बड़ा सबाल: अब किसके हाथ होगी ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ की कमान, आशुतोष-मुनीर गैंग में हुआ बिखराव
मुनीर की मौत के बाद आशुतोष मिश्रा गैंग में बिखराव हो गया है। अंदरखाने एक दूसरे के प्रति रंजिश पल गई है। ऐसे में मुनीर गुट यह कतई नहीं चाहेगा कि इस गैंग की कमान पूरी तरह आशुतोष के हाथ में चली जाए।
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जरायम की दुनिया में एक नया सवाल सुर्खियों में है। दीवानी में आशुतोष मिश्रा की पेशी के बाद इस सवाल ने तूल पकड़ा और नई चर्चाओं ने जन्म लिया। सवाल है कि बिजनौर जिला पुलिस के रिकार्ड में आईएस-32-21 के रूप में पंजीकृत मुनीर-आशुतोष के अलीगढ़ में बनाए गए गैंग ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ की कमान अब किसके हाथ होगी।
हालांकि अंदरूनी टकराव पहले से था, मगर मुनीर की मौत के बाद आशुतोष मिश्रा गैंग में बिखराव हो गया है। अंदरखाने एक दूसरे के प्रति रंजिश पल गई है। ऐसे में मुनीर गुट यह कतई नहीं चाहेगा कि इस गैंग की कमान पूरी तरह आशुतोष के हाथ में चली जाए। हालांकि दिल्ली पुलिस इस पर पूरी नजर रखे हुए है। टकराव के इसी अंदेशे के चलते शनिवार को आशुतोष को कमांडो सुरक्षा के बीच पेशी पर लाया गया।
ये बात किसी से छिपी नहीं कि एएमयू में लॉ के छात्र और अपनी क्लास के टॉपर आशुतोष मिश्रा का झगड़ा गैर समुदाय की युवती से दोस्ती के चलते शुरू हुआ। इसी झगड़े में एएमयू में ही दाखिला लेने आए मुनीर की आशुतोष से दोस्ती हो गई और दोनों साथ हो गए। बाद में छात्र गुटों के इसी झगड़े के क्रम में वे जरायम दुनिया में ऐसे उतरे कि पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वर्ष 2014 में सिविल लाइंस में कारोबारी फहद की हत्या के बाद आशुतोष मिश्रा पकड़ा गया और जेल चला गया।
उसके बाद मुनीर 2015-16 में बिजनौर में तंजील अहमद दंपती हत्याकांड के बाद पकड़ा गया। तब तक दोनों में अच्छी दोस्ती रही और दोनों लंबे समय तक दिल्ली तिहाड़ जेल में रहे। मगर पुलिस व जरायम सूत्र बताते हैं कि कुछ दिन बाद दोनों में रुपयों को लेकर अंदरखाने टकराव शुरू हुआ। इसके बाद मुनीर यूपी की जेल शिफ्ट हो गया। फिर दोनों में दूरी होती चली गई।
बिजनौर में पंजीकृत है यह गैंग आईएस 32-21
गैंग लीडर मुनीर मेहताब निवासी सहसपुर बिजनौर अब मृत, आशुतोष मिश्रा निवासी जेबी पुरम कालोनी फैजाबाद, रैय्यान, तंजीम अहमद व जैनी निवासी सहसपुर बिजनौर, वरुण गौड़ निवासी फायर बिग्रेड कालोनी बन्नादेवी, अतीउल्लाह निवासी सरिया टोला बेतिया बिहार, तारिक आजमी निवासी चकियान निजामाबाद आजमगढ़, शेख सादाब निवासी कासिमगंज आजमगढ़, फराज उर्फ अकबर निवासी गुरसहायगंज कन्नौज, मो.कासिफ लारी निवासी टाउन लार देवरिया, रिहान आजमी निवासी निजामाबाद आजमगढ़, सऊद अहमद सिद्दीकी निवासी टांडा अंबेडकर नगर 50 हजारी इनामी फरार, अदनान उर्फ शकील उर्फ शेख निवासी टांडा अंबेडकर नगर, यासिर निवासी नौसा बरला अलीगढ़।
