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Aligarh News: बनारस में सर सैयद का देखा ख्वाब अलीगढ़ में हुआ सच, बनाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
Mon, 27 Mar 2023 01:23 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ्
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ्
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Mar 2023 01:23 AM IST
सार
सर सैयद को यूनिवर्सिटी बनाने का जुनून था। 9 फरवरी 1873 को बनारस में उन्होंने अपनी सोच को उजागर करते हुए कहा कि वह ‘कोई मदरसा नहीं बना रहे, कोई कॉलेज नहीं बना रहे, बल्कि हम भविष्य की यूनिवर्सिटी बनाने का ख्वाब देख रहे हैैं।
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सर सैयद अहमद
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के संस्थापक सर सैयद अहमद 27 मार्च 1898 को दुनिया को अलविदा कह गए थे। दुनिया को अलविदा कहने से पहले सर सैयद ने बनारस की सरजमीं पर एक यूनिवर्सिटी का ख्वाब देखा था, जो अलीगढ़ में 1920 में सच हुआ, जिसकी बुनियाद उन्होंने 1875 में मदरसा तुल उलूम के रूप में रखी थी। 1877 में यही मदरसा मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के वजूद में आया। 43 साल के बाद यह कॉलेज विश्वविद्यालय में तब्दील हो गया।
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एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि सर सैयद को यूनिवर्सिटी बनाने का जुनून था। 9 फरवरी 1873 को बनारस में उन्होंने अपनी सोच को उजागर करते हुए कहा कि वह ‘कोई मदरसा नहीं बना रहे, कोई कॉलेज नहीं बना रहे, बल्कि हम भविष्य की यूनिवर्सिटी बनाने का ख्वाब देख रहे हैैं। भविष्य की यूनिवर्सिटी वहां बनाऊंगा, जहां की आबोहवा सबसे बेहतर हो’। सर सैयद ने उस वक्त अलीगढ़ के सिविल सर्जन आर जैक्सन, कलेक्टर हेनरी जार्ज लॉरेंस व पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर हंट की कमेटी बनाई, जिन्हें अलीगढ़ की भौगोलिक स्थिति के बारे में जानने के लिए जिम्मेदारी सौंपी। कमेटी ने बताया कि यहां न तो बाढ़ आ सकती है और न ही अकाल पड़ सकता है, क्योंकि नदी दूर और 20 फिट के नीचे जल स्रोत है। अलीगढ़ के बारे में यह खासियत सर सैयद को काफी पसंद आई। उन्होंने भविष्य की यूनिवर्सिटी के रूप में एक शिक्षा का पौधा मदरसा के रूप में रोपित किया।
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25 रुपये देंगे तो खुदेंगे नाम
डॉ. राहत ने कहा कि सर सैयद ने मदरसा और कॉलेज के भवन बनाने के लिए जो उपाय निकाला, वह काम आ गया। उन्होंने ‘अपनी मदद आप में’ योजना शुरू की। इसमें जो 25 रुपये दान करने वाले का नाम मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की चाहरदीवारी पर लिखने का प्रस्ताव दिया गया। दूसरा प्रस्ताव था कि 250 रुपये दान करने वाले के नाम से हॉस्टल, जबकि 500 रुपये दान करने वाले का नाम स्ट्रेची हॉल में लिखा जाएगा। ये फार्मूला काम कर गया। नतीजा ये हुआ कि कॉलेज की दीवार पर 286 दानदाताओं के नाम हैं, जिनमें अंग्रेज, हिंदू, मुस्लिम, सिख के नाम हैं।
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हिंदू शख्सियतों के नाम से हॉस्टल
डॉ. राहत कहा कि एएमयू में हिंदू शख्सियतों को अहमियत दी गई है। इनमें सरोजनी नायडू हॉल (महिलाओं के लिए), चक्रवर्ती हॉस्टल, ध्यानचंद हॉस्टल, राजा जयकिशन दास हॉस्टल, राजा महेंद्र प्रताप हॉस्टल शामिल हैं।