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बैंकों में हड़ताल, 500 करोड़ के कारोबार पर ‘तालाबंदी’

Fri, 17 Dec 2021 01:09 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 01:09 AM IST
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Strike in banks, 'lockdown' on 500 crore business
केनरा बैंक की एडीए शाखा पर धरना प्रदर्शन करते पदाधिकारी व कर्मचारी। - फोटो : CITY OFFICE
निजीकरण के विरोध, पुरानी पेंशन लागू करने समेत अन्य मांगों को लेकर ऑल इंडिया नेशनलाइज्ड बैंक आफीसर्स फेडरेशन एवं यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनरतले बैंकों की दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल बृहस्पतिवार को जिले प्रभावी रही। 10 राष्ट्रीयकृत बैंकों एवं आर्यावर्त बैंक की 265 शाखाओं में तालाबंदी रही। हड़ताल से जिले में करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। हड़ताल के पहले ही दिन जिले के 60 फीसदी से अधिक एटीएम जवाब दे गए। व्यापारी और आम लोग लेन-देन के लिए तरसते नजर आए। इधर, बैंक यूनियनों ने धरना प्रदर्शन कर सरकार को जमकर कोसा।
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ऑल इंडिया नेशनलाइज्ड बैंक आफिसर्स फेडरेशन की अगुवाई में राज्य समिति सदस्य अतुल सिंह के नेतृत्व में बृहस्पतिवार से निजीकरण के विरोध और पुरानी पेंशन लागू करने एवं पुराने निजी बैंकों के राष्ट्रीयकरण की आदि मांगो को लेकर दो दिवसीय बैंक हड़ताल शुरू हो गई। सुबह 9 बजे से 11 बजे तक केनरा बैंक की एडीए शाखा पर बड़ी संख्या में बैंक अधिकारियों ने धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। फेडरेशन के राज्य समिति के सदस्य अतुल सिंह ने कहा कि निजीकरण केवल बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नुकसानदेह नहीं है, बल्कि आम जनता को भी प्रभावित करने वाला है। यदि सरकार नहीं मानी तो हम अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए भी जाएंगे।
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केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के क्षेत्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार ने कहा कि निजीकरण किसी समस्या का हल नहीं है और केवल पूंजीपतियों का हित के लिए है। इस अवसर पर सहायक क्षेत्रीय सचिव गौरव सिंह, केनरा बैंक कर्मचारी यूनियन के प्रदीप चौहान, स्नेहलता चौधरी, शुभम दीप, विशाल वर्मा, श्रुति शर्मा, मुख्तार, ज़ुहैब, राहुल धवन, निशांत, प्रीति लाल, आकांक्षा नागर, नेहा, सचिन, रोशन लाल, नीरज, प्रदीप आदि मौजूद रहे।
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वहीं, बैंक अधिकारी व कर्मचारी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले हड़ताल पर रहे। संयोजक वीके शर्मा ने कहा कि बैंक अधिकारी व कर्मचारी सरकार द्वारा वर्तमान संसद सत्र में प्रस्तावित बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। यह विधेयक बैंकों के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों से सरकारें आर्थिक उदारीकरण की नीति के तहत बैंकों को कमजोर करती रही हैं। हमारी मांग है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सुदृढ़ किया जाए। बैंकों के मूलभूत ढांचे को सुदृढ़ कर तथा कठोर कानून बनाकर जानबूझकर ऋण चुकता न करने वाले ऋणों की वसूली सुनिश्चित की जाए। इस मौके पर बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारी मौजूद रहे।
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