ये भी रहे गैंग से जुड़े
यासिर का एक भाई सद्दाम जिसकी हत्या खुद मुनीर ने की, दूसरा भाई फहद जो बीमारी से मारा गया और तीसरा एक अन्य भाई इनसे जुड़े रहे हैं।
मुकीम काला-मुख्तार से जुड़ाव दूरी की बड़ी वजह
इन दोनों के बीच दूरी की दूसरी बड़ी वजह मुनीर का पश्चिमी यूपी के मुकीम काला ग्रुप से जुड़ना और पूर्व यूपी के मुख्तार अंसारी ग्रुप से जुड़ना भी रहा। जिसका आशुतोष विरोध करता था।
अब अलीगढ़ में रहकर बने गैंग पर सबकी नजर
एएमयू में रहने के दौरान इन दोनों ने मिलकर ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ नाम से गैंग बनाया। जिसके अधिकांश सदस्य एएमयू में सक्रिय थे। उनमें से अब अधिकांश अलीगढ़ में नहीं हैं। एक तो दुबई शिफ्ट हो गया है। बाकी अपने-अपने जनपदों में हैं। बस आशुतोष जेल में है और सऊद फरार है। फिर भी मुनीर व आशुतोष से अलग अलग नए लड़के जुड़े हैं और इनके लिए काम करते हैं। मगर अब सवाल यह है कि आखिर मुनीर के बाद पूरी तरह कमान किसके हाथ होगी। चूंकि सऊद आज भी फरार है और मुनीर आशुतोष का पूरा रुपया भी उसी के पास है। साथ में वर्ग विशेष आशुतोष को गैंग सरदार बनते नहीं देखना चाहता है। इसे लेकर सभी की नजर बनी हुई है।
कमांडो सुरक्षा में जरायम रिकार्ड के पहले मुकदमे में आशुतोष की पेशी
मुनीर की मौत के बाद ग्रुप में अंदरखाने टकराव को लेकर दिल्ली पुलिस भी जागरूक है। यही वजह मानी जा रही है कि लंबे समय बाद आशुतोष को पेशी पर लाया गया तो दिल्ली से उसे कमांडो सुरक्षा में लाया गया। रेलवे स्टेशन से दीवानी तक भी उसे पुलिस वैन में लाया गया। इस दौरान अपने जरायम रिकार्ड के पहले क्वार्सी में दर्ज 307 के मुकदमे में उसकी पेशी हुई।
एडीजे-3 राजेश भारद्वाज की अदालत में आशुतोष को पेश किया गया। इस दौरान एडीजीसी जेपी राजपूत ने बताया कि आरोपी के बयान दर्ज कराने के लिए उसे तलब किया गया था। न्यायालय में आरोपी के बयान दर्ज किए गए। यह मुकदमा वर्ष 2013 का है। जिसमें नगला पटवारी रोड पर एक युवती संग लाते समय उसे घेरा गया था। तभी उसने कुछ लोगों पर हमला किया था। इस मामले में अब उसे 6 फरवरी को अंतिम बहस के लिए तलब किया गया है।
इधर, बता दें कि दिल्ली से उसे कड़ी सुरक्षा के बीच लाया गया। एक कमांडो के अलावा आधा दर्जन दिल्ली पुलिस के कर्मी उसे साथ लेकर आए। इस दौरान रेलवे स्टेशन से दीवानी में पेशी भी अलीगढ़ पुलिस के वाहन में कराई गई। खास बात यह रही कि आशुतोष को सिर्फ उसके अधिवक्ता के अलावा किसी से मिलने तक नहीं दिया गया। न किसी को उसके यहां आने की भनक लगी।