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सरिया और इंगट बनाने वाली श्रीमहाकाल कान्कास्ट कंपनी पर छापा, 2019-20 का टर्नओवर 68 करोड़ रुपये
Sat, 13 Feb 2021 12:32 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Feb 2021 12:32 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम ने शुक्रवार को हाथरस के सिकंदराराऊ के पास श्रीमहाकाल कान्कास्ट प्राइवेट लिमिटेड पर छापा मारा। अधिकारियों की टीम के अचानक पहुंचने से पूरी कंपनी में अफरातफरी मच गई। टीम के साथ पहुंचे सुरक्षा कर्मियों ने अंदर पहुंच कर गेट बंद करा दिया। इसके बाद जांच पड़ताल शुरू हो गई।
कंपनी में सरिया, इंगट, गार्डर के साथ अन्य लौह सामग्री का निर्माण होता है। वर्ष 2017 में इस फर्म का जीएसटी पंजीकरण हुआ था। कंपनी का वित्तीय वर्ष 2019-20 का टर्नओवर 68 करोड़ रुपये था। कंपनी का अधिकांश कारोबार आसपास के जनपदों में होता है। स्क्रैप को गला कर यहां लोहे के अलग अलग उत्पाद बनाए जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि अभी कंपनी में कच्चे माल, बने हुए माल, स्टॉक का मिलान किया जाएगा। इसके बाद कच्चे माल की खरीद, उस पर दिए गए टैक्स, बेचे गए माल पर टैक्स आदि का हिसाब किताब लगाया जाएगा।
अगर कारोबार के अनुसार टैक्स जमा नहीं होगा तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। कंपनी के 2017-18 से लेकर अभी तक का कारोबार भी देखा जा रहा है, जिससे पहले के टर्नओवर और टैक्स का हिसाब लग सके। अधिकारियों की टीम देर रात तक जांच पड़ताल में जुटी थी। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट रूप से बताया जा सकेगा कि कर चोरी का कितना बड़ा मामला है।
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गौर हो कि आनलाइन होने के बाद जीएसटी पोर्टल से कई तरह का डाटा मिल रहा है। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर जांच पड़ताल का अभियान पूरे प्रदेश में चल रहा है। जिसमें एसआईबी की अलग अलग टीमें काम कर रही हैं। वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर एसआईबी एके माहेश्वरी ने बताया कि जांच पड़ताल हो रही है। पूरा ब्यौरा मिलने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ बताया जा सकता है।
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कंपनी में सरिया, इंगट, गार्डर के साथ अन्य लौह सामग्री का निर्माण होता है। वर्ष 2017 में इस फर्म का जीएसटी पंजीकरण हुआ था। कंपनी का वित्तीय वर्ष 2019-20 का टर्नओवर 68 करोड़ रुपये था। कंपनी का अधिकांश कारोबार आसपास के जनपदों में होता है। स्क्रैप को गला कर यहां लोहे के अलग अलग उत्पाद बनाए जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि अभी कंपनी में कच्चे माल, बने हुए माल, स्टॉक का मिलान किया जाएगा। इसके बाद कच्चे माल की खरीद, उस पर दिए गए टैक्स, बेचे गए माल पर टैक्स आदि का हिसाब किताब लगाया जाएगा।
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अगर कारोबार के अनुसार टैक्स जमा नहीं होगा तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। कंपनी के 2017-18 से लेकर अभी तक का कारोबार भी देखा जा रहा है, जिससे पहले के टर्नओवर और टैक्स का हिसाब लग सके। अधिकारियों की टीम देर रात तक जांच पड़ताल में जुटी थी। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट रूप से बताया जा सकेगा कि कर चोरी का कितना बड़ा मामला है।
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गौर हो कि आनलाइन होने के बाद जीएसटी पोर्टल से कई तरह का डाटा मिल रहा है। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर जांच पड़ताल का अभियान पूरे प्रदेश में चल रहा है। जिसमें एसआईबी की अलग अलग टीमें काम कर रही हैं। वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर एसआईबी एके माहेश्वरी ने बताया कि जांच पड़ताल हो रही है। पूरा ब्यौरा मिलने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ बताया जा सकता है।