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भारतीय स्कालरों की मदद करेंगे जर्मनी के इतिहासकार
काैश्ाल कुमार अाेझा
Updated Sun, 02 Oct 2016 01:50 AM IST
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भारतीय स्कालरों की मदद करेंगे जर्मनी के इतिहासकार
- फोटो : अमर उजाला
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जर्मन हिस्टोरियन्स एसोसिएशन (जीएचए) के 51 वें अधिवेशन में शामिल होकर लौटे एएमयू के प्रोफेसर एवं इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के महासचिव प्रो. इशरत आलम ने कहा कि अधिवेशन में ट्रांसनेशनल हिस्ट्री पर मंथन किया गया।
इस अधिवेशन का आयोजन 20 से 23 सितंबर के बीच यूनिवर्सिटी ऑफ हैम्बर्ग, जर्मनी में किया गया था। जर्मनी के इतिहासकार यहां के युवा स्कालरों से खासे प्रभावित हैं और वे भारतीय स्कालरों को आगे बढ़ाने में हरसंभव मदद करेंगे।
प्रो. आलम के अतिरिक्त भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) के चेयरमैन वाई सुदर्शन राव, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रो. रविंद्ररन गोपीनाथ, कलकत्ता यूनिवर्सिटी के प्रो. अरुण कुमार बंदोपध्याय एवं गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रो. आईएस विश्वकर्मा आदि अधिवेशन में शामिल हुए।
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खास बात यह है कि जीएचए के इतिहास में पहली बार किसी दूसरे मुल्क के इतिहासकारों को अतिथि के रूप में बुलाया गया था। प्रो. आलम ने बताया कि एक सत्र में ट्रीटी ऑफ वेस्टफिलिया (1648) के बाद ट्रांसनेशनल इतिहास कैसे लिखा जाए, इस पर मंथन किया गया।
इस संधि के बाद यूरोप में नए नेशन बने। यूरोप एवं इंडिया एक-दूसरे के संपर्क में आए। जर्मन भाषा को भारत में सिखाने एवं जर्मनी की पुस्तकों को भारतीय भाषाओं में अनुवाद पर भी विचार किया गया। प्रो. इशरत ने बताया कि उन्हें जर्मनी के विदेश मंत्रालय में बुलाया गया और उच्चाधिकारियों ने आपसी विचार को साझा किया।
उन्होंने बताया कि अधिवेशन में जर्मनी के विदेश मंत्री एवं जर्मनी में भारत के राजदूत गुरुजीत सिंह शामिल हुए। जर्मनी के विख्यात इतिहासकार मार्टिन एस वासेल, हरमान कुल्के, ए एकर्ट आदि ने अधिवेशन को संबोधित किया। प्रो. आलम जर्मन इतिहासकारों का भारत प्रेम एवं दिलचस्पी देखकर बहुत प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा कि जर्मनी के इतिहासकारों ने भारत के युवा स्कालरों को आगे बढ़ाने में मदद करने की इच्छा जताई। यह भी निर्णय लिया गया कि भारतीय इतिहास पर काम करने वाले जर्मन इतिहासकार इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के अधिवेशन में शामिल होंगे और भारत के इतिहासकार जर्मनी जाएंगे।
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इस अधिवेशन का आयोजन 20 से 23 सितंबर के बीच यूनिवर्सिटी ऑफ हैम्बर्ग, जर्मनी में किया गया था। जर्मनी के इतिहासकार यहां के युवा स्कालरों से खासे प्रभावित हैं और वे भारतीय स्कालरों को आगे बढ़ाने में हरसंभव मदद करेंगे।
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प्रो. आलम के अतिरिक्त भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) के चेयरमैन वाई सुदर्शन राव, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रो. रविंद्ररन गोपीनाथ, कलकत्ता यूनिवर्सिटी के प्रो. अरुण कुमार बंदोपध्याय एवं गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रो. आईएस विश्वकर्मा आदि अधिवेशन में शामिल हुए।
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खास बात यह है कि जीएचए के इतिहास में पहली बार किसी दूसरे मुल्क के इतिहासकारों को अतिथि के रूप में बुलाया गया था। प्रो. आलम ने बताया कि एक सत्र में ट्रीटी ऑफ वेस्टफिलिया (1648) के बाद ट्रांसनेशनल इतिहास कैसे लिखा जाए, इस पर मंथन किया गया।
इस संधि के बाद यूरोप में नए नेशन बने। यूरोप एवं इंडिया एक-दूसरे के संपर्क में आए। जर्मन भाषा को भारत में सिखाने एवं जर्मनी की पुस्तकों को भारतीय भाषाओं में अनुवाद पर भी विचार किया गया। प्रो. इशरत ने बताया कि उन्हें जर्मनी के विदेश मंत्रालय में बुलाया गया और उच्चाधिकारियों ने आपसी विचार को साझा किया।
उन्होंने बताया कि अधिवेशन में जर्मनी के विदेश मंत्री एवं जर्मनी में भारत के राजदूत गुरुजीत सिंह शामिल हुए। जर्मनी के विख्यात इतिहासकार मार्टिन एस वासेल, हरमान कुल्के, ए एकर्ट आदि ने अधिवेशन को संबोधित किया। प्रो. आलम जर्मन इतिहासकारों का भारत प्रेम एवं दिलचस्पी देखकर बहुत प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा कि जर्मनी के इतिहासकारों ने भारत के युवा स्कालरों को आगे बढ़ाने में मदद करने की इच्छा जताई। यह भी निर्णय लिया गया कि भारतीय इतिहास पर काम करने वाले जर्मन इतिहासकार इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के अधिवेशन में शामिल होंगे और भारत के इतिहासकार जर्मनी जाएंगे।