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सराय हकीम फायरिंग कांड: आरोपी शशांक की भी जमानत मंजूर, शर्तों के साथ रिहा करने का दिया आदेश

Sat, 02 May 2026 12:52 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sat, 02 May 2026 12:52 PM IST
सार

न्यायालय ने शशांक को व्यक्तिगत बंध पत्र और दो जमानतदारों की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही यह चेतावनी दी कि यदि आवेदक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करता है, गवाहों को डराता है या किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल होता है, तो निचली अदालत उसकी जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगी।

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Shashank Pandit granted bail in Sarai Hakeem firing case
कोर्ट (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अलीगढ़ के थाना बन्नादेवी क्षेत्र में हुई मारपीट और बलवे के मामले में नामजद आरोपी शशांक शंकर शर्मा उर्फ शशांक पंडित उर्फ शैलू की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया है।

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शशांक के खिलाफ थाना बन्नादेवी में मुक़दमा अपराध संख्या 230 ( 2026) के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं, और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धारा 7 शामिल हैं, के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी 16 मार्च 2026 से जेल में बंद था। बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि एफआईआर में आवेदक की कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई है और घटना दो समूहों के बीच झगड़े की थी। 
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यह भी कहा गया कि घायल व्यक्ति ने हमले के लिए शशांक को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया और न ही उसके पास से कोई हथियार बरामद हुआ। आपराधिक इतिहास के नाम पर बताए गए 9 मामलों में से अधिकांश में वह जमानत पर है और दो में बरी हो चुका है। राज्य के सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एक आदतन अपराधी है और उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है। कोर्ट ने अपने आदेश में नोट किया कि समान स्थिति वाले एक अन्य सह-अभियुक्त यश गुप्ता को पहले ही जमानत मिल चुकी है। अदालत ने यह भी पाया कि चोटें जीवन के लिए घातक नहीं थीं।
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शर्तों के साथ रिहाई
न्यायालय ने शशांक को व्यक्तिगत बंध पत्र और दो जमानतदारों की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही यह चेतावनी दी कि यदि आवेदक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करता है, गवाहों को डराता है या किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल होता है, तो निचली अदालत उसकी जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जेल से रिहाई जमानत आदेश प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से भेजी जाएगी।

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