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मेरा टेसू यहीं अड़ा, खाने को मांगे दही बड़ा: बच्चों की टोली, टेसू-झांझी के गीत, बनते जा रहे धुंधली कहानी

Sun, 28 Sep 2025 02:02 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 28 Sep 2025 02:02 PM IST
सार

ऐसी मान्यता है कि टेसू का आरंभ महाभारत काल से हुआ था। टेसू झांझी की शादी के बाद ही हिंदू धर्म में शादियों का सीजन शुरू होता है। आज के बदलते परिवेश व डिजिटल युग में टेसू व झांझी इतिहास की एक धुंधली सी कहानी बनकर रह गए हैं। इस विलुप्त हो रही परंपरा को देहात क्षेत्र के बच्चे जीवित किए हुए हैं।

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songs of tesu jhanjhi
टेसू - फोटो : संवाद

विस्तार

विजय दशमी पर रावण का पुतला दहन करने के बाद टेसू-झांझी का पूजन शुरू हो जाएगा। यह बृज क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का एक हिस्सा है। बच्चों की टोलियां हाथों में टेसू और झांझी लेकर गली मोहल्लों में प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते देखे जा सकेंगे।

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लोगों को मेरा टेसू यहीं खड़ा, खाने को मांगे दही बड़ा.. जैसे गीत सुनाई देंगे। बच्चे घर-घर दस्तक देकर गीत गाकर इसके बदले में अनाज व रुपये मांगते हैं। जिसका प्रयोग टेसू और झांझी के विवाह में होगा। इसके बाद हिंदुओं का विवाह सीजन शुरू हो जाएगा।
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महाभारत काल से गहरा नाता
बुजुर्ग मोहनलाल का कहना है कि महाभारत से जुड़े रोचक किस्से से शुरू हुई टेसू झांझी की कहानी का हिंदू धर्म से गहरा नाता है। इसके लिए विद्वानों के अलग-अलग मत हैं। मान्यता है कि टेसू का आरंभ महाभारत काल से हुआ था। टेसू झांझी की शादी के बाद ही हिंदू धर्म में शादियों का सीजन शुरू होता है। बचपन में उन्हें इसका बड़ा शाैक था।
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बुजुर्ग डाॅ. रामपाल सिंह का कहना है कि आज के बदलते परिवेश व डिजिटल युग में टेसू व झांझी इतिहास की एक धुंधली सी कहानी बनकर रह गए हैं। इस विलुप्त हो रही परंपरा को देहात क्षेत्र के बच्चे जीवित किए हुए हैं। शहर में भी कुछ स्थानों पर इस परंपरा का निर्वहन हो रहा है। पूर्णिमा को टेसू व झांझी का धूमधाम से विवाह संपन्न होने के बाद गंगा तट या नहर में टेसू व झांझी का विसर्जन होगा।

ऐसे होते हैं टेसू

तीन लकड़ियों को जोड़कर बनने वाला ढांचा देखने में मनुष्य की आकृति जैसा खिलौना होता है। इसके अंदर दीपक या मोमबत्ती रखने का स्थान होता है। कहीं-कहीं टेसू रामलीला में रावण के पुतला दहन से जलने वाली लकड़ी से बनाया जाता है। केवल टेसू का सिर बनाया जाता है। इसके बाद गेरु, पीली मिट्टी, चूना और काजल से इसकी रंगाई होती है।
झांझी
झांझी की आकृति
झांझी मिट्टी की रंग-बिरंगी एक छोटी मटकीनुमा होती है। इसमें छेद कर डिजाइन बनाए जाते हैं। थोड़ा रेत या राख भर कर इसके अंदर दीपक रखा जाता है। रात के अंधेरे में झांझी के छिद्रों से छन-छनकर बाहर आता प्रकाश मनभावन लगता है। इसे झांझी का हंसना कहा जाता है।

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