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सीएए: प्रदर्शन के दौरान तिरंगे टेंट बनाने को लेकर पुलिस से नोक-झोंक
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शाहजमाल ईदगाह पर धरने पर बैठी महिलाएं।
- फोटो : Dig Vishal
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शाहजमाल ईदगाह पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का चौथा दिन शनिवार शांतिपूर्ण तरीके से गुजर रहा था, मगर शाम को तिरंगे का टेंट बनाने को लेकर पुलिस की प्रदर्शनकारियों से गहमागहमी हो गई। महिलाएं तिरंगे का टेंट बनाने पर अड़ गईं। पुलिस ने उसे जब्त कर लिया। इस दौरान महिलाओं ने पुुलिस को घेरने की कोशिश की।
तत्काल आला अधिकारियों ने मामले को संभालते हुए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की नसीहत देते हुए लोगों को शांत कर दिया। देररात तक धरना स्थल पर करीब दो हजार के करीब भीड़ जुटी रही। शनिवार को एएमयू की छात्राओं ने ही मोर्चा संभाले रखा। इधर, सज्जाद सुभान रॉथर पर मुकदमा होने पर एएमयू छात्रों ने धरने से दिन भर दूरी बनाए रखी।
बुधवार से शाहजमाल ईदगाह में जारी धरना प्रदर्शन में पहले दिन से ही महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार शाम एएमयू के कश्मीरी छात्र सज्जाद सुभान रॉथर के वहां पहुंचने पर हुए हंगामे के बाद पुलिस द्वारा सज्जाद पर दर्ज किए मुकदमे के चलते एएमयू छात्रों ने शनिवार को धरने से दूरी बनाए रखी। मगर, छात्राओं की भागीदारी पुरजोर तरीके से रही।
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दिन भर हल्की नारेबाजी के बीच धरना चलता रहा। महिलाओं ने सड़क पर ही दोपहर में नमाज पढ़ी। करीब 500 पुरुष वहां आसपास खड़े रहे। मगर, शाम को कुछ पुरुष और महिलाएं तिरंगा लेकर आए और उसका टेंट बनाने लगे। यह देख पुलिस ने उनको रोक दिया। इस पर उनकी पुलिस से गहमागहमी हो गई। यह देख महिलाओं ने नारेबाजी तेज कर दी।
साथ ही पुलिस का घेराव करने की कोशिश की गई। हालांकि, आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालातों को संभाल लिया और प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने की नसीहत देते हुए शांत कर दिया।
लगातार चौथी रात महिलाओं और बच्चों की करीब दो हजार की संख्या धरना स्थल पर मौजूद रही। हालांकि, शुक्रवार की रात को देखते हुए यह संख्या काफी कम थी। इसे देख प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
-धरना स्थल पर पुलिस की निगरानी बरकरार है। किसी को कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा।-आकाश कुलहरि एसएसपी
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तत्काल आला अधिकारियों ने मामले को संभालते हुए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की नसीहत देते हुए लोगों को शांत कर दिया। देररात तक धरना स्थल पर करीब दो हजार के करीब भीड़ जुटी रही। शनिवार को एएमयू की छात्राओं ने ही मोर्चा संभाले रखा। इधर, सज्जाद सुभान रॉथर पर मुकदमा होने पर एएमयू छात्रों ने धरने से दिन भर दूरी बनाए रखी।
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बुधवार से शाहजमाल ईदगाह में जारी धरना प्रदर्शन में पहले दिन से ही महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार शाम एएमयू के कश्मीरी छात्र सज्जाद सुभान रॉथर के वहां पहुंचने पर हुए हंगामे के बाद पुलिस द्वारा सज्जाद पर दर्ज किए मुकदमे के चलते एएमयू छात्रों ने शनिवार को धरने से दूरी बनाए रखी। मगर, छात्राओं की भागीदारी पुरजोर तरीके से रही।
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दिन भर हल्की नारेबाजी के बीच धरना चलता रहा। महिलाओं ने सड़क पर ही दोपहर में नमाज पढ़ी। करीब 500 पुरुष वहां आसपास खड़े रहे। मगर, शाम को कुछ पुरुष और महिलाएं तिरंगा लेकर आए और उसका टेंट बनाने लगे। यह देख पुलिस ने उनको रोक दिया। इस पर उनकी पुलिस से गहमागहमी हो गई। यह देख महिलाओं ने नारेबाजी तेज कर दी।
साथ ही पुलिस का घेराव करने की कोशिश की गई। हालांकि, आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालातों को संभाल लिया और प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने की नसीहत देते हुए शांत कर दिया।
