक अध्यापक गुंजन गुप्ता - फोटो : संवाद

विस्तार

शिक्षकों के प्रति अभिभावक और बच्चों के लगाव की पराकाष्ठा अलीगढ़ के एक प्राथमिक विद्यालय में देखने को मिली। शिक्षक-शिक्षिका का स्थानान्तरण कर दिया गया। जब दोनों शिक्षक और शिक्षिका स्कूल चार्ज देने पहुंचे, तो बच्चों और अभिभावकों ने गुस्से में स्कूल के गेट पर ताला डाल दिया। वहीं दोनों के ट्रांसफर को रोकने के लिए प्रदर्शन होने लगा। आखिरकार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को दोनों अध्यापकों को स्थानान्तरण रोकना पड़ा, तब जाकर कहीं बच्चों के चेहरे पर खुशी नजर आई।

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गेट पर जड़ा ताला
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अलीगढ़ में विकास खण्ड बिजौली के गांव शफीपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय के इंचार्ज और सहायक अध्यापक को गांव राजगांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय से शिक्षण कार्य हेतु सम्बद्ध करने से अभिभावकों एवं स्कूली बच्चों में रोष व्याप्त हो गया। आक्रोशित अभिभावकों एवं बच्चों ने स्कूल पर ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों द्वारा खण्ड शिक्षा अधिकारी को फोन बन्द होने पर उपजिलाधिकारी अतरौली को सूचना दी। सूचना के लगभग ढाई घंटे बाद खण्ड शिक्षा अधिकारी गांव पहुंची। 
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खण्ड शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों को समझाने के काफी प्रयास किये लेकिन सफलता नहीं मिली। खण्ड शिक्षा अधिकारी शशिबाला ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। लगभग पांच घंटे बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तत्काल प्रभाव से दोनों अध्यापकों का स्थानान्तरण रोकने के साथ प्राथमिक विद्यालय में ही शिक्षण कार्य कराने का आदेशित पत्र भेजा। जिसके बाद अभिभावकों ने विद्यालय का ताला खोल दिया। 
 

यह था मामला

गांव शफीपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय में इंचार्ज के रूप में सुनील कुमार एवं सहायक अध्यापक के पद पर गुंजन गुप्ता लगभग पांच वर्ष पूर्व तैनात हुए थे। इंचार्ज सुनील कुमार ने बताया कि विद्यालय में तैनाती के समय 1 से लेकर 5 की कक्षा तक मात्र 18 बच्चे ही पंजीकरण थे। गांव में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के बाद लगभग पांच वर्षेां की मेहनत के फलस्वरूप 84 बच्चे पंजीकृत हुये। जिसमें गांव शफीपुर के साथ-साथ अन्य गांवों से भी बच्चे स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। जबकि प्राथमिक विद्यालय की इमारत न होने पर उच्च प्राथमिक की इमारत में ही शिक्षण कार्य किया जाता है। 

बच्चों का विरोध

लेकिन दो दिन पूर्व ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा राजगांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कार्य हेतु पर्यवेक्षक के पद पर इंचार्ज सुनील कुमार एवं गुंजन गुप्ता का स्थानान्तरण कर दिया था। सोमवार की प्रात: विद्यालय का चार्ज देने पहुंचे दोनों अध्यापकगण को अभिभावकों व बच्चों ने घेर कर रोक लिया और विद्यालय के गेट पर ताला लगा दिया। साथ दोनों अध्यापकों के स्थानान्तरण को रोकने की मांग करने लगे। 

ग्रामीणों ने खण्ड शिक्षा अधिकारी को सूचना देने की कोशिश की लेकिन फोन ना मिलने पर उपजिलाधिकारी अतरौली अनिल कटियार को सूचना दी। उपजिलाधिकारी अतरौली के निर्देश पर लगभग ढाई घंटे बाद खण्ड शिक्षा अधिकारी गांव पहुंची। काफी देर समझाने व गेट का ताला खोलने पर बहस भी हुई। लेकिन जब तक स्थानान्तरण रोकने का आदेश ना आने तक गेट खोलने से मना कर दिया। आक्रोशित अभिभावकों को देखकर खण्ड शिक्षा अधिकारी शशिबाला ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सूचना दी। लगभग पांच घंटे बाद अभिभावकों व बच्चों का अध्यापकों के प्रति प्यार देख जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दोनों अध्यापकों का स्थानान्तरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। 


 

ग्राम प्रधान पर स्थानान्तरण में अहम भूमिका निभाने का आरोप

ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम प्रधान ने ही शिकायत कर अध्यापकों का स्थानान्तरण कराने में अहम भूमिका निभाई है। जब शिक्षण कार्य में कोई भी कमी ना होने पर भी आखिर किस प्रकार दोनों अध्यापकों का स्थानान्तरण कराया गया है। 

अधिकारी से बात करते अभिभावक

गांव की नेमवती ने बताया कि मेरे एक पुत्र कक्षा तीन व एक पुत्री कक्षा पांच की छात्रा है। पूर्व में दोनों बच्चों को प्राइवेट स्कूल में शिक्षा ग्रहण करा रहे थे। जब गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में अच्छी शिक्षा मिल रही थी, तो बच्चों को गांव के ही विद्यालय में पंजीकृत कराया। किरन देवी ने बताया कि मेरा एक पुत्र कक्षा दो का छात्र है। अध्यापकों द्वारा स्कूल में बच्चों की पढाई करने के लिए काफी मेहनत करते हैं। सभी को शिक्षा के साथ-साथ उनको अच्छे से ध्यान भी रखते हैं। ऐसे अध्यापकों का स्थानान्तरण करना गलत है। 

खण्ड शिक्षा अधिकारी की गाड़ी के आगे खड़े हो गए बच्चे
सूचना पर पहुंची खण्ड शिक्षा अधिकारी शशिबाला काफी देर अभिभावकों को समझाने के बाद मीटिंग की कह कर जाने लगी तो बच्चों ने उनकी कार के आगे आकर रोक दिया और स्थानान्तरण रोकेन के आदेश आने के बाद जाने को कहा। लेकिन काफी समझाने के बाद खण्ड शिक्षा अधिकारी गांव से जाने में सफल हो पाई। 

बच्चों की भावना और स्कूल निर्बाध संचालन को लेकर शिक्षक व शिक्षिका का स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। - डॉ राकेश कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, अलीगढ़

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