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वो कभी तुम्हारे जूते साफ किया करते थे : मधु
ब्यूराे/अमर उजाला,अलीगढ़
Updated Mon, 04 Apr 2016 01:27 AM IST
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मधु मिश्रा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष
- फोटो : अमर उजाला ब्यूराे
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भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष मधु मिश्रा ने रविवार को परशुराम सेवा संस्थान द्वारा राम लीला मैदान में आयोजित विप्र सम्मेलन एवं होली मिलन समारोह में विवादित बयान देकर खलबली मचा दी है। उनके अलावा दूसरे नेताओं ने भी इशारों में इशारों में ब्राह्मण समुदाय की एकता के लिए दूसरी जातियों के खिलाफ लामबंद होने का आह्वान किया।
मधु मिश्रा ने कहा कि ‘साथियों आप सब यहां बैठे हैं। यहां कुछ व्रिप बंधुओं अलावा भी लोग बैठे हैं। मैं उनसे क्षमा चाहती हूं..। आज तुम्हारे सिर पर बैठ कर संविधान के सहारे जो राज कर रहे हैं। याद करो.. वो कभी तुम्हारे जूते साफ किया करते थे। आज तुम्हारे हुजूर हो गये हैं..। क्यों..? हम बंट गए..। हम विभाजित हो गये..।
मेरे छोटे भाई सतीश गौतम को शायद आज से 40 वर्ष बाद का भारत दिख रहा है। कि तुम्हारे बच्चे फिर गुलाम न हो जाएं। कहीं फिर से हुजूर न कहने लगे उन्हें, जिन्हें तुम अपने बराबर में बैठाना पसंद नहीं करते। उठो जागो और जब तक अपने अधिकार ले न ले लो तब तक सतीश गौतम की तर्ज पर युद्ध करते रहो। मधु मिश्रा के इस बयान के बाद अलीगढ़ के सियासी हलकों में जबरदस्त बहस छिड़ गई। सोशल मीडिया पर भी ये बयान बहुत तेजी के साथ वायरल होने लगा है।
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मैं अपने सामाज के कार्यक्रम में बोल रही थी। समाज की बेटी और बहू हूं। मेरा आशय किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। किसी को दुख हुआ तो मैं उनसे क्षमा मांगती हूं। मेरे कहने का आशय ये था कि हमारे समाज के बच्चों को भी सरकारी नौकरी मिले। संविधान में आरक्षण का प्रावधान नहीं होता तो हमारे बच्चे भी अधिकारी बनते।
-मधु मिश्रा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष।
मैं मधु मिश्रा का पूरा भाषण नहीं सुन पaाया। अगर मैं मौके पर होता और वो इस तरह का कोई बयान देती तो उन्हें वहीं पर इसका जवाब भी देता। मुझे इस बारे में इससे ज्यादा कुछ पता नहीं है।
-रामवीर उपाध्याय, पूर्व कबीना मंत्री एवं बसपा नेता।
मेरी जानकारी में ऐसा कोई बयान नहीं आया है। मैं उनके भाषण के पूर्व व्यस्त हो गया था और वहां से निकल आया था।
-सतीश गौतम, सांसद।
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मधु मिश्रा ने कहा कि ‘साथियों आप सब यहां बैठे हैं। यहां कुछ व्रिप बंधुओं अलावा भी लोग बैठे हैं। मैं उनसे क्षमा चाहती हूं..। आज तुम्हारे सिर पर बैठ कर संविधान के सहारे जो राज कर रहे हैं। याद करो.. वो कभी तुम्हारे जूते साफ किया करते थे। आज तुम्हारे हुजूर हो गये हैं..। क्यों..? हम बंट गए..। हम विभाजित हो गये..।
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मेरे छोटे भाई सतीश गौतम को शायद आज से 40 वर्ष बाद का भारत दिख रहा है। कि तुम्हारे बच्चे फिर गुलाम न हो जाएं। कहीं फिर से हुजूर न कहने लगे उन्हें, जिन्हें तुम अपने बराबर में बैठाना पसंद नहीं करते। उठो जागो और जब तक अपने अधिकार ले न ले लो तब तक सतीश गौतम की तर्ज पर युद्ध करते रहो। मधु मिश्रा के इस बयान के बाद अलीगढ़ के सियासी हलकों में जबरदस्त बहस छिड़ गई। सोशल मीडिया पर भी ये बयान बहुत तेजी के साथ वायरल होने लगा है।
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मैं अपने सामाज के कार्यक्रम में बोल रही थी। समाज की बेटी और बहू हूं। मेरा आशय किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। किसी को दुख हुआ तो मैं उनसे क्षमा मांगती हूं। मेरे कहने का आशय ये था कि हमारे समाज के बच्चों को भी सरकारी नौकरी मिले। संविधान में आरक्षण का प्रावधान नहीं होता तो हमारे बच्चे भी अधिकारी बनते।
-मधु मिश्रा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष।
मैं मधु मिश्रा का पूरा भाषण नहीं सुन पaाया। अगर मैं मौके पर होता और वो इस तरह का कोई बयान देती तो उन्हें वहीं पर इसका जवाब भी देता। मुझे इस बारे में इससे ज्यादा कुछ पता नहीं है।
-रामवीर उपाध्याय, पूर्व कबीना मंत्री एवं बसपा नेता।
मेरी जानकारी में ऐसा कोई बयान नहीं आया है। मैं उनके भाषण के पूर्व व्यस्त हो गया था और वहां से निकल आया था।
-सतीश गौतम, सांसद।