लगातार चौथी रात महिलाओं और बच्चों की करीब दो हजार की संख्या धरना स्थल पर मौजूद रही। हालांकि, शुक्रवार की रात को देखते हुए यह संख्या काफी कम थी। इसे देख प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
-धरना स्थल पर पुलिस की निगरानी बरकरार है। किसी को कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा।-आकाश कुलहरि एसएसपी
खाली मैदान की बेरिकेडिंग कर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश
ईदगाह के सामने खाली पड़े मैदान की पुलिस ने शुक्रवार देररात को बल्लियों और रस्सी से बैरीकेडिंग करा दी। प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे पुरुषों को पुलिस प्रशासन ने इस बैरीकेडिंग के भीतर रहने की नसीहत दे दी है। इधर, अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शनिवार को कहा कि वह बच्चों को धरना प्रदर्शन में शामिल न कर उनको पढ़ने के लिए स्कूल जाने देने की अपील की। हालांकि इस अपील को लोगों ने अनसुना कर दिया।
देहली गेट के फैक्टरी संचालकों से संपर्क साध भीड़ रोकने की कोशिश
शाहजमाल में जारी धरना प्रदर्शन प्रशासन के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। भीड़ सीधे तौर पर धरना खत्म करने को तैयार नहीं है। शहर मुफ्ती की अपील को भी लोगों ने बुधवार को नकार दिया। अब प्रशासनिक स्तर से इलाके के फैक्टरी संचालकों से संपर्क साधा जा रहा है। संचालकों को अपने मजदूरों को काम पर बुलाने के लिए कड़ाई करने के लिए कहा है। शनिवार को इसका असर भी देखने को मिला।
प्रदर्शन में पुरुषों की भागीदारी कम रही। मगर, महिलाओं को रोकना अब भी परेशानी का सबब बना हुआ है। इधर, धरना स्थल से बच्चों को दूर रखने के लिए इलाके के स्कूल संचालकों को भी बोला गया है कि वह अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के परिवार वालों से संपर्क करें। क्लास न करने पर बच्चों के भविष्य को होने वाले नुकसान के बारे में समझाएं, जिससे की बच्चे धरने पर न जाकर स्कूलों की ओर रुख करें।
धरना ईदगाह में शिफ्ट करने की कवायद नहीं हुई सफल
शाहजमाल में चल रहे धरने को ईदगाह के अंदर शिफ्ट कराने के प्रशासनिक प्रयास सफल होते नहीं दिख रहे हैं। दिन भर शहर मुफ्ती के जरिये यह प्रयास किए जाते रहे कि महिलाओं को किसी भी तरह ईदगाह के अंदर धरने पर बैठा दिया जाए। ताकि रास्ता साफ हो सके। मगर तमाम प्रयासों के बाद भी यह सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में यह बात निकलकर आ रही है कि एएमयू की चंद छात्राओं के आगे महिलाएं किसी की बात मानने को तैयार नहीं हैं।
देहली गेट के फैक्टरी संचालकों से संपर्क साध भीड़ रोकने की कोशिश
शाहजमाल में जारी धरना प्रदर्शन प्रशासन के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। भीड़ सीधे तौर पर धरना खत्म करने को तैयार नहीं है। शहर मुफ्ती की अपील को भी लोगों ने बुधवार को नकार दिया। अब प्रशासनिक स्तर से इलाके के फैक्टरी संचालकों से संपर्क साधा जा रहा है। संचालकों को अपने मजदूरों को काम पर बुलाने के लिए कड़ाई करने के लिए कहा है। शनिवार को इसका असर भी देखने को मिला।
प्रदर्शन में पुरुषों की भागीदारी कम रही। मगर, महिलाओं को रोकना अब भी परेशानी का सबब बना हुआ है। इधर, धरना स्थल से बच्चों को दूर रखने के लिए इलाके के स्कूल संचालकों को भी बोला गया है कि वह अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के परिवार वालों से संपर्क करें। क्लास न करने पर बच्चों के भविष्य को होने वाले नुकसान के बारे में समझाएं, जिससे की बच्चे धरने पर न जाकर स्कूलों की ओर रुख करें।
धरना ईदगाह में शिफ्ट करने की कवायद नहीं हुई सफल
शाहजमाल में चल रहे धरने को ईदगाह के अंदर शिफ्ट कराने के प्रशासनिक प्रयास सफल होते नहीं दिख रहे हैं। दिन भर शहर मुफ्ती के जरिये यह प्रयास किए जाते रहे कि महिलाओं को किसी भी तरह ईदगाह के अंदर धरने पर बैठा दिया जाए। ताकि रास्ता साफ हो सके। मगर तमाम प्रयासों के बाद भी यह सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में यह बात निकलकर आ रही है कि एएमयू की चंद छात्राओं के आगे महिलाएं किसी की बात मानने को तैयार नहीं हैं।