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हुरनमंद बेटियां : मजबूरी को मात देती है इनकी भेलपूरी

Thu, 24 Feb 2022 12:48 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 12:48 AM IST
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Talented daughters: Their Bhelpuri beats the Helplessness
गांधीपार्क पर ढकेल लगाकर भेलपूरी बेचती मानिक चौक निवासी दोनों बहनें। - फोटो : CITY OFFICE
जिस उम्र में बेटियों की पीठ पर बस्ते का बोझ होना चाहिए। उस उम्र में उन्होंने परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले रखी है। कक्षा सात में पढ़ने वालीं दो बहनें गांधीपार्क बस स्टैंड के पास भेलपूरी बेचकर अपने परिवार के लिए पालनहार बनी हुईं हैं। दरअसल, दोनों बहनों के पिता तीन साल से बिस्तर पर हैं, क्योंकि वह लकवा ग्रस्त हैं। इन दोनों बहनों के भेलपूरी बेचने का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
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थाना गांधीपार्क क्षेत्र के मानिक चौक निवासी रूप किशोर व मीना की दोनों बेटी गीता व पूजा पिछले तीन साल से भेलपूरी की ढकेल लगा रही हैं। पिता रूप किशोर टेंपो व ढकेल चलाते थे। उन्हीं के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी थी। वह तीन साल पहले लकवा ग्रस्त हो गए। उसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी। पड़ोसियों की मदद से घर का चूल्हा जल रहा था। एक दिन दोनों बहनों ने ढकेल लगाने का फैसला किया। गीता व पूजा ने अपने पिता व मां की मर्जी से गांधीपार्क बस स्टैंड के पास भेलपूरी की ढकेल लगानी शुरू कर दी। दोनों ने आर्थिक स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रहा। रोजाना कभी 50 तो कभी 90 रुपये की आमदनी होती है। गीता ने बताया कि महेश्वरी कन्या इंटर कॉलेज में कक्षा सात में पढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि ढकेल लगाना उनकी मजबूरी है। वह भी पढ़ना-लिखना चाहती हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वह इसमें सफल नहीं हो पा रही हैं। ट्यूशन करके अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ना चाहती हैं। भेलपूरी बेचने के दौरान शरारतीतत्व उनके साथ अभद्रता भी कर देते हैं। पूजा ने कहा कि पैसे के चक्कर में कोर्स नहीं ले पा रही हैं। मां मीना ने कहा कि अगर उनकी आर्थिक स्थिति ठीक होती तो उनकी बेटियां ढकेल न लगातीं। वह भी पढ़ने जातीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की मदद मिली है।
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