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अलीगढ़ः रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी, बेरोकटोक घुस सकते हैं संदिग्ध

Sat, 04 Dec 2021 12:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 12:39 AM IST
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Security system insufficient at railway station
अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते यात्री। - फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी
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रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी के बाद आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) व जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) ने अलीगढ़ जंक्शन परिसर में सख्ती बढ़ा दी है। प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। लेकिन रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ 40 सीसीटीवी कैमरों के सहारे है। जबकि जरूरत और 70 कैमरों की है। कैमरों की मांग उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी है। कम मानव बल के साथ मैटल डिटेक्टर, लगेज स्कैनर व अंडर व्हीकल सर्विलांस सिस्टम न होने के चलते कोई भी संदिग्ध व्यक्ति बेरोकटोक इधर-उधर घूम सकता है। इससे सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगने का खतरा भी बना रहता है। अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से रोजना करीब छह हजार यात्री सफर करते हैं।
बता दें कि 9 नवंबर मंगलवार की दोपहर मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन पर एक धमकी भरा पत्र पहुंचा था। जिसमें 26 नवंबर और छह दिसंबर को धार्मिक स्थलों और रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। पत्र में अलीगढ़ जंक्शन का नाम भी शामिल था। हालांकि 26 नवंबर की तारीख गुजर चुकी है। फिर भी छह दिसंबर को लेकर स्टेशन परिसर में सख्ती बरती जा रही है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि कम पुलिस फोर्स के पास सुरक्षा के पुख्ता संसाधन तक मौजूद नहीं हैं। अपने दैनिक कार्यों के साथ अलग से चेकिंग अभियान चलाया जाता है। आलम यह है कि स्टेशन परिसर की सुरक्षा सिर्फ 40 सीसीटीवी कैमरे के सहारे है। जबकि जरूरत और 70 कैमरों की है। हालांकि स्टेशन के मुख्य द्वार पर नगर निगम में स्थापित पुलिस कंट्रोल रूम में लगे सीसीटीवी कैमरे से अलग से नजर रखी जाती है।
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70 और सीसीटीवी कैमरों की मांग भेजी जा चुकी है। वर्तमान में कोई भी व्यक्ति आपत्तिजनक सामान के साथ बेरोकटोक स्टेशन परिसर में घुस सकता है। मुख्य द्वार पर प्रवेश के समय न तो डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर से जांच होती है। न ही लगेज स्कैनर से सामान चेक होता है। यही नहीं शहर से सिविल लाइंस को जोड़ने वाले पुल पर दिखाने के लिए बैरीकेडिंग है। लेकिन यहां से लोग इधर-उधर आ जा सकते हैं। इसका एक कारण कम मानव बल भी है। आरपीएफ के 200 जवान होने चाहिए। वहीं 70 जवानों से सारा कामकाज देखा जा रहा है। यह जवान दैनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए रेलवे स्टेशन पर प्रवेश और निकास द्वार पर एक भी जवान नहीं है। जबकि अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से रोजाना करीब छह हजार यात्री सफर करते हैं।
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जरूरत पड़ी तो एक घंटे में आ पाएगी फोर्स
-रेलवे स्टेशन या आसपास कहीं कोई बड़ी घटना घटती है तो नियमित काम कर रहे जवानों को वहां भेजा जाएगा। इससे कई इंतजाम ध्वस्त हो जाएंगे। अलग से पुलिसफोर्स अन्य रेलवे स्टेशनों से आती है। अगर फोर्स की जरूरत पड़ी तो यहां से बुलाने के बाद लगभग एक घंटे में फोर्स अलीगढ़ पहुंच पाएगी। छह दिसंबर या अन्य किसान आंदोलन को देखते हुए यहां बाहर से ही बटालियन आती है।
70 सीसीटीवी कैमरों की मांग भेज रखी है। जिनके इंस्टॉल होने के बाद रेलवे स्टेशन का पूरा परिसर हमारी निगरानी में होगा। मेटल डिटेक्टर, लगे स्कैनर और अंडर व्हीकल सर्विलांस सिस्टम की सुविधा यहां नहीं है।

चमन सिंह तोमर, इंस्पेक्टर आरपीएफ।
सर्कूलेटिंग एरिया में अब तक 40 कैमरे लग चुके हैं। जो ठीक से कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे, लगेज स्केनर और मैटल डिटेक्टर की मांग उच्चाधिकारियों को भेज रखी है।
-डीके गौतम, स्टेशन अधीक्षक।
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