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कोई नहीं था गवाह या चश्मदीद: गैर इरादतन हत्या में तीन दोषियों को सात-सात वर्ष की कैद, यह बना सजा का आधार
Sat, 28 Sep 2024 10:51 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Sat, 28 Sep 2024 10:51 AM IST
सार
मुकदमे में खास बात यह है कि इसमें कोई भी गवाह या चश्मदीद साक्षी नहीं था। घायल द्वारा पुलिस को दिए गए बयान को मृत्यु पूर्व बयान माना गया है। बयान के आधार पर अदालत ने यह सजा सुनाई है।
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गैर इरादतन हत्या में दोषी तीनों आरोपी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
अलीगढ़ में क्वार्सी थाना क्षेत्र के वहीद नगर इलाके में तीन साल पहले युवक की गैर इरादतन हत्या के मुकदमे में तीन दोषियों को एडीजे-छह नवल किशोर सिंह की अदालत ने सात-सात वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है। सभी पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मुकदमे में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इसमें कोई भी गवाह या चश्मदीद साक्षी नहीं था। घायल द्वारा पुलिस को दिए गए बयान को मृत्यु पूर्व बयान माना गया है। बयान के आधार पर अदालत ने यह सजा सुनाई है।
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अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी जेपी राजपूत के अनुसार घटना 16 मई 2021 की है। रुखसाना निवासी वहीद नगर, क्वार्सी के अनुसार उसके शौहर आदिल शाम के समय घर से कहीं जा रहे थे। तभी नामजद निजाम, सानिल व रिजवान से उनका झगड़ा हुआ। हमलावरों ने चाकू से हमलाकर उन्हें घायल कर दिया। पुलिस ने घायल आदिल को अस्पताल में भर्ती कराने के साथ ही मुकदमा दर्ज किया।
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इलाज के दौरान आदिल की मौत हो गई। जिसमें पुलिस ने चार्जशीट दायर की। सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व गवाही के आधार पर मृत्यु पूर्व बयान को सजा का आधार मानते हुए इसके आधार पर गैर इरादतन हत्या में तीनों आरोपियों को दोषी करार देकर सात-सात वर्ष की कैद व 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अदालत ने जुर्माने की आधी राशि पीड़ित को देने के निर्देश दिए हैं।
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