Soil Testing: मिट्टी की जान बचाने की जद्दोजहद जारी, इस कारण भूमि हो रही बंजर
किसानों के द्वारा उर्वरक, कीटनाशक और खरपतवारनाशी का असंतुलित प्रयोग करने से भूमि की उर्वरा शक्ति समाप्त होती जा रही है। ऐसे में किसानों को इस पर अंकुश लगाना होगा।
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अलीगढ़ जिले के किसान मिट्टी को जीवनदान देने की जद्दोजहद में जुटे है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है। नौ साल में पहली बार मृदा के जीवांश कार्बन में .05 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। जीवांश कार्बन खेतों की जान कही जाती है।
यह किसानों के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। मगर कृषि विभाग के अनुसार अभी वर्तमान मृदा की स्थिति न्यून श्रेणी में है। इसे मध्यम श्रेणी में लाने के लिए किसानों को जागरूक करने और इसके तरीके बताने का प्रयास विभाग द्वारा किया जा रहा है।
क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला को वर्ष 2024-25 में मृदा के लगभग 12 हजार नमूनों के परीक्षण का लक्ष्य शासन ने दिया था। जिसके सापेक्ष जिले के सभी ब्लाकों से नमूने लिए गए। विभागीय टीम ने एक ब्लाक से 10 गांव का चयन कर 100 किसानों की भूमि से नमूना लिया। जिसकी जांच क्षेत्रीय परीक्षण लैब में कराई गई। जांच में सामने आया कि मृदा में जीवांश कार्बन .30 फीसदी बढ़कर .35 फीसदी पहुंच गया है।
प्रयोगशाला प्रभारी श्याम देव ने बताया कि एक ग्राम मृदा में .8 फीसदी जीवांश कार्बन होना चाहिए। वर्तमान स्थिति अच्छी तो नहीं मगर कार्बन जीवांश बढ़ना शुभ संकेत है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान स्थिति तो न्यून श्रेणी में आती है। मगर इससे पहले 2015-16 में यह स्थिति अति न्यून के बेहद करीब थी। जिसमें नौ साल बाद सुधार हुआ है।
इस कारण भूमि हो रही बंजर
प्रभारी श्याम देव ने बताया कि किसानों के द्वारा उर्वरक, कीटनाशक और खरपतवारनाशी का असंतुलित प्रयोग करने से भूमि की उर्वरा शक्ति समाप्त होती जा रही है। ऐसे में किसानों को इस पर अंकुश लगाना होगा।
मृदा में चार श्रेणी में होती है जीवांश कार्बन की मात्रा
- अति न्यून-0.20 फीसदी
- न्यून-.21 से .50
- मध्यम-.51 से .8
- उच्च-.8 से ऊपर
इस विधि को अपनाएं किसान
- संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग।
- हरी खाद का अधिक प्रयोग।
- केंचुए की खाद का प्रयोग।
- फसल अवशेष को जलाएं न बल्कि खेत में सड़ने को छोड़ दें।
- गोबर खाद का प्रयोग करें।
- दलहनी फसलों का फसल चक्र में समावेश करें।